डिंडौरी. एमपी की डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने के साथ स्वास्थ्य विभाग की छवि धूमिल करने पर जिला अस्पताल में पदस्थ नर्सिंग अधिकारी भावना चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. साथ ही सीएमएचओ, सिविल सर्जन व ड्यूटी डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. जिला अस्पताल में चूहामार दवा खाने के बाद इलाज के लिए लाए गए सत्यम यादव निवासी वार्ड क्रमांक पांच डिंडौरी को मिनरल वाटर की बोतल चढ़ाने के मामले में ये कार्रवाई की गई है.
कलेक्टर ने बताया है कि जिला अस्पताल में 22 जुलाई को भर्ती मरीज के उपचार के दौरान स्थापित चिकित्सकीय मानकों के विपरीत सामान्य सलाइन वॉटर के स्थान पर पैक्ड पेयजल की बोतल का उपयोग किए जाने संबंधी प्रकरण की जांच करायी गई. प्रारंभिक जांच में यह प्रथम दृष्ट्या पाया गया है कि भावना चौहान नर्सिंग अधिकारी द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके फलस्वरूप शासन व स्वास्थ्य विभाग की छवि धूमिल हुई. मरीज की सुरक्षा से संबंधित गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं. निलंबन काल में उनका मुख्यालय मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय तय किया गया रहेगा. वह बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ेंगी.
मेडिकल ऑफिसर और अधिकारियों को शोकॉज नोटिस
कलेक्टर ने पदीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता व लापरवाही बरतने पर जिला अस्पताल में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर भरत कुमार संत को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है. कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार पांडेय और सिविल सर्जन व अस्पताल अधीक्षक डॉ. रमेश मरावी को अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. प्रारंभिक जांच में उपचार के दौरान स्थापित चिकित्सकीय मानकों के उल्लंघन, आवश्यक चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं किए जाने, प्रशासनिक व पर्यवेक्षण संबंधी गंभीर लापरवाही सामने आने पर यह कार्रवाई की गई है. दोनों अधिकारियों को तीन अगस्त तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.

