मानव-हाथी संघर्ष पर हाईकोर्ट सख्त सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुरूप नीति बनाने के लिए सरकार को चार माह का समय

मानव-हाथी संघर्ष पर हाईकोर्ट सख्त सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुरूप नीति बनाने के लिए सरकार को चार माह का समय

प्रेषित समय :16:23:20 PM / Wed, Jul 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मामलों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुरूप विस्तृत नीति तैयार करने के लिए चार माह का समय दिया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे संवेदनशील विषय पर वैज्ञानिक, मानवीय और विधिसम्मत नीति तैयार करना आवश्यक है. अदालत ने राज्य सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई छह माह बाद निर्धारित की है.

मामला रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है. याचिका में कहा गया कि छत्तीसगढ़ से आने वाले जंगली हाथियों के झुंड मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों में लगातार प्रवेश कर रहे हैं, जिससे किसानों की फसलें नष्ट हो रही हैं, मकानों को नुकसान पहुंच रहा है और कई स्थानों पर जनहानि की घटनाएं भी सामने आई हैं. याचिकाकर्ता ने अदालत का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि राज्य में हाथियों को पकड़ने की प्रक्रिया को प्राथमिक उपाय के रूप में अपनाया जा रहा है, जबकि इसे केवल अंतिम विकल्प होना चाहिए.

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि पकड़े गए हाथियों को टाइगर रिजर्व भेजकर प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया के दौरान उन्हें अनावश्यक शारीरिक और मानसिक पीड़ा पहुंचाई जाती है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने दलील दी कि वन्यजीव संरक्षण के नाम पर अपनाई जा रही व्यवस्थाएं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं और इस संबंध में स्पष्ट एवं प्रभावी नीति बनाना आवश्यक है.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के चर्चित टी.एन. गोदावरमन थिरुमुलपाड बनाम भारत संघ मामले का हवाला दिया गया. इसमें सुप्रीम कोर्ट ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन, फसल क्षति पर उचित मुआवजा व्यवस्था, प्रभावित लोगों की सुरक्षा तथा वन्यजीव संरक्षण के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. याचिका में मांग की गई थी कि मध्य प्रदेश सरकार भी इन्हीं दिशा-निर्देशों के अनुरूप व्यापक नीति तैयार करे, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा और आम नागरिकों के हितों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके.

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस विषय पर विस्तृत गाइडलाइन तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है और इसके लिए चार माह का समय आवश्यक होगा. इस पर हाई कोर्ट ने सरकार का अनुरोध स्वीकार करते हुए निर्धारित अवधि के भीतर नीति तैयार करने के निर्देश दिए. अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में इस नीति की समीक्षा भी न्यायिक स्तर पर की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का प्रभावी पालन हो रहा है.

हाई कोर्ट के इस आदेश को मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर नई नीति तैयार होती है तो इससे हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों के संरक्षण, किसानों की फसलों की सुरक्षा, प्रभावित परिवारों को समय पर मुआवजा तथा संघर्ष की घटनाओं के मानवीय और वैज्ञानिक समाधान का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा. साथ ही वन विभाग की कार्यप्रणाली के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध होंगे, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-