भ्रूण लिंग परीक्षण का बड़ा भंडाफोड़, गर्भ में बेटी होने पर गर्भपात का सौदा, दो डॉक्टर गिरफ्तार

भ्रूण लिंग परीक्षण का बड़ा भंडाफोड़, गर्भ में बेटी होने पर गर्भपात का सौदा, दो डॉक्टर गिरफ्तार

प्रेषित समय :19:58:15 PM / Thu, Jul 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर में भ्रूण लिंग परीक्षण और अवैध गर्भपात के संगठित नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आधारताल स्थित सरल एक्स-रे एवं पैथोलॉजी के संचालक डॉ. सतीश अग्रवाल और मालवीय चौक स्थित आरके डिजिटल एक्स-रे, सोनोग्राफी एवं कलर डॉप्लर सेंटर के संचालक डॉ. राजेंद्र अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया. दोनों पर आरोप है कि वे अवैध रूप से भ्रूण का लिंग परीक्षण कर गर्भ में कन्या होने पर गर्भपात कराने का सौदा कर रहे थे. हालांकि गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपितों को अदालत से जमानत मिल गई.

मामले का खुलासा पुलिस की सुनियोजित कार्रवाई के दौरान हुआ. भ्रूण लिंग परीक्षण और अवैध गर्भपात की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गोपनीय जांच शुरू की. इसके तहत दो महिला आरक्षकों को गर्भवती महिला बनाकर संबंधित सेंटर पर भेजा गया. पुलिस के इस स्टिंग ऑपरेशन में आरोपितों की कथित भूमिका सामने आई.

जांच के दौरान महिला आरक्षकों से कथित तौर पर 15 हजार रुपये लेकर भ्रूण का लिंग परीक्षण करने और यदि गर्भ में कन्या होने की पुष्टि होती है तो गर्भपात कराने का सौदा तय किया गया. इसके बाद पहले से तैयार पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोनों सेंटरों पर छापेमारी कर कार्रवाई की. जांच के बाद दोनों प्रतिष्ठानों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया.

पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में एक महिला एजेंट डाली जायसवाल उर्फ खुशी की भूमिका भी सामने आई है. जांच में पता चला कि वह कथित तौर पर ग्राहकों को डॉक्टरों तक पहुंचाने और पूरे अवैध नेटवर्क में मध्यस्थ की भूमिका निभा रही थी. कार्रवाई के बाद से वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है.

जांच के दौरान पुलिस ने डॉ. राजेंद्र अग्रवाल और महिला एजेंट के मोबाइल फोन भी जब्त किए. मोबाइल की जांच में कथित रूप से भ्रूण परीक्षण और गर्भपात से जुड़े कई संदिग्ध फोटो और अन्य डिजिटल सामग्री मिली है. पुलिस इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच भी करा रही है ताकि पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके.

प्रारंभिक जांच के आधार पर मंगलवार को दोनों डॉक्टरों और फरार महिला एजेंट के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी. इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपित डॉक्टरों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया. न्यायालय से उन्हें जमानत मिल गई, जबकि महिला एजेंट की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच केवल दो डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहेगी. यह पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध गतिविधि में और कौन-कौन लोग शामिल थे, कितने समय से यह नेटवर्क संचालित हो रहा था तथा कितने मामलों में भ्रूण लिंग परीक्षण और अवैध गर्भपात कराया गया.

स्वास्थ्य विभाग भी मामले की अलग से जांच कर रहा है. जांच के दौरान संबंधित सोनोग्राफी सेंटर और पैथोलॉजी लैब के रिकॉर्ड, पंजीयन दस्तावेज, मरीजों का विवरण और अन्य अभिलेखों की जांच की जा रही है. यदि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित संस्थानों के लाइसेंस निरस्त करने सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है.

भारत में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के तहत भ्रूण का लिंग बताना, उसका परीक्षण करना या इस उद्देश्य से किसी प्रकार की सहायता देना पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है. इसी प्रकार, लिंग चयन के आधार पर गर्भपात कराना भी कानून के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है.

पुलिस का कहना है कि फरार महिला एजेंट की गिरफ्तारी और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच के बाद इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं. जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कहीं यह नेटवर्क अन्य जिलों तक तो फैला नहीं था.

फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भ्रूण लिंग परीक्षण तथा अवैध गर्भपात जैसी सामाजिक बुराइयों पर रोक लगाने के लिए आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-