कटनी को मिली रेलवे की ऐतिहासिक सौगात, देश का सबसे लंबा रेल ग्रेड सेपरेटर साल के अंत तक होगा शुरू

कटनी को मिली रेलवे की ऐतिहासिक सौगात, देश का सबसे लंबा रेल ग्रेड सेपरेटर साल के अंत तक होगा शुरू

प्रेषित समय :20:03:18 PM / Thu, Jul 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश के कटनी में भारतीय रेलवे की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल देश का सबसे लंबा रेल ग्रेड सेपरेटर (रेल फ्लाईओवर) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत विकसित की जा रही 33.40 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. रेलवे ने शेष कार्य नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, ताकि वर्ष के अंत तक पूरे ग्रेड सेपरेटर पर ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जा सके. इस परियोजना के शुरू होने से कटनी रेलवे यार्ड पर वर्षों से बना ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा और यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों की गति में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी.

करीब 1800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही यह परियोजना कटंगी खुर्द से न्यू मझगवां तक विकसित की जा रही है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार परियोजना का 15.85 किलोमीटर लंबा अप ट्रैक पहले ही चालू किया जा चुका है. इस ट्रैक पर वर्तमान में प्रतिदिन 20 से अधिक मालगाड़ियों का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है. वहीं 17.52 किलोमीटर लंबे डाउन ट्रैक का निर्माण अब अंतिम चरण में है. यह वायडक्ट आधारित एलिवेटेड ट्रैक भारतीय रेलवे की सबसे लंबी ऊंची रेल संरचनाओं में शामिल होगा.

रेलवे का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद बिलासपुर और सिंगरौली की दिशा से आने वाली तेज रफ्तार यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां कटनी जंक्शन, न्यू कटनी जंक्शन और कटनी मुड़वारा रेलवे यार्ड में प्रवेश किए बिना सीधे बीना–दमोह–सागर रेलखंड की ओर आगे बढ़ सकेंगी. इससे न केवल ट्रेनों का समय बचेगा, बल्कि कटनी के अत्यधिक व्यस्त रेलवे यार्ड पर ट्रैफिक का दबाव भी काफी कम हो जाएगा.

रेलवे अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में कटनी देश के महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों में शामिल है, जहां पांच अलग-अलग दिशाओं से ट्रेनों की आवाजाही होती है. इसी कारण अक्सर मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को यार्ड तथा आउटर पर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है. नई ग्रेड सेपरेटर परियोजना शुरू होने के बाद मालगाड़ियों को बिना रुके अपने गंतव्य की ओर भेजा जा सकेगा, जिससे यात्री ट्रेनों के लिए ट्रैक की उपलब्धता भी बढ़ेगी और उनका संचालन अधिक समयबद्ध होगा.

हालांकि परियोजना के डाउन ट्रैक का निर्माण पहले ही पूरा होना था, लेकिन तकनीकी चुनौतियों और जटिल इंजीनियरिंग कार्यों के कारण इसमें देरी हुई. रेलवे के अनुसार कटनी मुड़वारा यार्ड के ऊपर वायडक्ट निर्माण, गर्डर लॉन्चिंग और अन्य महत्वपूर्ण सिविल इंजीनियरिंग कार्यों में अपेक्षा से अधिक समय लगा. इसी वजह से परियोजना की समय सीमा दो से तीन बार बढ़ानी पड़ी.

पश्चिम मध्य रेल के अधिकारियों ने बताया कि अब निर्माण एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाकर कार्य को तेज गति से पूरा किया जा रहा है. लक्ष्य है कि नवंबर 2026 तक सभी निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएं और आवश्यक तकनीकी परीक्षणों के बाद वर्ष 2026 के अंत तक पूरे रेल ग्रेड सेपरेटर पर नियमित ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाए.

रेलवे का कहना है कि अप लाइन के संचालन से पहले ही सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं. इस ट्रैक के शुरू होने के बाद मालगाड़ियों का संचालन अधिक व्यवस्थित हुआ है और ट्रेनों का होल्डिंग टाइम कम हुआ है. इससे रेलवे नेटवर्क की परिचालन क्षमता में भी सुधार देखने को मिला है.

विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद पश्चिम मध्य रेल के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल कटनी सेक्शन पर ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होगी. इससे माल परिवहन की गति बढ़ेगी, यात्री ट्रेनों की समयपालन क्षमता में सुधार होगा और रेलवे को परिचालन दक्षता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.

रेलवे अधिकारियों के अनुसार देश के सबसे लंबे रेल ग्रेड सेपरेटर का निर्माण भारतीय रेल के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इसके शुरू होने के बाद न केवल कटनी बल्कि मध्य भारत के प्रमुख रेल मार्गों पर भी यातायात प्रबंधन बेहतर होगा और रेल संचालन पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित बन सकेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-