जबलपुर। एमपी पुलिस के सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार को राहत देते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) जबलपुर ने उनके खिलाफ की जा रही 11.61 लाख रुपए की वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अधिकरण ने भारत सरकार, मध्य प्रदेश शासन और रीवा पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार वर्ष 2024 में रीवा आईजी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अप्रैल 2026 में रीवा के पुलिस अधीक्षक ने उनके खिलाफ 11,61,885 रुपए की वसूली का आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि यदि निर्धारित राशि जमा नहीं की गई तो पेंशन से कटौती कर वसूली की जाएगी। याचिका के अनुसार, वर्ष 2012 में डॉ. सिकरवार का वेतन निर्धारण उनके जूनियर आईपीएस अधिकारियों की तुलना में कम था। इस विसंगति को लेकर उन्होंने अपने नियोक्ता भारत सरकार के समक्ष अभ्यावेदन दिया था। इसके बाद उनका वेतन संशोधित किया गया और संशोधित वेतनमान के आधार पर एरियर का भुगतान भी किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने ष्ट्रञ्ज में दलील दी कि डॉ. सिकरवार भारतीय पुलिस सेवा (ढ्ढक्कस्) के अधिकारी रहे हैं और उनके नियोक्ता भारत सरकार का गृह मंत्रालय तथा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग है, न कि मध्य प्रदेश शासन या रीवा के पुलिस अधीक्षक। याचिका में कहा गया कि रीवा एसपी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर वसूली का आदेश जारी किया है। साथ ही आदेश में यह भी कहीं उल्लेख नहीं है कि डॉ. सिकरवार ने वेतन निर्धारण के लिए कोई गलत जानकारी या तथ्य प्रस्तुत किए थे। आज केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस श्रीवास्तव और जस्टिस आर्य शामिल थे, ने मामले की सुनवाई के बाद डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार के खिलाफ की जा रही वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी। अधिकरण ने भारत सरकार, मध्य प्रदेश शासन और रीवा एसपी से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
रिटायर्ड आईजी से 11.61लाख की वसूली पर कैट ने लगाई रोक, रीवा एसपी के आदेश को दी चुनौती,
प्रेषित समय :16:03:22 PM / Tue, Aug 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर





