हॉस्टल में खराब खाने के पुराने केस पर हाईकोर्ट की राहत, न्यायिक सेवा की उम्मीदवारी पर फिर विचार के निर्देश

हॉस्टल में खराब खाने के पुराने केस पर हाईकोर्ट की राहत, न्यायिक सेवा की उम्मीदवारी पर फिर विचार के निर्देश

प्रेषित समय :19:32:59 PM / Sat, Aug 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उच्च न्यायिक सेवा के एक उम्मीदवार को बड़ी राहत देते हुए उसकी उम्मीदवारी खारिज करने संबंधी आदेश को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि छात्र जीवन के दौरान दर्ज हुए पुराने आपराधिक मामलों को उम्मीदवार की वर्तमान योग्यता और आचरण के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. अदालत ने पाया कि जिन दो मामलों के आधार पर उम्मीदवार की नियुक्ति की सिफारिश नहीं की गई, वे नैतिक अधमता (Moral Turpitude) से जुड़े गंभीर अपराध नहीं थे. दोनों मामलों में उम्मीदवार बाद में बरी भी हो चुका था. हाईकोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है.

मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने की. याचिका मध्य प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा परीक्षा-2017 के एक उम्मीदवार द्वारा दायर की गई थी. उम्मीदवार ने परीक्षा के लिए आवेदन करते समय वर्ष 2002 में दर्ज दोनों आपराधिक मामलों की जानकारी स्पष्ट रूप से दी थी. परीक्षा में उसने 450 में से 234 अंक प्राप्त किए थे और सामान्य वर्ग की प्रतीक्षा सूची में सातवां स्थान हासिल किया था. इसके बावजूद पुराने आपराधिक मामलों का हवाला देते हुए उसकी नियुक्ति की सिफारिश नहीं की गई.

मामले के अनुसार, दोनों प्रकरण उस समय के हैं जब उम्मीदवार एलएलबी की पढ़ाई कर रहा था और विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रह रहा था. हॉस्टल में खराब भोजन को लेकर छात्रों द्वारा प्रदर्शन किया गया था. इसी दौरान हुई घटनाओं को लेकर उम्मीदवार के खिलाफ दोनों मामले दर्ज किए गए थे. बाद में दोनों प्रकरणों में समझौते के आधार पर उसे बरी कर दिया गया था. इसके बावजूद उच्च न्यायिक सेवा में नियुक्ति के लिए उसके चरित्र और पूर्व आपराधिक मामलों को आधार बनाकर उसकी उम्मीदवारी पर आपत्ति की गई.

हाईकोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए कहा कि किसी उम्मीदवार के छात्र जीवन में दर्ज पुराने मामलों का मूल्यांकन केवल उनके अस्तित्व के आधार पर नहीं किया जा सकता. ऐसे मामलों को दर्ज होने के समय उम्मीदवार की उम्र, परिस्थितियों और मामले की प्रकृति को ध्यान में रखकर देखा जाना आवश्यक है. कोर्ट ने यह भी माना कि वर्तमान मामले में दोनों प्रकरण नैतिक अधमता से संबंधित अपराध नहीं थे और उम्मीदवार उन मामलों में बाद में बरी हो चुका था.

अदालत ने उम्मीदवार के बाद के पेशेवर रिकॉर्ड को भी महत्वपूर्ण माना. कोर्ट के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि मामले दर्ज होने के बाद उम्मीदवार का पेशेवर आचरण साफ रहा. इसके अलावा पुलिस द्वारा किए गए चरित्र सत्यापन में भी उसे सरकारी सेवा के लिए उपयुक्त बताया गया था. ऐसे में केवल पुराने मामलों के आधार पर उसकी उम्मीदवारी को खारिज करना उचित नहीं माना गया.

हाईकोर्ट ने हालांकि उम्मीदवार को सीधे नियुक्ति देने का आदेश नहीं दिया. अदालत ने उम्मीदवारी खारिज करने वाले आदेश को निरस्त करते हुए सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि वह मामले के सभी प्रासंगिक तथ्यों और हाई कोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार की उम्मीदवारी पर नए सिरे से विचार करे. इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि न्यायिक सेवा जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए उम्मीदवार के पूर्व रिकॉर्ड का मूल्यांकन करते समय मामले की प्रकृति, घटना के समय की परिस्थितियों, बरी होने की स्थिति और बाद के आचरण को भी समग्र रूप से देखना आवश्यक है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-