जबलपुर. एमपी हाईकोर्ट ने दमोह नगर पालिका द्वारा शहरी क्षेत्र में स्लाटर हाउस पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देने वाली जनहित याचिका निरस्त कर दी. कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कहा कि इसी विषय से संबंधित याचिका पहले से हाई कोर्ट में लंबित है. ऐसे में अलग से नई याचिका दाखिल करने के बजाय लंबित प्रकरण में हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है.
याचिका दमोह के कसाई मंडी क्षेत्र में रहने वाले मोहम्मद मुर्सलीन कुरैशी, सद्दाम कुरैशी, आरिफ कुरैशी, गुलाम नासिर, अफरोज कुरैशी और इकबाल कुरैशी की ओर से दायर की गई थी. इसमें दमोह नगर पालिका द्वारा 29 अप्रैल 2026 को सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव को चुनौती दी गई थी. प्रस्ताव के तहत दमोह के शहरी क्षेत्र और धार्मिक स्थलों के आसपास स्लॉटर हाउस पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया था.
याचिका में नगर पालिका अध्यक्ष मंजू राय, उपाध्यक्ष सुषमा सिंह सहित करीब एक दर्जन पार्षदों को पक्षकार बनाया गया था. सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति उठाते हुए बताया कि इसी विषय से संबंधित एक मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित है. खास बात यह है कि लंबित याचिका भी वर्तमान याचिकाकर्ताओं की ओर से ही दायर की गई है.
नई याचिका पर सुनवाई से किया इनकार-
कोर्ट ने राज्य की दलील से सहमति जताते हुए नई याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को लंबित प्रकरण में हस्तक्षेप आवेदन दाखिल करने की स्वतंत्रता दी. इसी आधार पर जनहित याचिका खारिज कर दी गई.
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