साइबर ठगी के 11 मामले, जबलपुर में पीडि़तों से 9.5 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी

साइबर ठगी के 11 मामले, जबलपुर में पीडि़तों से 9.5 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी

प्रेषित समय :13:30:53 PM / Wed, Aug 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी के जबलपुर में साइबर अपराधियों ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में ठगी की 11 वारदातों को अंजाम देकर 9.5 लाख रुपए से अधिक की राशि हड़प ली. ठगों ने बुजुर्गों, महिलाओं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और व्यापारियों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाया. कहीं फर्जी बैंक अधिकारी बनकर ठगी की गई तो कहीं मोबाइल हैक कर खातों से रुपए निकाल लिए गए. शिकायतों के बाद पुलिस ने संबंधित थानों में मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

वरिष्ठ नागरिक कार्ड के नाम पर 60 हजार ठगे

गढ़ा थाना क्षेत्र में एलआईसी से सेवानिवृत्त एक बुजुर्ग को वरिष्ठ नागरिक बैंक कार्ड दिलाने का झांसा देकर ठगों ने 60 हजार रुपए ठग लिए. घमापुर में एक व्यापारी के क्रेडिट कार्ड से नौ बार में 3.72 लाख रुपए से अधिक की राशि निकाल ली गई. संजीवनी नगर में एक सेवानिवृत्त शिक्षक की पत्नी को साइबर ठगों ने फोन कर उनके किसी महिला को अनाथ बताकर दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़े जाने का डर दिखाया. कार्रवाई से बचाने के नाम पर उनसे 1.46 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए.

ऑटो अपडेट के नाम पर मोबाइल हैक

साइबर ठगों ने डिजिटल अपडेट और वर्क फ्रॉम होम के विज्ञापनों का भी इस्तेमाल किया. रांझी और संजीवनी नगर में दो लोगों के मोबाइल कथित तौर पर ऑटो-अपडेट के जरिए हैक कर लिए गए. इसके बाद उनके बैंक खातों से क्रमश: 38 हजार और 1.66 लाख रुपए निकाल लिए गए. हनुमानताल क्षेत्र में ओटीपी के जरिए ठगी की गई, जबकि अधारताल में वर्क फ्रॉम होम नौकरी का झांसा देकर एक युवक से 35 हजार रुपए ठग लिए गए. इसके अलावा बरेला, कोतवाली और संजीवनी नगर में भी क्रेडिट कार्ड और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर ठगी की घटनाएं सामने आई हैं.

मोबाइल नंबर और यूपीआई की जांच में जुटी पुलिस

जबलपुर में सामने आई इन 11 साइबर ठगी की घटनाओं में कुल 9.5 लाख रुपए से अधिक की राशि पीडि़तों के बैंक खातों से अवैध रूप से ट्रांसफर की गई है. शिकायतों के आधार पर संबंधित थानों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 319(2) के तहत धोखाधड़ी और प्रतिरूपण के मामले दर्ज किए गए हैं. पुलिस साइबर सेल की मदद से अज्ञात आरोपियों के मोबाइल नंबर, यूपीआई आईडी और बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है. पुलिस का कहना है कि इन माध्यमों से आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-