जबलपुर. एमपी के जबलपुर में वन विभाग की 3 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन पर लोगों ने अवैध रुप से कब्जे कर लिए. यहां पर लोगों ने बस्तियां बना ली, तो कहीं बड़े पैमाने पर खेती की जा रही है. इस मामले को लेकर जल्द ही वन विभाग कब्जों को हटवाने के लिए टास्क फोर्स की मदद लेगा.
खबर है कि जबलपुर के कुंडम, पनागर, शहपुरा, बरगी, मझौली और सिहोरा क्षेत्र में वनभूमि पर कब्जे मिले हैं. इनमें कई जगह खेती की जा रही है, जबकि कुछ स्थानों पर बस्तियां भी बस गई हैं. इससे जंगल के ईकोसिस्टम, जैव विविधता और वन्यजीवों पर असर पड़ रहा है. अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में करीब 500 से 600 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण मिला है. हालांकि, इनमें कुछ मामले ऐसे हो सकते हैं, जहां लोग वर्ष 2005 से पहले से काबिज हैं और वन अधिकार कानून के तहत पट्टे के पात्र हो सकते हैं.
कुछ मामले वर्ष 1980 की पात्र सूची से भी जुड़े हो सकते हैं. इसलिए हर मामले की अलग-अलग जांच की जा रही है. पात्र लोगों को अलग करने के बाद अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी. वन विभाग के रिकॉर्ड में कुछ जमीन वन के रूप में दर्ज है, लेकिन उसका कानूनी वर्गीकरण अभी स्पष्ट नहीं है. ऐसी जमीन को 'नारंगी जमीनÓ कहा जाता है. इस वजह से कई मामलों में सीधे कार्रवाई करना मुश्किल होता है. ऐसे मामलों को भी टास्क फोर्स के सामने रखा गया है, ताकि कानूनी स्थिति स्पष्ट कर आगे की कार्रवाई की जा सके. वन विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद अवैध कब्जों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक समय रहते कदम उठाना जरूरी है, ताकि वनभूमि पर अतिक्रमण का दायरा आगे न बढ़े.
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