अहमदाबाद में ‘बॉस स्कैम’ का बड़ा खुलासा, 26 राज्यों में 251 शिकायतें, पाकिस्तान-चीन तक जुड़े साइबर नेटवर्क के तार

अहमदाबाद में ‘बॉस स्कैम’ का बड़ा खुलासा, 26 राज्यों में 251 शिकायतें, पाकिस्तान-चीन तक जुड़े साइबर नेटवर्क के तार

प्रेषित समय :19:39:15 PM / Tue, Aug 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अहमदाबाद. साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई में अहमदाबाद पुलिस ने एक ऐसे बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा किया है, जो कथित तौर पर भारत में साइबर ठगी करने वाले अपराधियों के साथ-साथ पाकिस्तान और चीन से जुड़े साइबर अपराधियों को तकनीकी ढांचा उपलब्ध करा रहा था. पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क को ‘बॉस स्कैम’ से जोड़ते हुए पश्चिम बंगाल से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने हजारों मोबाइल फोन और लैपटॉप को अपने नेटवर्क से जोड़ रखा था और बड़ी संख्या में सिम कार्ड तथा वन टाइम पासवर्ड यानी OTP उपलब्ध कराकर साइबर अपराधियों की मदद की जा रही थी. पुलिस के अनुसार इस गिरोह के खिलाफ देश के 26 राज्यों में अब तक 251 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं.

अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त अनूपम सिंह गहलोत ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले की जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी पिछले चार से पांच वर्षों से इस गतिविधि में सक्रिय बताए जा रहे हैं. पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह स्वयं साइबर ठगी करने के साथ-साथ दूसरे साइबर अपराधियों के लिए एक तरह का तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा रहा था. पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान और चीन में बैठे साइबर अपराधियों को भी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे थे. मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े अन्य लोगों तथा भारत में मौजूद स्थानीय सहयोगियों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है.

पुलिस आयुक्त के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों का काम साइबर अपराधियों को आवश्यक सिम कार्ड उपलब्ध कराने से लेकर OTP की व्यवस्था करने तक फैला हुआ था. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने करीब 4,500 सिम कार्ड साइबर अपराधों के लिए जुटाए थे. छापे के दौरान पुलिस को ऐसे उपकरण भी मिले, जिनकी मदद से एक साथ चार सिम कार्ड संचालित किए जा सकते थे. पुलिस का कहना है कि इस तरह के उपकरणों का इस्तेमाल बड़ी संख्या में मोबाइल नंबरों को नियंत्रित करने और साइबर अपराधों के लिए आवश्यक संचार व्यवस्था तैयार करने में किया जा रहा था.

पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने अब तक करीब 21 हजार OTP साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए हैं. प्रत्येक OTP के बदले करीब 100 रुपये लिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है. पुलिस के अनुसार OTP उपलब्ध कराने का यह नेटवर्क साइबर ठगी के लिए बेहद महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रहा था. साइबर अपराधी जब किसी व्यक्ति को धोखाधड़ी वाले लिंक के माध्यम से अपने जाल में फंसाते थे, तब बैंकिंग अथवा अन्य डिजिटल लेनदेन से संबंधित प्रक्रिया को पूरा करने के लिए OTP की जरूरत पड़ती थी. गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर इसी जरूरत को पूरा करने का काम कर रहे थे.

जांच में गिरोह के काम करने के तरीके के बारे में भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं. पुलिस के अनुसार आरोपियों ने ऐसे सिम कार्ड उन लोगों को उपलब्ध कराए, जो दूसरे देशों में बैठकर साइबर अपराध संचालित कर रहे थे. इसके अलावा चीनी मैलवेयर के इस्तेमाल और इस्लामाबाद से संचालित किए जा रहे कॉल सेंटर से नेटवर्क जुड़े होने की जानकारी भी पुलिस ने दी है. पुलिस का कहना है कि जब किसी संभावित पीड़ित को कोई लिंक भेजा जाता था और वह उस लिंक पर क्लिक करता था, तो इसके बाद साइबर अपराधी अवैध रूप से धन हस्तांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते थे.

पुलिस आयुक्त ने बताया कि इस नेटवर्क से करीब 10 हजार डिवाइस जुड़े हुए थे. इनमें मोबाइल फोन और लैपटॉप शामिल हैं. पुलिस ने कार्रवाई के बाद इन डिवाइसों को निष्क्रिय करने की बात कही है. पुलिस के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में उपकरणों का एक ही नेटवर्क से जुड़ा होना इस बात का संकेत है कि साइबर अपराध के लिए व्यापक स्तर पर तकनीकी ढांचा तैयार किया गया था. अधिकारियों का मानना है कि इस इंफ्रास्ट्रक्चर को निष्क्रिय करना गिरोह की गतिविधियों पर बड़ा प्रहार है.

इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस जांच में देश के 26 राज्यों से संबंधित 251 शिकायतें सामने आई हैं. इससे संकेत मिलता है कि गिरोह का नेटवर्क किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं था. अलग-अलग राज्यों में रहने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए इस नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है. पुलिस अब इन शिकायतों को गिरफ्तार आरोपियों और उनके नेटवर्क से जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन मामलों में कितनी धनराशि का लेनदेन हुआ और कितने लोग सीधे या परोक्ष रूप से इस नेटवर्क से जुड़े थे.

पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपियों ने जांच एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए अपने संचार के तरीके में बदलाव किया था. शुरुआत में Telegram समूहों का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन बाद में आरोपियों ने WhatsApp समूहों के माध्यम से अपनी गतिविधियां संचालित करना शुरू कर दिया. पुलिस अब इन डिजिटल संचार माध्यमों से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कर रही है. जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि इन डिजिटल कड़ियों के जरिए विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों तथा भारत में उनके सहयोगियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी.

अहमदाबाद पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार दोनों आरोपियों के अलावा इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बड़ी संख्या में सिम कार्ड किस माध्यम से हासिल किए गए, उन्हें किन लोगों तक पहुंचाया गया और अलग-अलग राज्यों में हुई साइबर ठगी में उनका किस स्तर पर इस्तेमाल हुआ. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल और संभावित स्थानीय सहयोगियों की भूमिका की जांच जारी है.

पुलिस ने लोगों को साइबर अपराध से बचने के लिए भी सतर्क रहने की अपील की है. पुलिस आयुक्त अनूपम सिंह गहलोत ने कहा कि किसी भी फाइल को खोलने या लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी पूरी तरह जांच कर लेनी चाहिए. बिना सत्यापन के किसी लिंक को खोलना साइबर अपराधियों के लिए उपयोगकर्ता के मोबाइल या कंप्यूटर तक पहुंच बनाने का रास्ता बन सकता है. पुलिस के अनुसार ऐसे लिंक साइबर अपराधियों द्वारा अवैध धन हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रमुख माध्यमों में शामिल हैं.

अहमदाबाद पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सामने ला दिया है कि साइबर अपराध अब केवल फर्जी फोन कॉल या सामान्य ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं रह गया है. इसके पीछे सिम कार्ड, OTP, मैलवेयर, कॉल सेंटर, डिजिटल प्लेटफॉर्म और हजारों इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का संगठित नेटवर्क काम कर सकता है. ‘बॉस स्कैम’ मामले में सामने आया नेटवर्क इसी व्यापक और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप की ओर संकेत करता है. फिलहाल पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी तक पहुंचने का दावा किया है. अब जांच एजेंसियों के सामने इस नेटवर्क की पूरी संरचना, विदेशों से जुड़े संपर्कों और साइबर ठगी से जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचने की चुनौती है. मामले में आगे की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों को निशाना बनाया और इससे जुड़े साइबर अपराधों में कुल कितनी वित्तीय क्षति हुई.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-