नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज बल्लेबाजों सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली की तुलना एक बार फिर चर्चा में है. दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज एबी डिविलियर्स ने विदेशों में टेस्ट क्रिकेट के प्रदर्शन को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने क्रिकेट प्रशंसकों के बीच नई बहस छेड़ दी है. डिविलियर्स के मुताबिक, सचिन तेंदुलकर ने विदेशों की तेज और उछाल भरी परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों की सफलता का रास्ता दिखाया, लेकिन विराट कोहली ने उस विरासत को आगे बढ़ाते हुए मानक को और ऊंचा किया.
डिविलियर्स ने अपने यूट्यूब चैनल पर दोनों बल्लेबाजों की तुलना करते हुए कहा कि सचिन ऐसे पहले भारतीय बल्लेबाजों में थे, जिन्होंने यह भरोसा पैदा किया कि उपमहाद्वीप का बल्लेबाज भी उछाल और सीम वाली विदेशी परिस्थितियों में सफल हो सकता है. हालांकि, उनके आकलन में विराट कोहली विदेशों में इस मामले में सचिन से भी आगे रहे. उनके इस बयान ने दोनों युगों के महान बल्लेबाजों की उपलब्धियों को लेकर चल रही पुरानी बहस को फिर से तेज कर दिया है.
डिविलियर्स ने कहा कि सचिन तेंदुलकर ने भारत के लिए विदेशों में सफलता की जिस परंपरा की शुरुआत की, विराट कोहली ने उसे आगे बढ़ाया और उसका स्तर और ऊंचा किया. दक्षिण अफ्रीकी दिग्गज के मुताबिक, सचिन ने उपमहाद्वीप के बल्लेबाजों के लिए विदेशी परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करने का रास्ता खोला, जबकि कोहली ने उसी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी बल्लेबाजी से नई मिसाल कायम की.
डिविलियर्स की राय इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली दोनों के खिलाफ क्रिकेट खेला है. वह कोहली के साथ इंडियन प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए भी लंबे समय तक खेल चुके हैं. ऐसे में दोनों बल्लेबाजों की तकनीक, मानसिकता और विदेशी परिस्थितियों में उनके प्रदर्शन को करीब से देखने का उनका अनुभव इस तुलना को खास बनाता है.
सचिन तेंदुलकर का टेस्ट करियर 1989 से 2013 तक चला. उन्होंने 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन बनाए, जिसमें 51 शतक और 68 अर्धशतक शामिल हैं. उनका टेस्ट बल्लेबाजी औसत 53.78 रहा. दूसरी ओर, विराट कोहली ने 2011 में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा और मई 2025 में इस प्रारूप से संन्यास लिया. उन्होंने 123 टेस्ट मैचों में 9,230 रन बनाए, जिसमें 30 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैं. उनका टेस्ट औसत 46.85 रहा.
अगर केवल विदेशी टेस्ट आंकड़ों को देखा जाए तो सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड विराट कोहली से बेहतर दिखाई देता है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, तेंदुलकर ने विदेशी परिस्थितियों में 106 टेस्ट मैचों में 8,705 रन बनाए और उनका औसत 54.74 रहा. इस दौरान उन्होंने 29 शतक और 36 अर्धशतक लगाए. विराट कोहली ने विदेशी परिस्थितियों में 66 टेस्ट मैचों में 4,774 रन बनाए, जिसमें 16 शतक और 18 अर्धशतक शामिल हैं. उनका विदेशी टेस्ट औसत 41.51 रहा.
दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया यानी SENA देशों में भी आंकड़ों के लिहाज से सचिन तेंदुलकर आगे नजर आते हैं. इन देशों में तेंदुलकर ने 63 टेस्ट मैचों में 5,371 रन बनाए और उनका औसत 51.30 रहा. उन्होंने इस दौरान 17 शतक और 23 अर्धशतक लगाए. विराट कोहली ने SENA देशों में 46 टेस्ट मैचों में 3,661 रन बनाए. उनका औसत 42.08 रहा और उन्होंने 12 शतक तथा 14 अर्धशतक लगाए.
यानी आंकड़ों की सीधी तुलना करें तो विदेशी टेस्ट क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर स्पष्ट रूप से आगे दिखाई देते हैं. इसके बावजूद डिविलियर्स ने विराट कोहली को विदेशी परिस्थितियों में अधिक प्रभावशाली बल्लेबाज बताया है. यही वजह है कि उनके बयान ने क्रिकेट जगत में बहस को और दिलचस्प बना दिया है. यहां सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि दोनों बल्लेबाजों के अपने-अपने दौर, टीम की परिस्थितियों और विदेशी क्रिकेट में भारतीय बल्लेबाजी के बदलते स्वरूप का भी है.
सचिन के दौर में भारतीय टीम विदेशी मैदानों पर जीत के लिए संघर्ष करती थी और टीम का विदेशी क्रिकेट में प्रभाव आज की तुलना में काफी सीमित था. इसके बावजूद तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड जैसी परिस्थितियों में लगातार रन बनाए. उनके प्रदर्शन ने भारतीय बल्लेबाजों के लिए यह विश्वास पैदा किया कि विदेशी तेज गेंदबाजी आक्रमण के सामने भी भारतीय बल्लेबाज टिक सकते हैं और बड़ी पारियां खेल सकते हैं.
विराट कोहली के दौर में भारतीय टेस्ट टीम ने विदेशी परिस्थितियों में अपनी फिटनेस, तेज गेंदबाजी और आक्रामक क्रिकेट पर विशेष जोर दिया. कोहली खुद भी इस बदलाव के प्रमुख चेहरों में रहे. कप्तान के रूप में उन्होंने तेज गेंदबाजों को महत्व दिया और विदेशी दौरों पर प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने की मानसिकता को मजबूत किया. बल्लेबाज के रूप में भी उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी परिस्थितियों में कई महत्वपूर्ण पारियां खेलीं.
डिविलियर्स ने यह भी संकेत दिया कि कोहली की विदेशी सफलता ने अगली पीढ़ी के भारतीय बल्लेबाजों को प्रेरित किया. उनके अनुसार, केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल जैसे बल्लेबाज भी विदेशी परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे हैं और इसमें कोहली तथा तेंदुलकर की विरासत का प्रभाव दिखाई देता है.
विराट कोहली का टेस्ट करियर भले ही समाप्त हो चुका है, लेकिन विदेशी परिस्थितियों में उनके प्रदर्शन और कप्तानी का प्रभाव भारतीय टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा. वहीं, सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड अब भी टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े व्यक्तिगत आंकड़ों में शामिल है. इसलिए दोनों की तुलना किसी एक आंकड़े के आधार पर करना आसान नहीं है.
एबी डिविलियर्स के बयान का मूल संदेश भी शायद यही है कि सचिन और विराट को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने के बजाय भारतीय टेस्ट बल्लेबाजी के दो अलग-अलग युगों के रूप में देखा जाए. सचिन ने विदेशी परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों के लिए विश्वास और रास्ता तैयार किया, जबकि विराट ने उसी परंपरा को आक्रामकता, फिटनेस और लगातार विदेशी चुनौतियों के साथ आगे बढ़ाया. आंकड़ों में सचिन आगे हैं, लेकिन डिविलियर्स के आकलन में विदेशी परिस्थितियों में कोहली का प्रभाव और अनुकूलन क्षमता उन्हें अलग स्तर पर ले जाती है. यही अंतर अब सचिन बनाम विराट की बहस को एक बार फिर क्रिकेट प्रशंसकों के बीच गर्म कर रहा है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

