नई दिल्ली. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में जवानों के बीच आत्महत्या और आत्महानि की घटनाओं को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल ने वरिष्ठ अधिकारियों की 10 सदस्यीय कोर ग्रुप का गठन किया है, जो जवानों में आत्महानि की घटनाओं की विस्तृत समीक्षा करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी उपाय सुझाएगा. यह समूह सीआरपीएफ के महानिदेशक की अध्यक्षता में काम करेगा और हर महीने बैठक कर ऐसे मामलों की विस्तृत समीक्षा करेगा.
अधिकारियों के अनुसार, कोर ग्रुप प्रत्येक आत्महानि के मामले का वस्तुनिष्ठ तरीके से विश्लेषण करेगा. इसके आधार पर रोकथाम, कल्याण, प्रशासनिक और चिकित्सकीय स्तर पर आवश्यक उपायों की सिफारिश की जाएगी. समूह का उद्देश्य केवल घटनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि ऐसे मामलों के पीछे मौजूद सामान्य कारणों और बार-बार सामने आने वाले जोखिम कारकों की पहचान कर संस्थागत स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है.
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब करीब 3.25 लाख कर्मियों वाले सीआरपीएफ में वर्ष 2025 के दौरान आत्महत्या के 59 मामले सामने आए. उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक संख्या है. वर्ष 2024 में सीआरपीएफ में आत्महत्या के 46 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023 में 57, 2022 में 43 और 2021 में 57 जवानों ने आत्महत्या की थी. आंकड़ों ने बल के भीतर जवानों के मानसिक और सामाजिक कल्याण को लेकर चिंता बढ़ाई है.
अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2021 से 2025 के बीच सीआरपीएफ में आत्महत्या के कुल 262 मामले सामने आए. इनमें 202 मामले ऐसे थे, जब संबंधित जवान ड्यूटी पर तैनात थे. यानी कुल मामलों में 77 प्रतिशत से अधिक घटनाएं ड्यूटी के दौरान हुईं. बाकी मामले जवानों के अवकाश पर रहने के दौरान सामने आए. वर्ष 2025 में आत्महत्या करने वाले जवानों में कांस्टेबुलरी स्तर के कर्मियों की संख्या 80 प्रतिशत से अधिक रही.
नवगठित कोर ग्रुप प्रत्येक मामले के दौरान सामने आए तथ्यों का अध्ययन कर यह पता लगाएगा कि घटना से पहले किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था. अधिकारियों के अनुसार, समूह सामान्य प्रवृत्तियों और दोहराए जाने वाले जोखिम कारकों की पहचान करेगा. इसके बाद संबंधित स्तर पर आवश्यक संस्थागत हस्तक्षेप के निर्देश दिए जाएंगे. घटनाओं की रिपोर्टिंग करने वाले अधिकारी और पर्यवेक्षी अधिकारी भी अपने-अपने क्षेत्र में सामने आए मामलों का विश्लेषण कोर ग्रुप के समक्ष प्रस्तुत करेंगे.
अधिकारियों ने बताया कि कोर ग्रुप की नियमित बैठक हर महीने होगी. इसका नेतृत्व सीआरपीएफ के महानिदेशक करेंगे. बैठक में आत्महानि के मामलों की समीक्षा के साथ-साथ यह भी देखा जाएगा कि पहले दिए गए सुझावों और निवारक उपायों को किस स्तर तक लागू किया गया है. व्यवस्था का उद्देश्य समय रहते हस्तक्षेप, जवाबदेही और रोकथाम के उपायों को मजबूत करना है, ताकि ऐसी घटनाओं में कमी लाने के साथ उन्हें पूरी तरह रोकने की दिशा में काम किया जा सके.
सीआरपीएफ में आत्महत्या के मामलों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी संज्ञान ले चुका है. एनएचआरसी ने 14 अगस्त को मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव और सीआरपीएफ महानिदेशक को नोटिस जारी किया था. आयोग ने दोनों से इस विषय में विस्तृत रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है. इसके बाद सीआरपीएफ की ओर से गठित कोर ग्रुप को इस दिशा में महत्वपूर्ण संस्थागत कदम माना जा रहा है.
एक वरिष्ठ कमांडिंग अधिकारी के अनुसार, जवानों की लगातार तैनाती, परिवार से लंबे समय तक दूरी और काम तथा निजी जीवन के बीच संतुलन की कमी जैसी परिस्थितियां ऐसे मामलों के पीछे महत्वपूर्ण कारण हो सकती हैं. अधिकारियों का कहना है कि सीआरपीएफ के जवानों को लंबे समय तक कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ड्यूटी करनी पड़ती है. ऐसे में सेवा से जुड़ी कठिनाइयों के साथ पारिवारिक और व्यक्तिगत समस्याएं भी दबाव बढ़ा सकती हैं.
सीआरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, पहले किए गए आकलनों में यह भी सामने आया है कि आत्महत्या के कई मामलों में घरेलू या पारिवारिक समस्याएं प्रमुख कारण रही हैं. इसके साथ ही कठिन सेवा परिस्थितियां और लगातार ड्यूटी का दबाव भी स्थिति को प्रभावित कर सकता है. यही वजह है कि अब नए कोर ग्रुप के जरिए केवल घटना के बाद की कार्रवाई के बजाय जोखिम के शुरुआती संकेतों और सामान्य कारणों की पहचान पर जोर दिया जाएगा.
देश की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा एजेंसी के रूप में सीआरपीएफ की बड़ी संख्या में तैनाती आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने तथा कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियों में रहती है. अधिकारियों के अनुसार, किसी भी समय बल की करीब 95 से 97 प्रतिशत परिचालन क्षमता ड्यूटी पर तैनात रहती है. ऐसे में जवानों की मानसिक और शारीरिक सेहत बनाए रखना बल की कार्यक्षमता और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सीआरपीएफ ने पहले भी अपने कर्मियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं. अधिकारियों का कहना है कि जवानों के कल्याण से जुड़े उपाय लगातार जारी हैं. नए कोर ग्रुप के गठन के बाद इन प्रयासों को अधिक व्यवस्थित और संस्थागत रूप देने की कोशिश की जाएगी. समूह की मासिक बैठकों में सामने आने वाले मामलों के विश्लेषण के आधार पर रोकथाम के नए उपाय भी तैयार किए जा सकेंगे.
59 आत्महत्या मामलों के साथ वर्ष 2025 में सामने आए आंकड़ों ने सीआरपीएफ के सामने चुनौती को गंभीर बना दिया है. अब कोर ग्रुप के जरिए प्रत्येक घटना की समीक्षा, जोखिम कारकों की पहचान और समय रहते हस्तक्षेप की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर रहेगा. सीआरपीएफ का लक्ष्य ऐसी घटनाओं को केवल कम करना नहीं, बल्कि उन्हें पूरी तरह रोकने के लिए संस्थागत स्तर पर प्रभावी व्यवस्था तैयार करना है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

