बेंगलुरु. भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा बल्लेबाजों में शामिल वैभव सूर्यवंशी से दलीप ट्रॉफी में जिस बड़ी पारी की उम्मीद की जा रही थी, उसका आगाज निराशाजनक रहा. पूर्व क्षेत्र की ओर से उत्तर-पूर्व क्षेत्र के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उतरे 15 वर्षीय वैभव महज छह गेंदों पर आठ रन बनाकर पवेलियन लौट गए. हालांकि उनकी छोटी पारी में दो लगातार चौके जरूर देखने को मिले, लेकिन आक्रामक शुरुआत को वह बड़ी पारी में नहीं बदल सके.
बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में खेले जा रहे मुकाबले में उत्तर-पूर्व क्षेत्र ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया. पूर्व क्षेत्र की पारी की शुरुआत वैभव सूर्यवंशी और अभिमन्यु ईश्वरन ने की. वैभव से खास तौर पर निगाहें इसलिए जुड़ी थीं क्योंकि यह उनका दलीप ट्रॉफी पदार्पण था और लाल गेंद के क्रिकेट में उनकी क्षमता को परखने का यह महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा था.
वैभव ने शुरुआत में ही अपने आक्रामक अंदाज की झलक दिखा दी. उन्होंने तेज गेंदबाज बिश्वरजीत कोंथौजम की गेंदों पर लगातार दो चौके जड़कर संकेत दिया कि वह दबाव में रक्षात्मक क्रिकेट खेलने के बजाय अपने स्वाभाविक अंदाज में बल्लेबाजी करेंगे. लेकिन यह आक्रामक शुरुआत ज्यादा देर नहीं टिक सकी. उसी ओवर की अगली गेंद पर वैभव ने शॉट खेलने की कोशिश की और गेंद गली की दिशा में चली गई, जहां जोसेफ लालथनखुमा ने कैच लपक लिया.
छह गेंदों में आठ रन की यह पारी भले ही आंकड़ों के लिहाज से छोटी रही, लेकिन वैभव के लिए दलीप ट्रॉफी का यह मुकाबला केवल एक पारी से कहीं अधिक महत्व रखता है. उन्हें पूर्व क्षेत्र का उपकप्तान भी बनाया गया है. यानी टीम में उनकी भूमिका केवल युवा प्रतिभा के रूप में नहीं, बल्कि नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने वाले खिलाड़ी के तौर पर भी देखी जा रही है.
वैभव पिछले कुछ समय में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से लगातार सुर्खियां बटोरते रहे हैं. विशेष रूप से सीमित ओवरों के क्रिकेट में उन्होंने कम उम्र में जिस तरह का आत्मविश्वास दिखाया है, उसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के भविष्य के सितारों में शामिल कर दिया है. यही वजह है कि लाल गेंद के क्रिकेट में उनकी परीक्षा को लेकर भी क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों की उत्सुकता बनी हुई है.
दलीप ट्रॉफी का महत्व इस लिहाज से और बढ़ जाता है कि यहां बल्लेबाजों को लाल गेंद के लंबे प्रारूप की अलग चुनौती का सामना करना पड़ता है. गेंद की चमक, पिच का बदलता मिजाज, लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखना और आक्रामकता के साथ धैर्य का संतुलन—ये सभी चीजें सीमित ओवरों के मुकाबलों से अलग होती हैं. वैभव के लिए यह प्रतियोगिता इन्हीं पहलुओं को समझने और अपने खेल को निखारने का अवसर है.
हालांकि वैभव के जल्दी आउट होने के बाद पूर्व क्षेत्र की पारी को दूसरे बल्लेबाजों ने संभाल लिया. शुरुआती झटकों के बाद कुमार कुशाग्र ने 55 रन की उपयोगी पारी खेली, जबकि सुदीप घरामी ने शानदार 146 रन बनाकर पारी को मजबूती दी. शाहबाज अहमद ने भी शतक लगाकर टीम की स्थिति मजबूत की. दिन का खेल समाप्त होने तक पूर्व क्षेत्र ने 355 रन का मजबूत स्कोर खड़ा कर लिया था.
वैभव की आठ रन की पारी को उनके करियर के संदर्भ में किसी बड़े निष्कर्ष का आधार मानना जल्दबाजी होगी. 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले इस युवा बल्लेबाज के सामने अभी लंबा करियर है. दलीप ट्रॉफी में आगे मिलने वाले मौकों में उनकी सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह अपने स्वाभाविक आक्रामक खेल के साथ लाल गेंद की जरूरत के मुताबिक धैर्य और तकनीक का संतुलन कैसे बनाते हैं.
एक असफल शुरुआत निश्चित रूप से उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, लेकिन दलीप ट्रॉफी जैसे घरेलू प्रथम श्रेणी मंच पर ऐसे अनुभव ही युवा बल्लेबाज को लंबे प्रारूप की वास्तविक चुनौतियों से परिचित कराते हैं. वैभव के लिए अब निगाहें अगले मौके पर होंगी, जहां वह इस छोटी पारी को पीछे छोड़कर बड़ी पारी के साथ जवाब देना चाहेंगे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

