ग्वालियर की सड़कों की हाईकोर्ट निगरानी, 9 किलोमीटर में 11 सड़कों की फोटोग्राफी, आयोग करेगा रिपोर्ट पेश

ग्वालियर की सड़कों की हाईकोर्ट निगरानी, 9 किलोमीटर में 11 सड़कों की फोटोग्राफी, आयोग करेगा रिपोर्ट पेश

प्रेषित समय :18:54:38 PM / Mon, Aug 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर। शहर की जर्जर और धंसी हुई सड़कों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के निर्देश पर जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। हाईकोर्ट द्वारा गठित कमीशन ने लश्कर क्षेत्र में करीब नौ किलोमीटर का पैदल भ्रमण कर 11 प्रमुख सड़कों की स्थिति की फोटोग्राफी कराई। कमीशन अब इन तस्वीरों और मौके पर जुटाई गई जानकारी के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे हाईकोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके बाद सड़क की स्थिति और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की सैंपलिंग तथा जांच की दिशा तय होगी।

अधिवक्ता गौरव समाधिया की अध्यक्षता में गठित कमीशन के साथ नगर निगम, पुलिस, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे। अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश शुक्ला, याचिकाकर्ता अवधेश तोमर और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से आशीष सारस्वत भी कार्रवाई के दौरान मौजूद रहे। टीम ने करीब नौ किलोमीटर के क्षेत्र में पैदल घूमकर सड़कों की स्थिति देखी और अलग-अलग स्थानों की तस्वीरें जुटाईं।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रविवार की कार्रवाई की जानकारी संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाने से लगभग आधा घंटा पहले दी गई। सूचना मिलते ही विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद कमीशन ने पूरी टीम के साथ निर्धारित मार्गों का निरीक्षण शुरू किया। अधिवक्ताओं, पुलिस अधिकारियों और सरकारी विभागों के अधिकारियों को सड़क पर अचानक सक्रिय देखकर कई स्थानों पर स्थानीय लोग और कारोबारी भी हैरान नजर आए।

कमीशन ने महाराज बाड़ा, जनकगंज, नई सड़क, एबी रोड, लक्ष्मीगंज मंडी, ढोली बुआ का पुल, चावड़ी बाजार, सराफा बाजार, फालका बाजार, राम मंदिर रोड से दौलतगंज मार्ग सहित लश्कर क्षेत्र की अन्य सड़कों की तस्वीरें लीं। इन तस्वीरों के माध्यम से सड़क की सतह, गड्ढों, धंसाव, टूट-फूट और निर्माण की मौजूदा स्थिति को रिकॉर्ड किया गया है। कमीशन की रिपोर्ट में इन स्थानों की तस्वीरों के साथ सड़क की भौतिक स्थिति का विवरण भी शामिल किए जाने की संभावना है।

दरअसल, ग्वालियर शहर की खराब सड़कों को लेकर हाईकोर्ट ने पहले ही सख्त रुख अपनाया है। सड़क निर्माण की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल सामग्री की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अदालत ने मौके पर सैंपलिंग कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद हाईकोर्ट द्वारा गठित विशेष कमीशन और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने गुढ़ा-गुड़ी का नाका क्षेत्र में पहुंचकर सड़क की परतों की जांच शुरू की थी।

मौके पर सड़क की सतह को मशीन से खोदकर अलग-अलग स्तरों से नमूने लिए गए थे। अदालत के निर्देशों के पीछे उद्देश्य यह पता लगाना है कि सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों और स्वीकृत डिजाइन का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही यदि निर्माण में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी भी निर्धारित की जा सके।

गुढ़ा-गुड़ी का नाका क्षेत्र में की गई सैंपलिंग के दौरान सड़क की ऊपरी परत हटाने पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए थे। सड़क की संरचना को लेकर जो स्थिति मौके पर दिखाई दी, उसने निर्माण की तकनीक और गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए। एक ही सड़क के अलग-अलग हिस्सों में निर्माण की अलग-अलग संरचना सामने आने के बाद अब इसकी तुलना स्वीकृत तकनीकी दस्तावेजों और डिजाइन से की जानी है।

जांच के दौरान बेटी बचाओ तिराहे से गुढ़ा की ओर जाने वाली सड़क में ऊपरी परत हटाने पर डामर की तीन परतें एक के नीचे एक मिली थीं। इसके अलावा इसी मार्ग के समीप दूसरे हिस्से में डामर की परत हटाने पर उसके नीचे सीमेंट-कांक्रीट की सड़क मिली। एक ही मार्ग के अलग-अलग हिस्सों में अलग निर्माण तकनीक सामने आने से यह सवाल उठा कि क्या सड़क का निर्माण स्वीकृत डिजाइन के अनुसार किया गया था।

कमीशन अब मौके पर मिली सड़क की वास्तविक संरचना और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज निर्माण तकनीक का मिलान करेगा। इसके लिए स्वीकृत डिजाइन, तकनीकी दस्तावेज, निर्माण संबंधी रिकॉर्ड और मौके पर लिए गए नमूनों की जांच को आधार बनाया जाएगा। यदि इन दोनों में अंतर मिलता है तो निर्माण प्रक्रिया की जिम्मेदारी तय करने में यह तथ्य महत्वपूर्ण हो सकता है।

अब तक की सैंपलिंग में लिए गए छह नमूने जांच के लिए लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की प्रयोगशालाओं में भेजे जा चुके हैं। दो अन्य नमूनों को फील्ड टेस्ट के बाद प्रयोगशाला जांच के लिए तैयार किया गया है। इन नमूनों की जांच निर्धारित तकनीकी मानकों के आधार पर की जाएगी। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने में कितना समय लगेगा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

सड़क की सैंपलिंग के दौरान केवल ऊपर की परत ही नहीं, बल्कि नीचे की संरचना और मिट्टी की स्थिति को भी जांच के दायरे में रखा गया है। जेसीबी की मदद से सड़क की अलग-अलग परतें खोली गईं और नीचे की मिट्टी के नमूने भी सुरक्षित किए गए। इसका उद्देश्य सड़क की मजबूती और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता का तकनीकी परीक्षण करना है।

रविवार को हुई फोटोग्राफी की कार्रवाई इसी जांच प्रक्रिया का अगला चरण मानी जा रही है। हाईकोर्ट ने केवल उन स्थानों तक जांच सीमित नहीं रखने के निर्देश दिए हैं जहां से नमूने लिए गए हैं, बल्कि शहर की अन्य सड़कों की स्थिति का भी रिकॉर्ड तैयार करने को कहा है। इसी क्रम में लश्कर क्षेत्र की प्रमुख सड़कों का निरीक्षण किया गया।

कमीशन द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट में सड़क की मौजूदा स्थिति और फोटोग्राफिक साक्ष्य शामिल किए जाएंगे। रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश होने के बाद अदालत यह तय कर सकती है कि किन सड़कों पर आगे तकनीकी सैंपलिंग की जरूरत है और किन स्थानों की निर्माण गुणवत्ता को लेकर विस्तृत जांच आवश्यक है।

इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य केवल सड़क की खराब स्थिति दर्ज करना नहीं, बल्कि उसके पीछे के कारणों की तकनीकी पड़ताल करना भी है। सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, निर्माण की परतें, स्वीकृत डिजाइन और मौके की वास्तविक स्थिति के बीच यदि कोई अंतर मिलता है तो वह जांच का महत्वपूर्ण आधार बनेगा। इसी के आधार पर संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों से जवाब मांगा जा सकता है।

मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित है। उससे पहले कमीशन की ओर से अब तक की कार्रवाई और उपलब्ध फोटोग्राफिक रिकॉर्ड को व्यवस्थित किया जाएगा। ग्वालियर की सड़कों को लेकर हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही इस प्रक्रिया से अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जमीनी स्थिति न्यायालय के सामने सीधे दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में रखने की तैयारी है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-