जबलपुर समेत पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का जोर, 5 सितंबर तक सक्रिय रहेगा मानसून, भारी वर्षा का अलर्ट

जबलपुर समेत पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का जोर, 5 सितंबर तक सक्रिय रहेगा मानसून, भारी वर्षा का अलर्ट

प्रेषित समय :20:19:00 PM / Wed, Sep 2nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता ने एक बार फिर पूर्वी हिस्से को अपने घेरे में ले लिया है. जबलपुर को केंद्र में देखें तो अगले तीन दिन मौसम की गतिविधियां खास तौर पर महत्वपूर्ण रहने वाली हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग के जबलपुर केंद्र ने 2 और 3 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी दी है. 4 और 5 सितंबर को भी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है. ऐसे में जबलपुर के साथ मंडला, डिंडौरी, सिवनी, नरसिंहपुर, कटनी, उमरिया और आसपास के जिलों में नदी-नालों के जलस्तर तथा निचले इलाकों पर नजर रखना जरूरी होगा.

जबलपुर में 2 सितंबर को सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटे में 10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. इस दौरान न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस रहा. मौसम विभाग ने बुधवार और गुरुवार को सामान्यतः बादल छाए रहने के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है. 4 सितंबर को बारिश के साथ गरज-चमक और आंधी की संभावना है, जबकि 5 सितंबर को भी गरज-चमक के साथ मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है.

जबलपुर के आसपास के इलाकों में बारिश का असर एक जैसा नहीं है. स्थानीय स्तर पर वर्षा में काफी अंतर दिखाई दे सकता है. इसलिए जिले के किसी एक मौसम केंद्र का आंकड़ा पूरे जिले की स्थिति को नहीं दर्शाता. ग्रामीण और नदी किनारे के क्षेत्रों में अचानक तेज बारिश होने पर जलभराव और छोटे नदी-नालों में उफान की स्थिति बन सकती है. विशेष रूप से बरगी और नर्मदा से जुड़े इलाकों में प्रशासन तथा स्थानीय लोगों के लिए जलस्तर पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा.

पूर्वी मध्य प्रदेश में इस समय बारिश की तस्वीर जबलपुर से आगे रीवा-सतना क्षेत्र तक गंभीर बनी हुई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2 सितंबर को रीवा में पिछले 24 घंटे में 14 मिलीमीटर और सतना में 49 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई. सतना में न्यूनतम तापमान 24 डिग्री और अधिकतम 26 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि मौसम विभाग ने वहां भी 2 और 3 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी दी है.

यही वजह है कि इस बार मौसम का प्रभाव केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं माना जा रहा. पूर्वी मध्य प्रदेश में रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, कटनी, पन्ना और आसपास के जिलों में बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं. सतना और चित्रकूट क्षेत्र में पहले से जलभराव और बाढ़ जैसे हालात सामने आने के कारण प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है. मंदाकिनी नदी के उफान के कारण चित्रकूट के रामघाट क्षेत्र में दुकानों और होटलों के डूबने की रिपोर्ट भी सामने आई है.

मौसम विभाग की ताजा चेतावनी के अनुसार अगले 24 घंटे में जबलपुर सहित अनूपपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, मंडला, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, सिवनी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया और विदिशा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली और तेज हवाओं की संभावना है. इसका अर्थ यह है कि जबलपुर संभाग के साथ प्रदेश के मध्य और पूर्वी हिस्से में मौसम की सक्रियता बनी रहेगी.

प्रदेश की व्यापक स्थिति देखें तो 1 सितंबर तक मध्य प्रदेश में इस मानसूनी मौसम में करीब 27.7 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी थी, जबकि सामान्य औसत करीब 37.3 इंच है. यानी प्रदेश अभी भी सामान्य मौसमी वर्षा के आंकड़े से पीछे था और सितंबर में लगभग 9.6 इंच बारिश होने पर सामान्य स्तर पूरा होने का अनुमान बताया गया था.

हालांकि लगातार हो रही बारिश ने प्रदेश के जलाशयों की स्थिति में बड़ा बदलाव किया है. कई बांधों में जलभराव बढ़ा है और कुछ स्थानों पर जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए गेट खोलने की स्थिति बनी है. भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर भी फुल टैंक लेवल के करीब पहुंचने की जानकारी सामने आई है. इसका असर आगे भदभदा और कलियासोत क्षेत्र में जल प्रवाह पर पड़ सकता है.

जबलपुर के लिए आने वाले 48 से 72 घंटे इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि मौसम विभाग ने लगातार भारी बारिश का पूर्वानुमान दिया है. बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए खुले क्षेत्रों, पेड़ों के नीचे और नदी-नालों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचना बेहतर होगा. प्रशासन के लिए भी निचले इलाकों, पुल-पुलियों और जलभराव वाले मार्गों पर निगरानी बढ़ाना जरूरी होगा.

फिलहाल मौसम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि जबलपुर में बारिश थमने की स्थिति नहीं बनी है. 2 और 3 सितंबर को भारी बारिश का दौर जारी रहने के बाद 4 और 5 सितंबर को भी मौसम सक्रिय रह सकता है. पूर्वी मध्य प्रदेश में पहले से बने बाढ़ और जलभराव के हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में केवल बारिश की मात्रा ही नहीं, बल्कि बारिश के बाद नदियों और जलाशयों के जलस्तर पर भी नजर रखनी होगी. 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-