इंदौर में नशीली दवाओं की बिक्री पर सख्ती, डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेंगी चिन्हित दवाएं

इंदौर में नशीली दवाओं की बिक्री पर सख्ती, डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेंगी चिन्हित दवाएं

प्रेषित समय :19:57:17 PM / Wed, Sep 2nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

इंदौर.प्रतिबंधित और नशे के लिए दुरुपयोग की जाने वाली दवाओं की अनधिकृत बिक्री पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है. पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने नगर सीमा में चिन्हित दवाओं की बिक्री को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है. इसके तहत निर्धारित दवाएं अब केवल पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी के लिखित पर्चे पर ही मेडिकल स्टोर से दी जा सकेंगी. प्रशासन का उद्देश्य ऐसी दवाओं के अनियंत्रित इस्तेमाल और उनके नशे के रूप में होने वाले दुरुपयोग को रोकना है.

आदेश के दायरे में कई ऐसी दवाएं शामिल की गई हैं, जिनका चिकित्सकीय उपयोग होने के बावजूद इनके गलत इस्तेमाल की आशंका रहती है. इनमें नाइट्राजेपाम की गोलियां, नाइट्रावेट, क्लोनाजेपाम, डायजेपाम, ऑक्साजेपाम, एटिजोलाम, अल्प्राजोलम, कोडीन फॉस्फेट युक्त सिरप या गोलियां तथा क्लोजापाम श्रेणी की दवाएं शामिल हैं. इन दवाओं को अब बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के बेचने पर मेडिकल स्टोर संचालक कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं.

नई व्यवस्था में केवल डॉक्टर की पर्ची देख लेना ही पर्याप्त नहीं होगा. आदेश के अनुसार मेडिकल स्टोर संचालक को लिखित प्रिस्क्रिप्शन की छायाप्रति सुरक्षित रखनी होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर बिक्री का रिकॉर्ड जांचा जा सके. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि संबंधित दवा किस चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर दी गई थी और दवा की बिक्री निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हुई या नहीं.

इसी तरह गर्भपात और गर्भ समापन से संबंधित दवाओं तथा उनके समूह की दवाओं, जिनमें गोली, इंजेक्शन और जेल आदि शामिल हैं, की बिक्री भी पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी के लिखित पर्चे के आधार पर ही की जाएगी. संबंधित मेडिकल स्टोर को इन दवाओं की बिक्री से जुड़े प्रिस्क्रिप्शन का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा. इस व्यवस्था के पीछे उद्देश्य दवाओं के अनधिकृत इस्तेमाल पर निगरानी मजबूत करना है.

आदेश के प्रभावी पालन की जिम्मेदारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम को दी गई है. विभाग की टीमें मेडिकल स्टोर का नियमित निरीक्षण करने के साथ ही जरूरत पड़ने पर आकस्मिक जांच भी कर सकेंगी. निरीक्षण के दौरान दुकान संचालक को दवाओं की बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड जांच दल के सामने प्रस्तुत करना होगा. टीम रिकॉर्ड का सत्यापन करेगी और किसी प्रकार की अनियमितता मिलने पर इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी.

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जांच में गंभीर अनियमितता सामने आने पर प्रकरण दर्ज कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है. प्रतिबंधात्मक आदेश 24 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा.

इस फैसले का सीधा असर मेडिकल स्टोर संचालकों की बिक्री प्रक्रिया पर पड़ेगा. उन्हें अब चिन्हित दवाओं की बिक्री करते समय पर्चे और संबंधित रिकॉर्ड को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी. वहीं आम लोगों के लिए इसका मतलब यह होगा कि चिकित्सकीय आवश्यकता वाली इन दवाओं को बिना डॉक्टर की सलाह और लिखित पर्चे के खरीदना आसान नहीं रहेगा. प्रशासन की चुनौती अब यह सुनिश्चित करने की होगी कि आदेश केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि मेडिकल स्टोरों की नियमित निगरानी के जरिए जमीन पर भी प्रभावी रूप से लागू हो.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-