21 करोड़ की साइबर ठगी में फर्जी कंपनी का खेल खुला, कानपुर से तीन आरोपी गिरफ्तार, खाते में पहुंचे थे करीब 25 लाख

21 करोड़ की साइबर ठगी में फर्जी कंपनी का खेल खुला, कानपुर से तीन आरोपी गिरफ्तार, खाते में पहुंचे थे करीब 25 लाख

प्रेषित समय :21:58:35 PM / Thu, Sep 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. चार्टर्ड अकाउंटेंट से 21.05 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, ठगों द्वारा रकम को अलग-अलग खातों तक पहुंचाने का नेटवर्क सामने आता जा रहा है. राज्य साइबर पुलिस ने मामले में कानपुर और आसपास के क्षेत्र से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने एक फर्जी कंपनी के नाम पर चालू बैंक खाता खुलवाया था और इसी खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम की पहली परत के रूप में किया जा रहा था. इस खाते में करीब 25 लाख रुपये पहुंचने के बाद रकम को आगे दूसरे खातों में भेजा गया.

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों की पहचान आलोक पुत्र सुरेंद्र गुप्ता, सौरभ पुत्र स्वर्गीय सुनील सोनकर और रंजीत पुत्र रामबाबू के रूप में हुई है. आलोक और सौरभ कानपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं, जबकि रंजीत उन्नाव का निवासी बताया गया है. तीनों को कानपुर से गिरफ्तार कर ग्वालियर लाया गया है. अब उनसे पूछताछ के साथ उनके बैंक खातों, लेनदेन और कंपनी से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है.

जांच में जिस कंपनी का नाम सामने आया है, उसके नाम पर बैंक में चालू खाता खोला गया था. पुलिस को संदेह है कि कंपनी का वास्तविक कारोबार करने के बजाय खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे स्थानांतरित करने के लिए किया गया. खाते की जांच के दौरान पुलिस को एक और महत्वपूर्ण जानकारी मिली. इसमें देश के सात राज्यों के अलग-अलग शहरों से कुल करीब 1.37 करोड़ रुपये आने का रिकॉर्ड मिला है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन सभी लेनदेन का संबंध साइबर अपराधों से किस तरह जुड़ा हुआ है.

मामले की शुरुआत ग्वालियर निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से हुई 21.05 करोड़ रुपये की ठगी से हुई थी. पुलिस के मुताबिक उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन आया था. फोन करने वाली महिला ने अपना नाम दिव्या बताया और बातचीत के बाद ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश का भरोसा दिलाया. इसके बाद क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में रकम भेजने के लिए तैयार किया गया.

करीब सात महीने तक यह सिलसिला चलता रहा. पीड़ित को ऑनलाइन माध्यम पर निवेश की राशि लगातार बढ़ती हुई दिखाई जाती रही, जिससे उन्हें अपने निवेश पर लाभ होने का भरोसा बना रहा. जब उन्होंने रकम वापस निकालने की कोशिश की तो वास्तविक स्थिति सामने आई और उन्हें ठगी का पता चला. इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

राज्य साइबर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लेनदेन की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया. जांच में जिन खातों में ठगी की रकम पहुंची, उनकी जानकारी के आधार पर अलग-अलग राज्यों तक पुलिस की जांच पहुंची. इसी क्रम में फर्जी कंपनी के खाते की जानकारी सामने आई और उसके संचालन से जुड़े लोगों तक पुलिस पहुंची.

इस मामले में पुलिस अब तक छह आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है. इससे पहले शाजापुर के जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार मालवीय सहित तीन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस के अनुसार मालवीय से जुड़े खाते में भी ठगी की रकम पहुंची थी. अब कानपुर से हुई तीन गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है.

पुलिस का मुख्य फोकस अब इस बात पर है कि फर्जी कंपनी के खाते में पहुंची रकम किस-किस खाते में भेजी गई और इस पूरी व्यवस्था में कितने लोग शामिल थे. सात राज्यों से आए 1.37 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी मिलने के बाद अन्य साइबर अपराधों से भी इन खातों का संबंध तलाशा जा रहा है.

राज्य साइबर पुलिस के डीएसपी संजीव नयन शर्मा के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों ने फर्जी कंपनी के नाम से खाता खुलवाया था और उसमें ठगी की रकम की पहली परत पहुंची थी. पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर साइबर ठगी की रकम के पूरे प्रवाह और इसमें शामिल अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-