भिक्षावृत्ति पर फिर सख्ती, रुपये देना और सामान खरीदना भी प्रतिबंधित, सूचना देने वाले को मिलेंगे 1000 रुपये

भिक्षावृत्ति पर फिर सख्ती, रुपये देना और सामान खरीदना भी प्रतिबंधित, सूचना देने वाले को मिलेंगे 1000 रुपये

प्रेषित समय :21:55:45 PM / Thu, Sep 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

इंदौर. शहर को भिक्षावृत्ति से मुक्त करने की पहले से चल रही कवायद को आगे बढ़ाते हुए प्रशासन ने अब आम नागरिकों की भूमिका भी तय कर दी है. कलेक्टर के प्रतिबंधात्मक आदेश के तहत शहर में भिक्षावृत्ति करने वाले लोगों को रुपये या किसी भी तरह की वस्तु देने पर रोक रहेगी. इतना ही नहीं, ट्रैफिक सिग्नल, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर उनसे कोई सामान खरीदना भी प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है. आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

प्रशासन की इस व्यवस्था में केवल भिक्षा देने वाले व्यक्ति ही निगरानी के दायरे में नहीं हैं, बल्कि उन गतिविधियों पर भी रोक लगाने का प्रयास किया गया है, जिनसे सार्वजनिक स्थानों पर भिक्षावृत्ति को प्रोत्साहन मिलता है. अक्सर चौराहों और यातायात संकेतों पर लोग भिक्षावृत्ति करते दिखाई देते हैं. कई बार लोग उन्हें रुपये देने के साथ सामान भी खरीदते हैं. प्रशासन का ताजा आदेश इसी तरह की गतिविधियों को रोकने पर केंद्रित है.

इंदौर में इससे पहले भी भिक्षावृत्ति रोकने के लिए इस प्रकार की व्यवस्था लागू की गई थी. अब इसे फिर प्रभावी किया गया है. प्रशासन का जोर आदेश को केवल कागज तक सीमित रखने के बजाय शहर में इसकी जानकारी पहुंचाने और नागरिकों को नियमों के प्रति जागरूक करने पर रहेगा. इसके लिए लोगों से अपील की जा रही है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर भिक्षावृत्ति की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाएं.

इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सूचना देने वालों के लिए घोषित प्रोत्साहन राशि है. शहर में यदि कहीं कोई व्यक्ति भिक्षावृत्ति करता पाया जाता है तो इसकी सूचना महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी दिनेश मिश्रा को दी जा सकती है. इसके लिए मोबाइल नंबर 9691494951 जारी किया गया है. प्रशासन के अनुसार सूचना का सत्यापन कराया जाएगा और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो सूचना देने वाले व्यक्ति को एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.

इस प्रावधान के जरिए प्रशासन नागरिकों को निगरानी व्यवस्था से जोड़ना चाहता है. आमतौर पर सार्वजनिक स्थानों पर भिक्षावृत्ति की गतिविधियां प्रशासनिक अमले की नियमित नजर से बच जाती हैं. ऐसे में नागरिकों से मिलने वाली सूचनाएं कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं. हालांकि सूचना देने के बाद उसका सत्यापन किया जाएगा, यानी केवल शिकायत के आधार पर प्रोत्साहन राशि नहीं दी जाएगी.

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भिक्षावृत्ति करने वाले व्यक्ति को किसी तरह की वस्तु या राशि देना प्रतिबंधित रहेगा. इसी तरह चौराहों और ट्रैफिक सिग्नल पर उनसे सामान खरीदना भी नियम के दायरे में आएगा. प्रशासन का मानना है कि भिक्षावृत्ति को मिलने वाला प्रत्यक्ष आर्थिक समर्थन बंद होने से सार्वजनिक स्थानों पर इस गतिविधि को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.

हालांकि इस व्यवस्था का प्रभाव केवल प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि नागरिकों के व्यवहार से भी जुड़ा हुआ है. शहर में बड़ी संख्या में लोग धार्मिक, सामाजिक या मानवीय भावना के कारण जरूरतमंदों को सीधे रुपये या वस्तुएं देते हैं. नए आदेश के बाद ऐसे लोगों को भी यह समझना होगा कि सहायता का तरीका प्रशासन द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए.

अब प्रशासन के सामने चुनौती आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन की होगी. शहर के प्रमुख चौराहों, यातायात संकेतों और सार्वजनिक स्थानों पर भिक्षावृत्ति की गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी होगा. साथ ही प्राप्त सूचनाओं का समय पर सत्यापन और कार्रवाई भी व्यवस्था की विश्वसनीयता तय करेगी. फिलहाल प्रशासन ने प्रतिबंध के साथ नागरिकों को सूचना देने का माध्यम और प्रोत्साहन राशि दोनों उपलब्ध करा दिए हैं. इससे साफ है कि इंदौर में भिक्षावृत्ति रोकने की मुहिम में अब प्रशासनिक निगरानी के साथ आम लोगों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-