लीज बकाया पर 28 भूखंड धारकों को आखिरी मौका, 1.14 करोड़ की वसूली के लिए निगम ने तेज की प्रक्रिया

लीज बकाया पर 28 भूखंड धारकों को आखिरी मौका, 1.14 करोड़ की वसूली के लिए निगम ने तेज की प्रक्रिया

प्रेषित समय :21:53:41 PM / Thu, Sep 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. नगर निगम की जमीनों से जुड़े पुराने बकायों की फाइलें अब दोबारा खुलने लगी हैं. लंबे समय से लीज नवीनीकरण की मांग शुल्क राशि जमा नहीं करने वाले 28 बड़े बकायादारों को नगर निगम ने अंतिम नोटिस जारी कर दिया है. इन प्रकरणों में निगम का कुल 1 करोड़ 14 लाख 89 हजार 916 रुपये राजस्व अटका हुआ है. अब संबंधित भूखंडधारकों को निर्धारित समय में बकाया राशि और प्रक्रिया से जुड़े दायित्व पूरे करने का अवसर दिया गया है. इसके बाद निगम लीज निरस्तीकरण और संपत्ति पर पुनः आधिपत्य की वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा.

निगम प्रशासन की इस कवायद को केवल बकाया राशि की वसूली के रूप में नहीं देखा जा रहा है. लंबे समय से लीज संबंधी दायित्व पूरे नहीं करने वाली संपत्तियों का रिकॉर्ड दुरुस्त करने और निगम की जमीनों पर उसके अधिकार को स्पष्ट करने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. कई मामलों में लीज की अवधि, नवीनीकरण और उससे जुड़ी राशि का मामला वर्षों तक लंबित रहने से संपत्ति प्रबंधन की स्थिति जटिल हो जाती है. ऐसे प्रकरणों को अब निगम प्रशासन क्रमबद्ध तरीके से निपटाने की तैयारी में है.

निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी प्रकरणों में दस्तावेजों और राजस्व विवरण का परीक्षण करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए. अंतिम नोटिस जारी करने के साथ बकायादारों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया है. यानी कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों के दस्तावेज और आपत्तियां भी रिकॉर्ड में ली जाएंगी. इसके बाद उपलब्ध तथ्यों और नियमों के आधार पर आगे का निर्णय होगा.

निगम प्रशासन के अनुसार निर्धारित अवधि में बकाया राशि जमा नहीं करने और लीज नवीनीकरण की आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं करने की स्थिति में संबंधित अनुबंध को नियमानुसार निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद निगम संपत्ति पर पुनः प्रवेश और आधिपत्य की प्रक्रिया अपना सकता है. जरूरत पड़ने पर संबंधित संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने के लिए निगम का अमला भी मौके पर कार्रवाई करेगा.

इस पूरी प्रक्रिया का वित्तीय पक्ष भी महत्वपूर्ण है. 28 प्रकरणों में फंसी करीब 1.15 करोड़ रुपये की राशि नगर निगम के लिए उल्लेखनीय राजस्व है. लंबे समय से अटकी इस राशि की वसूली होने पर निगम के नियमित राजस्व संसाधनों को मजबूती मिलेगी. हालांकि प्रशासन का उद्देश्य केवल राशि जमा कराना नहीं, बल्कि लीज संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड और दायित्वों को व्यवस्थित करना भी बताया गया है.

नगर निगम के सामने शहर में अपनी संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन की चुनौती लगातार बनी रहती है. लीज पर दी गई संपत्तियों में समय पर शुल्क जमा होना, नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी होना और निर्धारित शर्तों का पालन होना संपत्ति प्रबंधन का अहम हिस्सा है. ऐसे में डिफाल्टर प्रकरणों पर कार्रवाई से उन अन्य लीज धारकों को भी स्पष्ट संदेश जाएगा, जिनके मामले में भुगतान या नवीनीकरण लंबित है.

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि अंतिम नोटिस के बाद कितने भूखंड धारक बकाया राशि जमा कर लीज संबंधी औपचारिकताएं पूरी करते हैं और कितने मामलों में निगम को निरस्तीकरण तथा पुनः आधिपत्य की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है. फिलहाल निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्षों से लंबित लीज प्रकरणों को अनिश्चितकाल तक टालने के बजाय उन्हें नियमानुसार अंतिम स्थिति तक पहुंचाया जाएगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-