शासकीय जमीन पर अवैध पट्टे की कोशिश से निगम में हड़कंप, कर्मचारी को नोटिस जिला प्रशासन से पट्टा निरस्त करने की सिफारिश

शासकीय जमीन पर अवैध पट्टे की कोशिश से निगम में हड़कंप, कर्मचारी को नोटिस जिला प्रशासन से पट्टा निरस्त करने की सिफारिश

प्रेषित समय :21:49:56 PM / Thu, Sep 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. नगर निगम की संपत्ति से जुड़े एक मामले ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और शासकीय भूमि की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कछपुरा क्षेत्र में निगम के स्वामित्व वाली भूमि पर पूर्व चुंगी नाका भवन से जुड़े मामले में अनियमितता सामने आने के बाद निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने सख्त रुख अपनाया है. मामले में कर संग्रहिता राजेश डेनियल को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में तथ्यात्मक जवाब मांगा गया है. साथ ही निगम प्रशासन ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल किए गए 30 वर्षीय पट्टे और उससे संबंधित राजस्व रिकॉर्ड की प्रविष्टियों को निरस्त करने की अनुशंसा की है.

मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि जिस संपत्ति को लेकर विवाद सामने आया है, वह कछपुरा स्थित अराजी नंबर 714/1/1 से संबंधित है. यहां पूर्व में चुंगी नाका भवन संचालित होता था और निगम के अनुसार उक्त भवन निगम के स्वामित्व और उपयोग में रहा है. प्रशासन को जब संपत्ति की स्थिति और पट्टा संबंधी प्रक्रिया में अनियमितता की जानकारी मिली तो मौके का सत्यापन कराया गया. इसके बाद निगम ने संबंधित कर्मचारी से पूरे मामले में उसका पक्ष और उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है.

निगम प्रशासन के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि निगम के स्वामित्व वाली संपत्ति से संबंधित भूमि पर पट्टा किस आधार पर हासिल किया गया और इसके लिए प्रस्तुत दस्तावेजों तथा भूमि के वास्तविक स्वामित्व की स्थिति का परीक्षण किस स्तर पर हुआ. इसी बिंदु को लेकर अब राजस्व रिकॉर्ड और पट्टा संबंधी दस्तावेजों की जांच की दिशा में कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है. निगम का कहना है कि शासकीय संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े तथ्यों को नजरअंदाज कर किसी व्यक्ति को अनधिकृत लाभ नहीं दिया जा सकता.

मामले में भवन को जेसीबी से गिराने और उसके स्थान पर नियमों के विपरीत निर्माण की कोशिश का भी उल्लेख किया गया है. निगम प्रशासन ने मौके की स्थिति का परीक्षण कराने के साथ संबंधित शाखाओं को भी सतर्क कर दिया है. संपदा, राजस्व और भवन शाखा को निर्देशित किया गया है कि विवादित संपत्ति से संबंधित किसी भी प्रकार की अनापत्ति, भवन निर्माण अनुमति या नक्शे की स्वीकृति बिना तथ्यों की पूरी जांच के नहीं दी जाए. पुलिस प्रशासन को भी मामले से अवगत कराया गया है.

निगमायुक्त ने जिला प्रशासन को भेजे पत्र में गलत तरीके से निष्पादित बताए जा रहे धारणाधिकार दस्तावेज और संबंधित आदेश को निरस्त करने तथा राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज प्रविष्टि को हटाने की कार्रवाई की अनुशंसा की है. इसके पीछे निगम प्रशासन का तर्क है कि यदि किसी शासकीय या निगम स्वामित्व वाली भूमि पर स्वामित्व संबंधी तथ्य छिपाकर अधिकार हासिल किया गया है तो ऐसी प्रक्रिया को वैधानिक जांच के दायरे में लाना आवश्यक है.

हालांकि निगम ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है. कारण बताओ नोटिस के जरिए उससे दस्तावेजों सहित जवाब मांगा गया है. उसके जवाब और मौके पर उपलब्ध तथ्यों के परीक्षण के बाद आगे की विभागीय प्रक्रिया तय होगी. इससे स्पष्ट है कि निगम प्रशासन मामले में कार्रवाई तो तेज कर रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय विधिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही लिया जाएगा.

इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की संपत्तियों के रिकॉर्ड, उनके उपयोग और उन पर होने वाली गतिविधियों की निगरानी को भी चर्चा में ला दिया है. निगमायुक्त ने अधिकारियों को संकेत दिया है कि सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण में किसी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए. खासतौर पर ऐसी भूमि, भवन या संपत्ति जिनका स्वामित्व निगम के पास है, उनके संबंध में किसी भी प्रकार का निर्माण, हस्तांतरण या अधिकार सृजन करने से पहले दस्तावेजों की पूरी जांच जरूरी होगी.

अब इस मामले में संबंधित कर्मचारी के जवाब, जिला प्रशासन द्वारा पट्टा निरस्तीकरण की अनुशंसा पर की जाने वाली कार्रवाई और राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति महत्वपूर्ण होगी. फिलहाल निगम प्रशासन ने विवादित संपत्ति पर किसी भी नए निर्माण या अनधिकृत लाभ की संभावना रोकने के लिए अपनी संबंधित शाखाओं को सतर्क कर दिया है. आने वाले दिनों में जांच की अगली कार्रवाई से यह और स्पष्ट होगा कि पट्टा हासिल करने की प्रक्रिया में वास्तव में किन स्तरों पर अनियमितता हुई और उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-