'गांधारी' मूवी रिव्यू: तापसी पन्नू का दमदार एक्शन, पर कमजोर पटकथा ने फीका किया थ्रिल


प्रेषित समय :16:54:40 PM / Fri, Sep 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

तापसी पन्नू और लेखिका कनिका ढिल्लों की जोड़ी एक बार फिर एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'गांधारी' के साथ ओटीटी पर लौटी है. देवाशीष मखीजा के निर्देशन में बनी यह फिल्म बाल तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे और एक मां के संघर्ष पर आधारित है. हालांकि, तापसी पन्नू के बेहतरीन अभिनय और दमदार एक्शन सीक्वेंस के बावजूद, अधपकी कहानी के कारण यह थ्रिलर दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहती है.

क्या है 'गांधारी' की कहानी?
फिल्म की कहानी पश्चिम बंगाल के एक काल्पनिक शहर जॉयपुरा की पृष्ठभूमि पर बनी है. ट्रेन में यात्रा के दौरान बानी (तापसी पन्नू) और गोकुल (इश्वाक सिंह) की छोटी बेटी मिष्टी अचानक गायब हो जाती है. बेटी को बचाने की कोशिश में बानी गंभीर रूप से चोटिल होकर अपनी आंखों की रोशनी खो बैठती है. स्थानीय पुलिस से मदद न मिलने पर बानी खुद अपनी बेटी की तलाश में निकलती है.

अपनी मेंटॉर झुनु (मीता वशिष्ठ) की मदद से बानी न केवल लड़ना सीखती है, बल्कि आंखों की रोशनी वापस आने के बाद भी 'गांधारी' का रूप धरकर बाल तस्करी करने वाले 'ब्लैक होल' गिरोह की अंधेरी दुनिया में उतरती है.

अभिनय और एक्शन में दम, पर लिखावट कमजोर
फिल्म में तापसी पन्नू ने एक बेबस मां और आक्रामक फाइटर का किरदार बखूबी निभाया है. उनके एक्शन सीन, खासतौर पर 'बेबी' और 'नाम शबाना' की याद दिलाते हैं. मीता वशिष्ठ, स्वास्तिका मुखर्जी, छाया कदम और जतिन सरना जैसे दिग्गज कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद कमजोर पटकथा के कारण उनके किरदारों को ज्यादा गहराई नहीं मिल पाई है.

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और सिनेमैटोग्राफी माहौल बनाने में काफी हद तक सफल रहते हैं, लेकिन कहानी में नयापन न होना और ढीला क्लाइमेक्स फिल्म के रोमांच को कम कर देता है.

कलाकार: तापसी पन्नू, इश्वाक सिंह, मीता वशिष्ठ, स्वास्तिका मुखर्जी, जतिन सरना

निर्देशक: देवाशीष मखीजा

स्टार रेटिंग: 2.5/5

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-