म्यूल खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम विदेश तक पहुंची, बैंककर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

म्यूल खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम विदेश तक पहुंची, बैंककर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

प्रेषित समय :19:28:56 PM / Sat, Sep 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

इंदौर. साइबर ठगी के मामलों में पुलिस को अब ऐसे नेटवर्क का पता चला है, जिसमें ठगी की रकम केवल बैंक खातों में जमा कर निकाल लेने तक सीमित नहीं रही, बल्कि म्यूल खातों के जरिए उसे कई स्तरों पर स्थानांतरित कर विदेश तक पहुंचाया गया. इंदौर पुलिस की अलग-अलग थानों में चल रही जांच के दौरान सामने आए मामलों ने बैंक खातों की खरीद-फरोख्त से लेकर बैंकिंग प्रक्रिया के दुरुपयोग तक कई सवाल खड़े किए हैं. जांच में बैंककर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है. पुलिस का कहना है कि कुछ खातों में भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों की अनदेखी किए जाने के संकेत मिले हैं और संबंधित बैंककर्मियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं.

क्राइम ब्रांच के साथ सराफा, एमजी रोड, संयोगितागंज और कोतवाली पुलिस की कार्रवाई में देश के अलग-अलग राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम के इंदौर के बैंक खातों में पहुंचने की कड़ियां सामने आई हैं. पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, बिहार, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में दर्ज साइबर अपराध की शिकायतों से इंदौर के कुछ बैंक खातों का संबंध मिला है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों को किस तरह उपलब्ध कराया गया और खातों में पहुंची रकम को आगे किन माध्यमों से भेजा गया.

बीकॉम स्नातक ने खाता और सिम दोनों उपलब्ध कराए
डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी के अनुसार पुलिस ने शुक्रवार को तिलक नगर निवासी लक्की को गिरफ्तार किया है. आरोपी बीकॉम स्नातक है. पुलिस के मुताबिक उसने अपना बैंक खाता म्यूल अकाउंट के रूप में दूसरे लोगों को उपलब्ध कराया था. इतना ही नहीं, उसने अपने नाम पर जारी सिम भी अन्य लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दे दी थी.

पुलिस के अनुसार इस सिम का इस्तेमाल बैंकिंग लेन-देन से जुड़े ओटीपी प्राप्त करने के लिए किया जाता था. यानी बैंक खाते के साथ मोबाइल नंबर और ओटीपी तक पहुंच उपलब्ध कराकर साइबर ठगी के नेटवर्क को मदद पहुंचाई जा रही थी. पुलिस का आरोप है कि खाते और सिम की मदद से संगठित तरीके से कई राज्यों में साइबर फ्राड किया गया.

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि लक्की के खाते का इस्तेमाल कितने मामलों में हुआ और उसके खाते में आने वाली रकम को आगे किस-किस खाते या माध्यम से भेजा गया. विदेश तक रकम पहुंचाने के लिए यूएसडीटी और क्रिप्टो करंसी का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है.

देश के कई राज्यों की ठगी से जुड़े खाते
क्राइम ब्रांच ने राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर क्राइम पोर्टल से मिले आंकड़ों के आधार पर खातों की जांच की. इसमें इंदौर के कुछ खातों का संबंध देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों से सामने आया.

पुलिस जांच में पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, बिहार, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों की शिकायतों का संबंध म्यूल खातों से पाया गया है. इससे यह संकेत मिला है कि इंदौर में उपलब्ध कराए गए कुछ बैंक खाते स्थानीय स्तर की ठगी के बजाय बहु-राज्यीय साइबर अपराध के नेटवर्क में इस्तेमाल हो रहे थे.

जांच का दायरा अब केवल खाता उपलब्ध कराने वालों तक सीमित नहीं है. पुलिस उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जिन्होंने खाते हासिल किए, उनमें ठगी की रकम मंगवाई और बाद में उसे दूसरे खातों या डिजिटल माध्यमों के जरिए आगे भेजा.

बैंककर्मियों की भूमिका पर भी सवाल
जांच के दौरान पुलिस को कुछ बैंक खातों के संचालन और उनके सत्यापन की प्रक्रिया में बैंककर्मियों की भूमिका संदिग्ध लगी है. पुलिस को ऐसे मामले भी मिले हैं, जिनमें आरबीआइ के नियमों का पालन नहीं किए जाने की आशंका है.

पुलिस अब संबंधित बैंककर्मियों को नोटिस जारी कर रही है. उनसे खातों को खोलने, दस्तावेजों के सत्यापन, लेन-देन और संदिग्ध गतिविधियों से संबंधित जानकारी मांगी जा रही है. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जिन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लिए हुआ, उन्हें खोलते समय बैंक की ओर से निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं.

बैंककर्मियों की भूमिका सामने आने के बाद जांच का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि म्यूल खातों का इस्तेमाल रोकने में बैंकिंग तंत्र की सतर्कता महत्वपूर्ण होती है. पुलिस अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किसी स्तर पर लापरवाही हुई या खाताधारकों को जानबूझकर सुविधा उपलब्ध कराई गई.

उत्तर प्रदेश की ठगी की रकम इंदौर के खातों में
संयोगितागंज पुलिस ने शुक्रवार रात नट कालोनी, सिरपुर निवासी आदित्य, मिथुन पंवार, संदीप और अंशुल पाटीदार के खिलाफ दो मामले दर्ज किए हैं. पुलिस के अनुसार आरोपितों ने एचडीएफसी बैंक में खाते खुलवाए थे. इन खातों में उत्तर प्रदेश में हुई साइबर ठगी की रकम हस्तांतरित होना पाया गया है.

पुलिस अब यह पता कर रही है कि खातों का इस्तेमाल किसके निर्देश पर किया गया और उत्तर प्रदेश में ठगी करने वाले आरोपितों से इन खाताधारकों का संपर्क किस माध्यम से हुआ था. खातों में रकम आने के बाद उसका आगे क्या किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है.

इंदौर का बैंक खाता ओडिशा की ठगी से जुड़ा
एमजी रोड पुलिस ने साउथ गाडराखेड़ी, सदर बाजार निवासी अभिषेक पुरी के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस के अनुसार उसका एमजी रोड स्थित बैंक आफ बड़ौदा में खाता है. इस खाते में ओडिशा में हुई धोखाधड़ी की राशि जमा हुई थी.

इस मामले ने यह भी स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधी किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं हैं. एक राज्य में ठगी करने के बाद रकम दूसरे राज्य के बैंक खाते में भेजी जा रही है और वहां से उसे आगे स्थानांतरित किया जा रहा है. इसी वजह से पुलिस अलग-अलग राज्यों की साइबर अपराध शिकायतों और बैंक खातों के बीच संबंध तलाश रही है.

यूको बैंक के खातों की भी जांच
कोतवाली पुलिस ने एमजी रोड निवासी जुबेर शाह और समीर हुसैन के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस के अनुसार दोनों के खाते महारानी रोड स्थित यूको बैंक में हैं. इन खातों में जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र में हुई साइबर ठगी की रकम जमा होना पाया गया है.

पुलिस अब खातों में हुए लेन-देन की जांच कर रही है. रकम किस खाते से आई, उसके बाद कहां भेजी गई और खातों को खुलवाने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था, इन सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया गया है.

इंड्सइंड बैंक के खाते में केरल और कर्नाटक की रकम
रावजी बाजार पुलिस ने जयभवानी नगर निवासी विशाल सोनी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है. पुलिस के मुताबिक विशाल ने पलसीकर कालोनी स्थित इंड्सइंड बैंक में खाता खुलवाया था. इस खाते में केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र में साइबर ठगी कर हासिल की गई रकम हस्तांतरित की गई थी.

एक ही खाते में अलग-अलग राज्यों से ठगी की रकम पहुंचने के बाद पुलिस अब पूरे लेन-देन की कड़ी जोड़ रही है. जांच अधिकारियों का मानना है कि ऐसे खातों के जरिए रकम को अलग-अलग स्तर पर घुमाया जाता है, जिससे मूल ठगी और रकम के अंतिम इस्तेमाल के बीच सीधा संबंध तलाशना मुश्किल हो जाता है.

सराफा पुलिस ने भी दर्ज किया मामला
इसी क्रम में सराफा पुलिस ने नार्थ हरसिद्धि निवासी मोहम्मद फैजान मंसूरी के खिलाफ मामला दर्ज किया है. उसके बैंक खाते से जुड़े लेन-देन की भी जांच की जा रही है. पुलिस अलग-अलग थानों में दर्ज मामलों और साइबर अपराध पोर्टल से मिले डेटा का मिलान कर रही है, ताकि म्यूल खातों के पूरे नेटवर्क की पहचान की जा सके.

क्रिप्टो करंसी के जरिए विदेश भेजी गई रकम
जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि साइबर ठगी की रकम को म्यूल खातों में जमा करने के बाद सीधे नकद निकालने के बजाय डिजिटल माध्यमों से आगे भेजे जाने की जानकारी सामने आई है. पुलिस के अनुसार यूएसडीटी और क्रिप्टो करंसी के माध्यम से रुपये विदेश तक पहुंचाए गए हैं.

इससे जांच एजेंसियों के सामने चुनौती बढ़ गई है. बैंक खातों में रकम आने के बाद यदि उसे डिजिटल परिसंपत्तियों के माध्यम से विदेश भेज दिया जाता है, तो रकम की अंतिम कड़ी तक पहुंचने के लिए बैंकिंग लेन-देन के साथ डिजिटल लेन-देन की भी पड़ताल करनी पड़ती है.

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ के आधार पर उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जिन्होंने खाते और सिम उपलब्ध कराने के लिए संपर्क किया था. साथ ही विदेश तक रकम पहुंचाने वाली कड़ी की भी जांच की जा रही है.

म्यूल खातों से जुड़े इन मामलों ने यह संकेत दिया है कि साइबर ठगी का नेटवर्क अब केवल फर्जी फोन काल या इंटरनेट के जरिए लोगों को ठगने तक सीमित नहीं है. ठगी के बाद रकम को अलग-अलग बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल माध्यमों से कई स्तर पर स्थानांतरित करने की व्यवस्था भी नेटवर्क का हिस्सा बन चुकी है. इंदौर पुलिस की जांच अब इसी पूरी श्रृंखला को जोड़ने पर केंद्रित है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-