जबलपुर. एमपी के जबलपुर से करीब किलोमीटर दूर कुआंखेड़ा गांव में जन्माष्टमी पर अनूठी मटकी फोड़ प्रतियोगिता हुई. 20 फीट गहरे तालाब के बीचों-बीच 40 फीट ऊंचाई पर बंधी दही हांडी फोडऩे के प्रयास में 199 लोग गिरे. आखिर में ग्राम सुंदरादेही के गनपत सिंह ने चैलेंज पूरा किया और मटकी फोड़कर 5100 रुपए का पुरस्कार जीता. ग्रामीणों ने भी स्वेच्छा से राशि देकर उन्हें सम्मानित किया.
प्रतियोगिता दिन में शुरू हुई और शाम तक चली. गांव और आसपास के गांवों से युवक मटकी फोडऩे पहुंचे. तेजी से हिलती रस्सी के कारण 199 लोग मटकी तक नहीं पहुंच सके. कोई कम तो कोई ज्यादा पानी में गिरा. रस्सी तेजी से हिल रही थी और बारिश भी हो रही थी. इसलिए प्रतियोगी ज्यादा देर तक रस्सी पकड़ नहीं पाए. गांव में करीब 100 फीट चौड़ा तालाब है. उसके दोनों ओर बरगद के पेड़ हैं.
दोनों पेड़ों पर 40 फीट ऊंचाई पर रस्सी बांधकर बीच में दही से भरी मटकी लटकाई जाती है. प्रतियोगी पेड़ पर चढ़कर रस्सी से लटकते हुए मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ता है. जैसे ही प्रतिभागी रस्सी पर पहुंचता है, दोनों ओर से ग्रामीण उसे हिलाने लगते हैं. इससे पकड़ ढीली पडऩे पर प्रतियोगी मटकी तक पहुंचने से पहले गिर जाता है.
आसपास के गांवों से भी लोग देखने पहुंचते हैं-
कुआंखेड़ा में यह प्रतियोगिता करीब 10 साल पहले गांव के कुछ युवाओं ने शुरू की थी. जन्माष्टमी पर होने वाली प्रतियोगिता की जिम्मेदारी अब भी गांव के युवा संभालते हैं. हर साल इसमें प्रतिभागियों और दर्शकों की संख्या बढ़ रही है. आसपास के गांवों से भी लोग इसे देखने पहुंचते हैं. कई बार प्रतियोगिता दो से तीन दिन तक चलती है.
तैरना आता है तभी मटकी फोडऩे की इजाजत-
अभिषेक ने बताया कि तालाब काफी गहरा है. इसलिए प्रतियोगिता में उतरने से पहले प्रतिभागी से पूछा जाता है कि उसे तैरना आता है या नहीं. शराब या किसी अन्य नशे की हालत में किसी व्यक्ति को मटकी फोडऩे की अनुमति नहीं दी जाती.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

