फर्जी ई-मेल से जबलपुर की फर्म के खाते से 27 लाख उड़ाए, इंदौर की कंपनी को भुगतान का दिया था झांसा

फर्जी ई-मेल से जबलपुर की फर्म के खाते से 27 लाख उड़ाए, इंदौर की कंपनी को भुगतान का दिया था झांसा

प्रेषित समय :15:58:33 PM / Sat, Sep 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. इंदौर की एक कंपनी के साथ कारोबार करने वाली जबलपुर की एक फर्म को बैंक खाता बदलने संबंधी फर्जी ई-मेल पर भरोसा करना भारी पड़ गया. साइबर ठगों ने संबंधित कंपनी के नाम से ई-मेल भेजकर भविष्य का भुगतान नए बैंक खाते में करने की जानकारी दी. फर्म ने ई-मेल को वास्तविक मानते हुए बताए गए बैंक खाते में 27 लाख पांच हजार 690 रुपये ट्रांसफर कर दिए. बाद में इंदौर की वास्तविक कंपनी ने राशि प्राप्त नहीं होने की जानकारी दी, जिसके बाद फर्म को संदेह हुआ. जांच में फर्जी ई-मेल के जरिए रकम दूसरे खाते में पहुंचाए जाने का खुलासा हुआ. मामले में शुक्रवार को गोरखपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस अब ई-मेल और बैंक लेनदेन के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है.

आदर्श नगर निवासी महत्व चावला (22) सेनेटरी वेयर्स की फर्म संचालित करते हैं. उनकी फर्म इंदौर की एक कंपनी के साथ व्यापार करती है. दोनों के बीच भुगतान बैंक खातों के माध्यम से होता है. 28 मार्च को चावला की फर्म के पास संबंधित कंपनी के नाम से एक ई-मेल आया था. ई-मेल में कंपनी का बैंक खाता बदलने और इसके बाद भविष्य में किए जाने वाले भुगतान को नए बैंक खाते में करने की जानकारी दी गई थी. फर्म ने ई-मेल को वास्तविक कंपनी की ओर से भेजा गया संदेश मान लिया और उसमें दिए गए नए बैंक खाते को सही समझकर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई.

फर्म की ओर से 27 लाख पांच हजार 690 रुपये बताए गए नए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए गए. भुगतान होने के कुछ समय बाद इंदौर की वास्तविक कंपनी से संपर्क हुआ तो उसने बताया कि उसे उक्त राशि प्राप्त नहीं हुई है. इसके बाद मामले को लेकर संदेह पैदा हुआ. इसी बीच फर्म के पास फिर एक ई-मेल आया, जिसमें दोबारा बैंक खाता बदलने की सूचना दी गई. इस बार फर्म को ई-मेल की सत्यता पर संदेह हुआ और पूरे मामले की जांच की गई. जांच में सामने आया कि कंपनी के नाम से भेजा गया ई-मेल फर्जी था और इसी के माध्यम से भुगतान की दिशा बदलकर रकम दूसरे खाते में पहुंचाई गई थी.

फर्म की शिकायत पर गोरखपुर पुलिस ने शुक्रवार को मामले में एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ई-मेल से जुड़े तथ्यों और बैंक खातों में हुए लेनदेन के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है. साइबर ठगी के इस मामले में रकम जिस खाते में पहुंची, उसके संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है.

इसी बीच छत्तीसगढ़ पुलिस के एक दल ने शुक्रवार को सिहोरा से दो लोगों को पकड़ा है. दोनों को साइबर ठगी के मामले में संदेही बताया गया है. छत्तीसगढ़ में कुछ लोगों के साथ हुई साइबर ठगी की राशि पकड़े गए दोनों लोगों के बैंक खातों में पहुंची थी. इसी मामले में दोनों का सुराग तलाशते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस सिहोरा पहुंची और दोनों को पकड़कर पूछताछ शुरू की. पुलिस उनसे साइबर ठगी से जुड़े मामलों में जानकारी ले रही है. जबलपुर में सामने आए 27 लाख पांच हजार 690 रुपये के मामले से भी बैंक लेनदेन और अन्य तकनीकी तथ्यों के आधार पर जानकारी जुटाई जा रही है.

जबलपुर में साइबर ठगी का एक अन्य मामला भी सामने आया है, जिसमें नगरीय प्रशासन विभाग की एक महिला लिपिक के खाते से 12 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए गए. मोबाइल खराब होने पर मदद के लिए कंपनी के नंबर पर काल करना महिला को महंगा पड़ गया. साइबर ठग ने रिफंड का झांसा देकर उनसे एटीएम कार्ड की फोटो मंगाई और इसके बाद उनके खाते से रकम ट्रांसफर कर ली.

गोरखपुर स्थित बून फर्स्ट लाइट होम निवासी भावना चौबे नगरीय प्रशासन विभाग में लिपिक वर्ग-तीन के पद पर कार्यरत हैं. बुधवार को उनका फोन खराब हो गया था. फोन बदलने के लिए उन्होंने कंपनी के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क किया था. बातचीत के दौरान सामने वाले व्यक्ति ने वारंटी पिरियड एवं अन्य शर्तों को बताकर उन्हें फोन की राशि लौटाने की बात कही. उसने बताया कि रिफंड प्राप्त करने के लिए एटीएम कार्ड की फोटो भेजनी होगी.

सामने वाले व्यक्ति की बात पर भरोसा करते हुए भावना चौबे ने सोशल मीडिया पर अपने एटीएम कार्ड की फोटो भेज दी. इसके कुछ देर बाद उनके बैंक खाते से रकम निकलने लगी. चार बार में कुल 12 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गए. खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की. शुक्रवार को वह गोरखपुर थाने पहुंचीं और शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है.

दोनों मामलों में साइबर ठगी के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए गए. पहले मामले में कारोबारी फर्म को इंदौर की वास्तविक कंपनी के नाम से फर्जी ई-मेल भेजकर बैंक खाता बदलने की सूचना दी गई और उसके आधार पर 27 लाख पांच हजार 690 रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करा लिए गए. दूसरे मामले में मोबाइल संबंधी सहायता और रिफंड का झांसा देकर महिला से एटीएम कार्ड की फोटो हासिल की गई और इसके बाद चार बार में उनके खाते से कुल 12 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए गए. गोरखपुर पुलिस दोनों मामलों में शिकायत के आधार पर जांच कर रही है और संबंधित बैंक खातों तथा लेनदेन से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-