जबलपुर. नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से करीब 29 लाख रुपये की कथित ठगी के मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद जेल भेजी गई शिक्षिका राखी बंसल उर्फ राखी वंशकार का नाम शिक्षा विभाग की समायोजन सूची में शामिल होने से विभागीय प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं. शिक्षिका को एरिया एजुकेशन आफिसर (एईओ) संकुल में जनशिक्षक के रूप में समायोजित किया गया है. सबसे अहम बात यह है कि सूची कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन के बाद जारी की गई थी. सूची सामने आने के बाद अधिकारियों ने कहा कि शिक्षिका के जेल में होने की जानकारी विभाग को देर से मिली. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि समायोजन सूची तैयार और अनुमोदित किए जाने के दौरान संबंधित शिक्षिका की स्थिति का सत्यापन क्यों नहीं हो सका.
शिक्षा विभाग में यह मामला उस समय सामने आया जब पूर्व से कार्यरत जनशिक्षकों के समायोजन की सूची जारी हुई. कार्यालय जिला शिक्षा केंद्र, जबलपुर की ओर से विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और विकासखंड स्त्रोत समन्वयकों को जारी पत्र में बताया गया था कि राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल की वीडियो कान्फ्रेंसिंग में दिए गए निर्देशों के अनुसार पूर्व में संचालित 63 जनशिक्षा केंद्रों का समायोजन 50 एरिया एजुकेशन आफिस (एईओ) संकुल केंद्रों में किया गया है. नवनियुक्त जनशिक्षकों की नियुक्ति एईओ संकुल में की गई है, जबकि पूर्व से कार्यरत जनशिक्षकों के समायोजन की सूची कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन के बाद जारी की गई.
इसी सूची में राखी बंसल उर्फ राखी वंशकार का नाम भी शामिल था. शिक्षिका उस समय नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से कथित ठगी के मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद जेल में थी. सूची में उनका नाम सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया. अधिकारियों की ओर से सफाई दी गई कि शिक्षिका के जेल में होने की जानकारी विभाग को देर से मिली थी. यही जवाब अब विभागीय स्तर पर होने वाले सत्यापन और सूचना के आदान-प्रदान की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है.
मामला केवल सूची में नाम शामिल होने तक सीमित नहीं है. समायोजन की सूची कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन के बाद जारी की गई थी. ऐसे में सूची तैयार होने से लेकर उसके अनुमोदन तक शिक्षिका की वर्तमान स्थिति की जानकारी विभागीय स्तर पर क्यों नहीं पहुंची, यह सवाल सामने आया है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिकारियों को शिक्षिका के जेल में होने की जानकारी बाद में मिली. हालांकि विभाग की ओर से यही कहा गया है कि जानकारी देरी से मिली थी.
राखी बंसल का नाम जिस मामले में सामने आया है, उसमें पुलिस ने पिछले दिनों नौकरी लगाने के नाम पर बेरोजगारों से करीब 29 लाख रुपये की कथित ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था. मामले में मुख्य आरोपित सहायक शिक्षक गिरजेश सिंह राजपूत को विदिशा से गिरफ्तार किया गया था. पुलिस पूछताछ में आरोपित द्वारा कई युवाओं से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 29 लाख रुपये वसूलने की बात सामने आई थी.
मामले की शिकायत घमापुर के सिद्धबाबा क्षेत्र निवासी छात्र अभिनव सेन ने दर्ज कराई थी. पुलिस के अनुसार शिकायत में ग्राम खड़ाखेड़ी, थाना पथरी, जिला विदिशा निवासी गिरजेश सिंह पर शासकीय सेवा में स्थायी नौकरी दिलाने का झांसा देकर रुपये लेने का आरोप लगाया गया था. अभिनव ने आरोप लगाया था कि गिरजेश सिंह ने उससे 3 लाख 75 हजार रुपये लिए.
अभिनव के अनुसार उसकी पहचान शीतला माई क्षेत्र निवासी शिक्षिका राखी बंसल उर्फ राखी वंशकार से थी. आरोप है कि राखी ने ही उसे बताया था कि सुमेरदांगी शासकीय स्कूल में पदस्थ सहायक शिक्षक गिरजेश सिंह पहले भी लोगों को सरकारी नौकरी दिला चुका है और कलेक्ट्रेट में नौकरी लगवा सकता है. इसी शिकायत और जांच के दौरान शिक्षिका का नाम मामले में सामने आया.
मामले की कार्रवाई के दौरान महिला शिक्षिका राखी बंसल उर्फ राखी वंशकार को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था. पुलिस कार्रवाई के बाद उसे जेल भेज दिया गया. इसके बाद भी शिक्षा विभाग की समायोजन सूची में उनका नाम शामिल होना सामने आया. यही स्थिति अब विभागीय स्तर पर सूचना और सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर चर्चा का कारण बनी है.
विभाग की ओर से 63 जनशिक्षा केंद्रों को 50 एईओ संकुल केंद्रों में समायोजित करने की प्रक्रिया के तहत सूची तैयार की गई थी. पूर्व से कार्यरत जनशिक्षकों के समायोजन की सूची कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन के बाद जारी हुई. प्रक्रिया पूरी होने के बाद सूची में ऐसी शिक्षिका का नाम सामने आया, जिसके बारे में विभाग के अनुसार जेल में होने की जानकारी उसे समय पर नहीं मिली थी.
अधिकारियों का यह कहना कि शिक्षिका के जेल में होने की जानकारी देर से मिली, इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पक्ष बन गया है. क्योंकि शिक्षिका का नाम किसी सामान्य पदस्थापना सूची में नहीं, बल्कि जनशिक्षक के रूप में एईओ संकुल में समायोजन की सूची में शामिल हुआ. सूची तैयार होने और अनुमोदन तक संबंधित कर्मचारी की स्थिति की जानकारी उपलब्ध न होना विभागीय समन्वय और सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है.
मामले में यह भी तथ्य है कि शिक्षिका के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हो चुकी थी और उन्हें हिरासत में लेने के बाद जेल भेजा गया था. दूसरी ओर, शिक्षा विभाग की प्रक्रिया में उनका नाम पूर्व से कार्यरत जनशिक्षकों के समायोजन के लिए तैयार सूची में शामिल हो गया. इस विरोधाभासी स्थिति के सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों को जानकारी देर से मिलने की बात कहनी पड़ी.
पुलिस की ओर से नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी के मामले में की गई कार्रवाई और शिक्षा विभाग की ओर से जारी समायोजन सूची के बीच सामने आया यह घटनाक्रम अब विभागीय स्तर पर चर्चा में है. एक ओर पुलिस जांच में करीब 29 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला है, जिसमें मुख्य आरोपित सहायक शिक्षक गिरजेश सिंह राजपूत को विदिशा से गिरफ्तार किया गया था और शिक्षिका राखी बंसल उर्फ राखी वंशकार को भी हिरासत में लेकर जेल भेजा गया. दूसरी ओर, इसी शिक्षिका का नाम एईओ संकुल में जनशिक्षक के रूप में समायोजन सूची में शामिल हो गया.
सूची जारी होने के बाद जानकारी सामने आने से विभाग में हड़कंप मचा. अधिकारियों के अनुसार जेल में होने की जानकारी देर से मिली थी. अब पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि समायोजन जैसी विभागीय प्रक्रिया में नाम शामिल करने से पहले संबंधित कर्मचारी की स्थिति की जानकारी समय पर क्यों नहीं मिल सकी. उपलब्ध तथ्यों के आधार पर फिलहाल विभाग की ओर से देरी से जानकारी मिलने को ही इसकी वजह बताया गया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

