जबलपुर में 2.44 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोपी बिल्डर रमनीत सिंह गिरफ्तार, 8 मामलों में पुलिस को थी तलाश

जबलपुर में 2.44 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोपी बिल्डर रमनीत सिंह गिरफ्तार, 8 मामलों में पुलिस को थी तलाश

प्रेषित समय :21:02:49 PM / Mon, Sep 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। जमीन की खरीद-बिक्री के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे जीएसके मेंबर्स कंपनी के प्रोपराइटर रमनीत सिंह सेठी को बरेला पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपित के खिलाफ जमीन संबंधी धोखाधड़ी और जालसाजी के अलग-अलग मामलों में करीब 2.44 करोड़ रुपये की राशि से जुड़े आरोप हैं। वह लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था और उसके खिलाफ जबलपुर के अलग-अलग थानों में कुल आठ आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। इनमें सात मामले बरेला थाने और एक मामला गोरखपुर थाने में दर्ज बताया गया है।

                                                                    पुलिस को आरोपित के नवादा रोड क्षेत्र में मौजूद होने की सूचना मिली थी। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने 7 सितंबर को गोरखपुर थाना क्षेत्र स्थित प्रीत विहार कॉलोनी के साईं मंदिर के पास घेराबंदी की। पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपित को मौके से पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद आरोपित को सेंट्रल जेल भेजे जाने की कार्रवाई की गई।
लंबे समय से पुलिस को थी तलाश
पुलिस के अनुसार रमनीत सिंह सेठी के खिलाफ जमीन संबंधी लेन-देन और कथित धोखाधड़ी के कई मामले पहले से दर्ज थे। शिकायतों के आधार पर प्रकरण दर्ज होने के बाद से ही उसकी तलाश की जा रही थी। लगातार पुलिस से बचने के कारण उसकी गिरफ्तारी चुनौती बनी हुई थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपित की तलाश के लिए मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया था। उसके संभावित ठिकानों और गतिविधियों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही थी। पुलिस को लगातार यह प्रयास था कि आरोपित के वर्तमान ठिकाने का पता लगाया जा सके। इसी दौरान पुलिस को नवादा रोड क्षेत्र में उसके पहुंचने की सूचना मिली। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई। साईं मंदिर के आसपास पुलिसकर्मियों को तैनात कर घेराबंदी की गई। जैसे ही आरोपित वहां पहुंचा, टीम ने उसे पकड़ लिया। पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान उसे भागने का अवसर नहीं मिला।
आठ आपराधिक प्रकरणों में नाम सामने आया
पुलिस ने बताया कि आरोपित के खिलाफ कुल आठ आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। इनमें बरेला थाने में सात और गोरखपुर थाने में एक मामला शामिल है। सभी मामलों की प्रकृति और उनमें दर्ज आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। जमीन से जुड़े मामलों में दस्तावेजों, लेन-देन, नामांतरण, कब्जे और संबंधित पक्षों के बीच हुए करार जैसे बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस अब दर्ज प्रकरणों से जुड़े दस्तावेजों और शिकायतों को एक साथ रखकर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। करीब 2.44 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इस मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर होगी।
जमीन की खरीद-बिक्री के नाम पर विवाद
पुलिस के अनुसार आरोपित के खिलाफ जिन मामलों में प्रकरण दर्ज हुए हैं, वे जमीन और संपत्ति के लेन-देन से संबंधित हैं। शिकायतकर्ताओं की ओर से जमीन संबंधी व्यवहार में कथित अनियमितता और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे। शिकायतों की जांच के बाद संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किए गए। जमीन की खरीद-बिक्री में बड़ी रकम के लेन-देन के कारण ऐसे मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यही वजह है कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब संबंधित दस्तावेजों, लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और शिकायतों में लगाए गए आरोपों का मिलान कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अलग-अलग प्रकरणों में लेन-देन किस प्रकार हुआ और किन-किन लोगों से संबंधित है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नवादा रोड पर साईं मंदिर के पास बिछाया जाल
आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने जिस तरह से कार्रवाई की, उसमें मुखबिर सूचना अहम रही। पुलिस को जानकारी मिली कि वह गोरखपुर थाना क्षेत्र के नवादा रोड स्थित प्रीत विहार कॉलोनी के आसपास मौजूद है। सूचना मिलते ही बरेला पुलिस की टीम ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई। साईं मंदिर के पास संभावित स्थान पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। आरोपित के वहां पहुंचने के बाद टीम ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस की अचानक हुई कार्रवाई के कारण आरोपित को संभलने या मौके से निकलने का मौका नहीं मिला। गिरफ्तारी के बाद उसे थाने लाकर प्रकरण से संबंधित औपचारिक कार्रवाई पूरी की गई। इसके बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
दस्तावेज और लेन-देन की भी होगी जांच
गिरफ्तारी के बाद पुलिस का अगला फोकस जमीन संबंधी मामलों के दस्तावेजों की जांच पर है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शिकायतकर्ताओं के साथ हुए कथित लेन-देन में कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए थे और संपत्ति से संबंधित दावे किस आधार पर किए गए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण कर उन्हें प्रकरण के साक्ष्यों से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही संबंधित लोगों के बयान भी जांच का हिस्सा हो सकते हैं। जमीन के स्वामित्व और लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की वैधानिक स्थिति की भी जांच की जाएगी। चूंकि आरोपित के खिलाफ अलग-अलग थानों में कई प्रकरण दर्ज हैं, इसलिए पुलिस इन मामलों के बीच किसी संभावित समानता या आपसी संबंध की भी पड़ताल कर सकती है।
बरेला पुलिस टीम की कार्रवाई
आरोपित की गिरफ्तारी की कार्रवाई बरेला थाना प्रभारी निरीक्षक संगीता सिंह के नेतृत्व में की गई। टीम में उप निरीक्षक केपी झारिया, उप निरीक्षक शशिकला उड़के और सहायक उप निरीक्षक मुकेश प्रभाकर शामिल रहे। मैदानी कार्रवाई में आरक्षक क्रमांक 2332 अविनाश और आरक्षक क्रमांक 70 रवि शर्मा की भी भूमिका रही। पुलिस टीम ने सूचना मिलने के बाद बिना समय गंवाए संभावित स्थान पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपित को गिरफ्तार किया।
न्यायालय से न्यायिक हिरासत में भेजा गया
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपित को न्यायालय के समक्ष पेश किया। न्यायालय के आदेश के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद उसे सेंट्रल जेल भेजा गया। पुलिस अब दर्ज मामलों की आगे की विवेचना में जुटी है। जमीन संबंधी कथित धोखाधड़ी के मामलों में आरोपों की पुष्टि के लिए दस्तावेजी साक्ष्यों को एकत्र किया जा रहा है। साथ ही अलग-अलग शिकायतों में बताए गए घटनाक्रम और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
करोड़ों के मामले ने बढ़ाई गंभीरता
जमीन संबंधी विवादों में अक्सर बड़ी रकम दांव पर होती है। इस मामले में करीब 2.44 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप होने के कारण प्रकरण की गंभीरता और बढ़ जाती है। आठ आपराधिक प्रकरणों में नाम सामने आने के बाद पुलिस के लिए आरोपित की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है। अब जांच का दायरा केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस संबंधित मामलों में आरोपों की वास्तविक स्थिति, लेन-देन और दस्तावेजों की वैधानिकता की जांच करेगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जमीन संबंधी मामलों में शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद अब लंबे समय से लंबित मामलों की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-