स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में जबलपुर का डंका 130 शहरों में तीसरा स्थान, दिल्ली में महापौर और निगमायुक्त को राष्ट्रीय सम्मान

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में जबलपुर का डंका 130 शहरों में तीसरा स्थान, दिल्ली में महापौर और निगमायुक्त को राष्ट्रीय सम्मान

प्रेषित समय :19:33:00 PM / Mon, Sep 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। शहर की हवा को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। केंद्र सरकार के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में जबलपुर ने देश के 130 शहरों के बीच तीसरा स्थान हासिल किया है। सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में जबलपुर की इस उपलब्धि के लिए महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। सर्वेक्षण में लखनऊ ने पहला और इंदौर ने दूसरा स्थान हासिल किया।                                                                   जबलपुर का तीसरे स्थान पर पहुंचना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शहर ने लगातार कई वर्षों से स्वच्छ वायु के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले दो वर्षों में जबलपुर दूसरे स्थान पर रहा था। इस बार तीसरा स्थान मिलने के बावजूद शहर ने देश के प्रमुख शहरों के बीच अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है। खास बात यह है कि वायु गुणवत्ता में सुधार के साथ नगर निगम की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई स्तरों पर किए गए प्रयासों को भी सर्वेक्षण में महत्व मिला।
दिल्ली में महापौर और निगमायुक्त हुए सम्मानित
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में जबलपुर की उपलब्धि के लिए महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार को सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय स्तर के मंच पर जबलपुर को मिली यह उपलब्धि शहर के लिए गौरव का विषय बनी। सम्मान प्राप्त करने के बाद महापौर और निगमायुक्त ने इसे शहर के नागरिकों की उपलब्धि बताया। उनका कहना रहा कि स्वच्छ वायु के लिए किए जा रहे प्रयासों में प्रशासन के साथ नागरिकों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण है। शहर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए गए विभिन्न कार्यों का असर वायु गुणवत्ता के आंकड़ों में भी दिखाई दिया है।
130 शहरों के बीच हुआ सर्वेक्षण
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पहल है और इसे राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत संचालित किया जाता है। इसके अंतर्गत देश के 130 शहरों को निर्धारित मापदंडों के आधार पर रैंकिंग दी जाती है। सर्वेक्षण का उद्देश्य शहरों के बीच वायु प्रदूषण को कम करने के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और स्वच्छ हवा के प्रति स्थानीय निकायों तथा नागरिकों को जागरूक करना है। शहरों के प्रदर्शन का आकलन अलग-अलग मानकों के आधार पर किया जाता है। इस बार जबलपुर का तीसरे स्थान पर आना नगर निगम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सर्वेक्षण में पहले स्थान पर लखनऊ और दूसरे स्थान पर इंदौर रहा।
लगातार बेहतर प्रदर्शन का सिलसिला
जबलपुर ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में जबलपुर देश में दूसरे स्थान पर रहा था। वर्ष 2025 में भी शहर ने दूसरा स्थान कायम रखा। इस बार तीसरा स्थान मिला है। रैंकिंग में मामूली बदलाव के बावजूद वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों में सुधार का सिलसिला जारी रहा है। नगर निगम के अनुसार शहर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए कार्यों का परिणाम वायु गुणवत्ता में सुधार के रूप में सामने आया है।
चार वर्षों में वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार
शहर की वायु गुणवत्ता के आंकड़ों में भी पिछले कुछ वर्षों में सुधार दर्ज किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में वायु गुणवत्ता सूचकांक 109 था। वर्ष 2024-25 में यह घटकर 92 हुआ। वर्ष 2025-26 में इसमें और सुधार हुआ तथा यह 88 पर पहुंचा। वर्ष 2026-27 में वायु गुणवत्ता सूचकांक 77 दर्ज किया गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक में कमी को सामान्य तौर पर बेहतर वायु गुणवत्ता की दिशा में सुधार के रूप में देखा जाता है। लगातार चार वर्षों में आंकड़े नीचे आने से यह संकेत मिलता है कि शहर में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
पेवर ब्लाक से धूल नियंत्रण की कोशिश
नगर निगम ने शहर के मुख्य मार्गों के साथ-साथ गली-मोहल्लों में भी पेवर ब्लाक लगवाने का काम कराया। इसका एक उद्देश्य सड़कों और खुले हिस्सों से उठने वाली धूल को नियंत्रित करना भी रहा। शहर में सड़क किनारे और कच्चे हिस्सों में धूल उड़ने की समस्या वायु प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण कारण मानी जाती है। पेवर ब्लाक के इस्तेमाल से ऐसे हिस्सों को पक्का करने और धूल के उड़ने की संभावना कम करने की कोशिश की गई। नगर निगम के स्तर पर इस तरह के कार्यों को स्वच्छ वायु से जुड़े प्रयासों में शामिल किया गया।
खुले में कचरा जलाने पर सख्ती
शहर में खुले स्थानों पर कचरा जलाने से निकलने वाला धुआं भी वायु प्रदूषण बढ़ाता है। इसे रोकने के लिए नगर निगम ने खुले में कचरा जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई और निगरानी पर जोर दिया। खुले में कचरा जलाने की प्रवृत्ति को नियंत्रित करने से स्थानीय स्तर पर धुएं और प्रदूषक तत्वों को कम करने में मदद मिल सकती है। नगर निगम की ओर से इस दिशा में सख्ती बरतने का दावा किया गया है।
सड़क और फुटपाथ की धुलाई पर जोर
धूल नियंत्रण के लिए नगर निगम की ओर से सड़क और फुटपाथ की धुलाई भी कराई गई। विशेष रूप से ऐसे स्थानों पर जहां यातायात अधिक रहता है और धूल जमा होने की संभावना रहती है, वहां पानी का छिड़काव और सफाई की गई।शहर में सड़क की धूल को नियंत्रित करना स्वच्छ वायु योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यातायात वाले क्षेत्रों में धूल कम करने के लिए किए गए इन उपायों का उद्देश्य हवा में उड़ने वाले धूल कणों को कम करना रहा।
चौराहों पर फव्वारे भी कराए गए शुरू
नगर निगम ने प्रमुख चौराहों पर फव्वारे भी शुरू कराए। इसका उद्देश्य शहर के प्रमुख यातायात क्षेत्रों में धूल और प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों को मजबूत करना बताया गया। इसके साथ ही शहर में पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मौसम के अनुसार विभिन्न उपाय किए गए। विशेषकर सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण बढ़ने की संभावना को देखते हुए नगर निगम ने निगरानी और नियंत्रण के उपायों पर जोर दिया।
जबलपुर के लिए तीसरा स्थान भी बड़ी उपलब्धि
देश के 130 शहरों के बीच तीसरा स्थान हासिल करना जबलपुर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। खासकर ऐसे समय में जब देश के बड़े शहर वायु प्रदूषण की चुनौती से जूझ रहे हैं, जबलपुर का शीर्ष तीन शहरों में बने रहना स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान देता है। हालांकि तीसरे स्थान के साथ नगर निगम के सामने अब अगले सर्वेक्षण में अपनी रैंकिंग सुधारने की चुनौती भी रहेगी। पिछले दो वर्षों में दूसरे स्थान पर रहे जबलपुर से अब नागरिकों और प्रशासन की उम्मीदें और बढ़ेंगी। स्वच्छ हवा की दिशा में आगे भी निरंतर काम करने की जरूरत होगी। राष्ट्रीय सम्मान मिलने के बाद नगर निगम के सामने उपलब्धि को बनाए रखने के साथ वायु गुणवत्ता में और सुधार की चुनौती है। इसके लिए सड़क की धूल, खुले में कचरा जलाने, यातायात से होने वाले प्रदूषण और अन्य स्थानीय स्रोतों पर लगातार निगरानी जरूरी होगी। जबलपुर का प्रदर्शन यह भी बताता है कि शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे-बड़े उपाय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अब तीसरे स्थान से आगे बढ़ते हुए जबलपुर अगले सर्वेक्षण में फिर शीर्ष स्थान हासिल करने की कोशिश करेगा।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-