सूरजपुर. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अनुकंपा नियुक्ति के एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी आश्रित ने समय सीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत कर दिया हो, तो सरकारी विभाग अपनी प्रशासनिक ढिलाई का लाभ उठाकर उस आवेदन को 'देरी' का हवाला देकर निरस्त नहीं कर सकता.
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने सूरजपुर निवासी स्नेहलता गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को उनकी वर्तमान शैक्षणिक योग्यता के आधार पर स्वीकृत एवं रिक्त पद पर अनुकंपा नियुक्ति पर नियमानुसार निर्णय लेने का आदेश दिया है.
7 साल बाद दी गई आवेदन निरस्त होने की सूचना
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता के पिता के निधन के बाद उन्होंने समय रहते अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था. हालांकि, कलेक्टर सूरजपुर के दिसंबर 2024 के पत्र के माध्यम से याचिकाकर्ता को जानकारी मिली कि उनका आवेदन 12 अगस्त 2014 को ही खारिज कर दिया गया था. विभाग का दावा था कि इसकी सूचना अगस्त 2021 में पत्र के जरिए दी गई थी, लेकिन याचिकाकर्ता को ऐसा कोई पत्र कभी प्राप्त नहीं हुआ.
विभाग द्वारा लंबे समय तक मामले को अटकाए रखने और बाद में प्रशासनिक चूक को छिपाने के लिए देरी का आधार बनाए जाने पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप पद पर विचार करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि याचिकाकर्ता ने आवेदन लंबित रहने के दौरान वर्ष 2017 में हायर सेकेंडरी और 2021 में डी.एल.एड. की परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी शैक्षणिक योग्यता में सुधार किया था.
हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आवेदक मूल पद के लिए पात्र नहीं थी, तब भी उसके आवेदन को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना अनुचित था. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभाग अपनी संचार प्रणाली की विफलता और ढिलाई का फायदा आवेदक के खिलाफ नहीं उठा सकता. अदालत ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता की वर्तमान शैक्षणिक योग्यता के अनुसार उपलब्ध रिक्त पद पर अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर प्राथमिकता से विचार किया जाए.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

