तिलक वर्मा ने टेस्ट टीम के लिए ठोकी दावेदारी, 266 रन के दम पर कहा लाल गेंद का क्रिकेट ही मेरा असली खेल

तिलक वर्मा ने टेस्ट टीम के लिए ठोकी दावेदारी, 266 रन के दम पर कहा लाल गेंद का क्रिकेट ही मेरा असली खेल

प्रेषित समय :21:50:06 PM / Wed, Sep 9th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

चेन्नई. भारतीय क्रिकेट में सीमित ओवरों के एक स्थापित बल्लेबाज के रूप में पहचान बना चुके तिलक वर्मा अब लाल गेंद के क्रिकेट में अपनी अगली बड़ी छलांग की तैयारी में हैं. 64 अंतरराष्ट्रीय सफेद गेंद मैच खेल चुके तिलक ने टेस्ट क्रिकेट में जगह बनाने की इच्छा खुलकर जाहिर की है. डुलेप ट्रॉफी में दक्षिण क्षेत्र की ओर से उनके लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने इस दावेदारी को और मजबूत किया है. मौजूदा टूर्नामेंट में 266 रन बना चुके तिलक ने साफ कहा है कि लाल गेंद का क्रिकेट उनके लिए नया नहीं है, बल्कि यही उनका पसंदीदा प्रारूप और उनका ‘ए गेम’ है.

तिलक का यह दावा केवल बयान तक सीमित नहीं है. डुलेप ट्रॉफी में उनके बल्ले से निकली तीन पारियां—116 नाबाद, 51 नाबाद और 99 रन—बताती हैं कि वह लंबे प्रारूप में धैर्य के साथ बल्लेबाजी करने की क्षमता रखते हैं. टूर्नामेंट में वह फिलहाल सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं. उनसे आगे पूर्वी क्षेत्र के कप्तान ईशान किशन हैं, जिन्होंने 409 रन बनाए हैं.

सफेद गेंद से लाल गेंद की ओर बढ़ा तिलक का फोकस
टी-20 क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले तिलक वर्मा के लिए टेस्ट टीम में जगह बनाना एक अलग चुनौती है. सीमित ओवरों के क्रिकेट में बल्लेबाज से तेज रन बनाने की अपेक्षा होती है, जबकि लाल गेंद का क्रिकेट तकनीक, धैर्य, एकाग्रता और लंबे समय तक विकेट पर टिके रहने की परीक्षा लेता है.

तिलक का मौजूदा प्रदर्शन संकेत दे रहा है कि वह इस बदलाव के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं. डुलेप ट्रॉफी में उनकी पारियों में तेजी से रन बनाने के बजाय परिस्थिति के अनुरूप बल्लेबाजी करने का प्रयास दिखाई दिया. खासकर फाइनल में 211 गेंदों पर 99 रन की पारी इस बात का उदाहरण रही कि जरूरत पड़ने पर वह लंबे समय तक क्रीज पर टिककर पारी को संभाल सकते हैं.

तिलक ने कहा कि यह जरूरी नहीं कि लाल गेंद का क्रिकेट उन्हें स्वाभाविक रूप से आता हो, लेकिन उनके पेशेवर सफर की शुरुआत ही लाल गेंद से हुई थी. पिछले कुछ सत्रों में सफेद गेंद का क्रिकेट अधिक खेलने के बावजूद लाल गेंद उनके लिए पसंदीदा प्रारूप बना हुआ है.

99 रन की पारी ने दिखाई धैर्य की तस्वीर
डुलेप ट्रॉफी फाइनल में दक्षिण क्षेत्र की पहली पारी 336 रन पर सिमट गई. इसके जवाब में पूर्वी क्षेत्र ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दक्षिण क्षेत्र पर बड़ा दबाव बना दिया. ऐसे मुश्किल मुकाबले में दक्षिण क्षेत्र के लिए तिलक वर्मा ने मोर्चा संभाला.

उन्होंने 211 गेंदों का सामना करते हुए 99 रन बनाए और शतक से सिर्फ एक रन दूर रह गए. उनकी इस पारी में सबसे महत्वपूर्ण बात रन संख्या के साथ-साथ बल्लेबाजी का तरीका रहा. तिलक ने परिस्थितियों के अनुरूप धैर्य दिखाया और पारी को आगे बढ़ाने के लिए अनावश्यक जोखिम लेने से बचते रहे.

उनके अलावा देवदत्त पडिक्कल ने 104 गेंदों पर 62 रन बनाए, जबकि चामा वी मिलिंद ने 68 गेंदों पर 43 रन की उपयोगी पारी खेली. हालांकि इन प्रयासों के बावजूद दक्षिण क्षेत्र पूर्वी क्षेत्र के बड़े स्कोर की बराबरी करने की स्थिति में नहीं पहुंच सका.

तिलक बोले टीम की जरूरत के हिसाब से बदली बल्लेबाजी
99 रन की अपनी पारी को लेकर तिलक ने व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक टीम की जरूरत को प्राथमिकता देने की बात कही. उनका कहना था कि यह पारी उनके लिए महत्वपूर्ण थी, लेकिन बल्लेबाजी करते समय उनका ध्यान इस बात पर था कि टीम को उस समय किस तरह की बल्लेबाजी की जरूरत है.

उन्होंने पारी को छोटे-छोटे सत्रों में बांटकर खेलने की रणनीति अपनाई. तिलक के मुताबिक वह पहले ही अधिक जोखिम लेकर रन बना सकते थे, लेकिन उनका उद्देश्य सत्र दर सत्र बल्लेबाजी करते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाना था.

यह रवैया टेस्ट क्रिकेट के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है. लंबे प्रारूप में बल्लेबाज को सिर्फ रन बनाने की क्षमता नहीं बल्कि मैच की स्थिति को पढ़कर अपनी बल्लेबाजी की गति तय करने की जरूरत होती है. डुलेप ट्रॉफी में तिलक की मौजूदा बल्लेबाजी इसी पहलू की ओर ध्यान खींच रही है.

दक्षिण क्षेत्र के पास ड्रॉ का मौका था लेकिन विकेटों ने बिगाड़ा समीकरण
तिलक का मानना था कि यदि दक्षिण क्षेत्र कुछ और सत्रों तक साझेदारियों के साथ बल्लेबाजी कर पाता तो मुकाबले को ड्रॉ की ओर ले जाने की संभावना बन सकती थी. उनका कहना था कि यदि एक बल्लेबाज उनके साथ टिक जाता और टीम एक सत्र निकालने में सफल होती तो वे अगले सत्र की रणनीति पर आगे बढ़ सकते थे.

लेकिन लगातार विकेट गिरने से यह रणनीति सफल नहीं हो सकी. दक्षिण क्षेत्र की बल्लेबाजी बिखरने के साथ मुकाबला पूर्वी क्षेत्र के पक्ष में जाता गया. तिलक ने क्रिकेट की अनिश्चितता का उल्लेख करते हुए माना कि विकेट गिरने के कारण मैच का परिणाम दक्षिण क्षेत्र के हाथ से निकल गया.

पूर्वी क्षेत्र ने फाइनल में बनाई मजबूत पकड़
डुलेप ट्रॉफी फाइनल के चौथे दिन का खेल खत्म होने तक पूर्वी क्षेत्र ने मुकाबले पर पूरी तरह पकड़ बना ली थी. पहली पारी में 708 रन बनाने के बाद टीम ने दूसरी पारी में भी मजबूत बल्लेबाजी जारी रखी और दिन का खेल समाप्त होने तक 212 रन पर पांच विकेट बनाए.

इस तरह पूर्वी क्षेत्र की कुल बढ़त 584 रन तक पहुंच गई. स्टंप्स के समय कुमार कुशाग्र 55 गेंदों पर 34 रन बनाकर नाबाद थे, जबकि मोहम्मद कौनेन कुरैशी 30 गेंदों पर 26 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे. कुशाग्र ने तीन चौके लगाए, जबकि कुरैशी के बल्ले से दो चौके और एक छक्का निकला.

मुकाबले की स्थिति को देखते हुए पूर्वी क्षेत्र ने दक्षिण क्षेत्र के सामने बेहद चुनौतीपूर्ण लक्ष्य की स्थिति पैदा कर दी थी.

टेस्ट टीम की दावेदारी में घरेलू क्रिकेट बना आधार
तिलक वर्मा के लिए मौजूदा डुलेप ट्रॉफी प्रदर्शन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि टेस्ट टीम में जगह बनाने की राह घरेलू लाल गेंद क्रिकेट से होकर गुजरती है. अंतरराष्ट्रीय सफेद गेंद क्रिकेट में अनुभव होने के बावजूद टेस्ट टीम के लिए चयन में लंबे प्रारूप में निरंतरता और परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी.

ऐसे में 116 नाबाद, 51 नाबाद और 99 रन जैसी पारियां तिलक को चयन की दौड़ में अपनी दावेदारी पेश करने का अवसर देती हैं. खासकर फाइनल में 211 गेंदों तक बल्लेबाजी करना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण संकेत है.

हालांकि केवल डुलेप ट्रॉफी के प्रदर्शन के आधार पर टेस्ट टीम में चयन तय नहीं माना जा सकता. लेकिन तिलक ने यह जरूर दिखा दिया है कि वह लाल गेंद के क्रिकेट को गंभीरता से ले रहे हैं और इस प्रारूप में खुद को साबित करने के लिए तैयार हैं.

‘ए गेम’ बताने के पीछे है लंबी पारी खेलने का भरोसा
तिलक का यह कहना कि लाल गेंद उनका ‘ए गेम’ है, उनके क्रिकेट सफर के एक दूसरे पहलू को सामने लाता है. सीमित ओवरों में आक्रामक शॉट और तेज रन बनाने के लिए पहचाने जाने वाले बल्लेबाज की यह तस्वीर अब लंबे प्रारूप में धैर्य और नियंत्रण के साथ बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी के रूप में बदलने की कोशिश कर रही है.

डुलेप ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन इसी बदलाव की परीक्षा भी है और अवसर भी. 266 रन के साथ टूर्नामेंट में दूसरे सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज के रूप में तिलक ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है. अब उनकी नजर केवल एक और अच्छी पारी पर नहीं, बल्कि लगातार लाल गेंद क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित करने पर होगी.

टेस्ट टीम का दरवाजा अभी उनके लिए खुला है या नहीं, इसका फैसला चयनकर्ता करेंगे, लेकिन डुलेप ट्रॉफी में तिलक वर्मा ने अपनी तरफ से दस्तक जरूर दे दी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-