इंदौर के सांची पेड़ा प्लांट में मशीन फटने से टेक्नीशियन की मौत, तीन कर्मचारी घायल, गंदगी के बीच बन रहे थे पेड़े

इंदौर के सांची पेड़ा प्लांट में मशीन फटने से टेक्नीशियन की मौत, तीन कर्मचारी घायल, गंदगी के बीच बन रहे थे पेड़े

प्रेषित समय :21:52:03 PM / Fri, Sep 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

इंदौर. सांची के पेड़े बनाने वाले प्लांट में शुक्रवार को दर्दनाक हादसा हो गया. प्लांट में अचानक मशीन फटने से एक टेक्नीशियन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य कर्मचारी घायल हो गए. हादसे के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई. घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है. हादसे ने प्लांट में मशीनों की स्थिति और कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसी बीच प्लांट के अंदर की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद वहां खाद्य पदार्थ तैयार किए जाने की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

बताया जा रहा है कि प्लांट में लगी पुरानी और जर्जर मशीनों को लेकर कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं. कर्मचारियों ने मशीनों को बदलने की मांग भी की थी. इसके बावजूद मशीनों को बदले जाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई है. हादसे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि मशीनों की स्थिति को लेकर पहले से शिकायतें थीं तो उन्हें समय रहते ठीक क्यों नहीं कराया गया.

अचानक फटी मशीन, मौके पर मची अफरा-तफरी
सांची मिल्क संघ के पेड़ा प्लांट में रोजाना की तरह कर्मचारी काम में जुटे थे. इसी दौरान प्लांट में लगी एक मशीन अचानक फट गई. मशीन फटने की आवाज के साथ ही वहां काम कर रहे कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई. हादसे में एक टेक्नीशियन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य कर्मचारी घायल हो गए.

हादसे की सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारी और अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे. घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया. हादसे के बाद प्लांट में कामकाज प्रभावित हुआ. घटना की परिस्थितियों और मशीन के फटने के कारणों को लेकर जांच की जा रही है.

मशीन के अचानक फटने की घटना ने प्लांट में सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल खड़े किए हैं. औद्योगिक इकाइयों में मशीनों की नियमित जांच और रखरखाव महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित मशीन की स्थिति क्या थी और उसके रखरखाव के लिए किस स्तर पर कार्रवाई की गई थी.

छह महीने से पुरानी मशीनों को बदलने की मांग का दावा
हादसे के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार प्लांट में लगी पुरानी और जर्जर मशीनों को लेकर पिछले करीब छह महीने से शिकायतें की जा रही थीं. कर्मचारियों की ओर से प्रबंधन के सामने मशीनों को बदलने और नई मशीनें लगाने की मांग रखे जाने की बात कही जा रही है.

कर्मचारियों का कहना था कि पुरानी मशीनों के कारण काम के दौरान जोखिम बना रहता था. इसके बावजूद शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप है. शुक्रवार को मशीन फटने की घटना के बाद यह मामला एक बार फिर सामने आया है.

अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या मशीन की खराब स्थिति की जानकारी प्रबंधन को पहले से थी और यदि थी तो उसकी मरम्मत या उसे बदलने के लिए क्या कदम उठाए गए. हादसे की जांच में इन बिंदुओं को भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है.

हादसे के बाद सामने आईं प्लांट के अंदर की तस्वीरें
हादसे के बाद प्लांट के अंदर की कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं. इनमें प्लांट परिसर में पेड़े तैयार किए जाने वाले स्थानों पर गंदगी और अस्वच्छता दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. तस्वीरों ने सांची के उत्पादों की स्वच्छता और खाद्य पदार्थों के निर्माण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

पेड़े जैसे खाद्य पदार्थ तैयार करने वाले प्लांट में स्वच्छता का विशेष महत्व होता है. खाद्य पदार्थ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचते हैं, इसलिए निर्माण स्थल की साफ-सफाई, उपकरणों की स्वच्छता और कर्मचारियों के लिए निर्धारित मानकों का पालन आवश्यक है.

सामने आई तस्वीरों में यदि वास्तविक स्थिति वही है जो दिखाई दे रही है तो खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के लिए भी इसकी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है. यह पता लगाया जाना जरूरी होगा कि पेड़े तैयार करने वाले स्थान पर निर्धारित स्वच्छता मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं.

सांची की गुणवत्ता और शुद्धता के दावों पर उठे सवाल
प्लांट के अंदर की तस्वीरें सामने आने के बाद सांची के उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. सांची नाम उपभोक्ताओं के बीच दूध और उससे बने उत्पादों के लिए जाना जाता है. ऐसे में पेड़ा निर्माण इकाई के अंदर अस्वच्छता दिखाई देने का दावा उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा सकता है.

हालांकि तस्वीरों और वीडियो के आधार पर सामने आए दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों द्वारा प्लांट का निरीक्षण कर वहां की वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने पर ही यह स्पष्ट होगा कि निर्माण प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन हो रहा था या नहीं.

हादसे और तस्वीरों के सामने आने के बाद प्लांट की मशीनरी के साथ-साथ वहां तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता व्यवस्था की भी जांच की मांग उठ सकती है.

मशीनों के रखरखाव पर भी जांच की जरूरत
इस हादसे में एक कर्मचारी की मौत और तीन कर्मचारियों के घायल होने के बाद प्लांट की मशीनों के रखरखाव को लेकर जांच महत्वपूर्ण हो गई है. यदि किसी मशीन को लेकर पहले से शिकायतें थीं तो यह भी देखा जाना चाहिए कि शिकायत किस स्तर पर की गई थी और उस पर क्या कार्रवाई हुई.

औद्योगिक इकाइयों में मशीनों की समय-समय पर जांच, रखरखाव और खराब उपकरणों को बदलना कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है. मशीन में तकनीकी खराबी होने की स्थिति में समय रहते उसे काम से अलग करना भी जरूरी होता है.

ऐसे में हादसे की जांच में मशीन की तकनीकी स्थिति, उसके रखरखाव का रिकॉर्ड और कर्मचारियों द्वारा की गई शिकायतों सहित अन्य पहलुओं को शामिल किया जाना महत्वपूर्ण होगा.

तीन घायल कर्मचारियों का अस्पताल में उपचार जारी
मशीन फटने की घटना में घायल हुए तीन कर्मचारियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया. तीनों का उपचार जारी है. हादसे की गंभीरता को देखते हुए उनके स्वास्थ्य पर चिकित्सकों की निगरानी बनी हुई है.

वहीं, घटना में टेक्नीशियन की मौत से प्लांट के कर्मचारियों में भी शोक का माहौल है. काम के दौरान कर्मचारी की जान जाने से उसके परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है.

हादसे के साथ स्वच्छता व्यवस्था भी जांच के घेरे में
शुक्रवार की घटना ने सांची पेड़ा प्लांट को एक साथ दो गंभीर सवालों के सामने ला दिया है. पहला सवाल कर्मचारियों की सुरक्षा और पुरानी मशीनों के रखरखाव से जुड़ा है, जबकि दूसरा खाद्य पदार्थ तैयार किए जाने वाले स्थान की स्वच्छता व्यवस्था से संबंधित है.

एक ओर मशीन फटने से कर्मचारी की मौत और तीन लोगों के घायल होने की घटना है, वहीं दूसरी ओर प्लांट के अंदर की तस्वीरों ने खाद्य निर्माण प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं. ऐसे में संबंधित विभागों द्वारा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है.

जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि मशीन हादसे के पीछे तकनीकी कारण क्या था, क्या मशीन के संबंध में पहले शिकायतें मिली थीं और प्लांट में सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया जा रहा था. इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की जांच से यह भी सामने आ सकता है कि पेड़ा निर्माण स्थल पर स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं.

हादसे के बाद अब कर्मचारियों की सुरक्षा, मशीनों के रखरखाव और खाद्य पदार्थों के निर्माण में स्वच्छता जैसे तीनों पहलू जांच के केंद्र में आ गए हैं. मृत टेक्नीशियन और घायल कर्मचारियों के साथ हुई घटना ने प्लांट प्रबंधन की व्यवस्थाओं की समीक्षा की जरूरत भी सामने ला दी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-