पितृपक्ष मेले की उलटी गिनती शुरू, गयाजी में पितरों के मोक्ष के साथ बिछड़ों को मिलाने की भी हाईटेक तैयारी

पितृपक्ष मेले की उलटी गिनती शुरू, गयाजी में पितरों के मोक्ष के साथ बिछड़ों को मिलाने की भी हाईटेक तैयारी

प्रेषित समय :20:48:18 PM / Sat, Sep 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र/गयाजी. विश्वप्रसिद्ध धार्मिक, आध्यात्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक नगरी गयाजी में पितृपक्ष मेले की उलटी गिनती शुरू हो गई है. 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस महापर्व में देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. इस बार मेले की व्यवस्थाओं में परंपरागत धार्मिक आयोजन के साथ आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, आवागमन और ठहरने की व्यवस्था के साथ भीड़ में परिवार से बिछड़ जाने वाले बच्चों को तकनीक के माध्यम से उनके परिजनों तक पहुंचाने की विशेष व्यवस्था आकर्षण का केंद्र होगी.

जिला प्रशासन के अनुसार, पितृपक्ष मेला भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्दशी से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक चलेगा. इस दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु गयाजी में पिंडदान और तर्पण कर अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना करेंगे. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने मेला क्षेत्र को व्यवस्थित करने के लिए विभागवार जिम्मेदारियां तय कर दी हैं.

बिछड़े बच्चों को परिजनों से मिलाएगा क्यूआर कोड बैंड
पितृपक्ष मेले में हर वर्ष भारी भीड़ के कारण बच्चों के अपने परिवार से बिछड़ने की आशंका बनी रहती है. इस चुनौती से निपटने के लिए इस बार प्रशासन ने तकनीक आधारित व्यवस्था तैयार की है. बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर पहुंचने वाले बच्चों को विशेष क्यूआर कोड बैंड पहनाए जाएंगे.

इस बैंड में बच्चे के माता-पिता का नाम और संपर्क नंबर जैसी आवश्यक जानकारी दर्ज रहेगी. यदि भीड़ में बच्चा अपने परिवार से अलग हो जाता है तो पुलिसकर्मी, स्वयंसेवक अथवा कोई अन्य व्यक्ति अपने मोबाइल फोन से बैंड पर मौजूद क्यूआर कोड स्कैन कर उसके परिजनों से संपर्क कर सकेगा. इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को कम समय में सुरक्षित रूप से उनके परिवार तक पहुंचाना है.

प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को भी बहुस्तरीय बनाने की तैयारी की है. प्रमुख तालाबों और घाटों पर एसडीआरएफ की टीम तैनात रहेगी. आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए चौबीसों घंटे हेल्पलाइन और नियंत्रण कक्ष संचालित किया जाएगा.

सफाई से लेकर शौचालय तक व्यापक इंतजाम
लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए स्वच्छता व्यवस्था को विशेष प्राथमिकता दी गई है. पूरे नगर क्षेत्र को पांच जोन और 54 सेक्टर में बांटकर सफाई की जिम्मेदारी तय की गई है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 364 स्थायी शौचालय और 579 प्री-फैब्रिकेटेड अस्थायी शौचालय तैयार किए जा रहे हैं. इसके अलावा 134 स्नानागार और 74 चेंजिंग रूम भी उपलब्ध रहेंगे.

सड़कों को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम की ओर से 53 मार्गों तथा पथ निर्माण विभाग की ओर से 35 मुख्य सड़कों की मरम्मत कराई जा रही है. प्रशासन का प्रयास है कि मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो.

पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था
मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं. मेला क्षेत्र में 280 चापाकल, 54 प्याऊ और 890 नल उपलब्ध रहेंगे. इसके साथ ही 22 पानी के टैंकर और दो वाटर एटीएम की व्यवस्था की जा रही है.

प्रशासन का मानना है कि भीड़ के दबाव वाले क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बनाए रखना मेला प्रबंधन की प्रमुख चुनौती होगी. इसलिए स्थायी संसाधनों के साथ वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी गई है.

73 स्वास्थ्य शिविरों में डॉक्टरों की तैनाती
लाखों लोगों की मौजूदगी वाले मेले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी विशेष तैयारी की गई है. पूरे मेला क्षेत्र में 73 स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे. इन शिविरों में 125 डॉक्टर, 178 पैरामेडिकल कर्मचारी और 52 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात रहेंगे.

अचानक बीमार पड़ने वाले श्रद्धालुओं, बुजुर्गों और आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन का उद्देश्य है कि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध हो सके.

मुफ्त रिंग बस और ई-रिक्शा से आसान होगा सफर
भीड़ के बीच यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए इस बार परिवहन व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया है. श्रद्धालुओं के लिए 50 रिंग बसें और 150 ई-रिक्शा निशुल्क संचालित किए जाएंगे. इससे प्रमुख धार्मिक स्थलों, मेला क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों के बीच आवागमन आसान बनाने की कोशिश की गई है.

बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सहायता की व्यवस्था की गई है. स्काउट-गाइड, एनएसएस और एनसीसी के स्वयंसेवक व्हीलचेयर के माध्यम से ऐसे श्रद्धालुओं को पिंडवेदी तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे.

बच्चों की कला से बदलेगा गयाजी का रंग-रूप
पितृपक्ष मेले को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए प्रशासन ने शहर को आकर्षक बनाने की पहल भी की है. इसके तहत स्थानीय बच्चों की प्रतिभा को सामने लाने के लिए प्रतियोगिता आयोजित कर मेले का आधिकारिक लोगो चुना गया है. प्रतियोगिता में चुने गए नौ अन्य लोगो का इस्तेमाल भी मेले के प्रचार-प्रसार में किया जाएगा.

‘पेंट द सिटी’ अभियान के तहत बच्चों के 27 समूहों का चयन किया गया है. ये बच्चे शहर की दीवारों, घाटों और चौक-चौराहों पर गयाजी के धार्मिक और पौराणिक महत्व से जुड़ी कहानियों को चित्रों के माध्यम से उकेर रहे हैं. इससे शहर को नया दृश्य रूप देने के साथ बच्चों को अपनी रचनात्मकता दिखाने का अवसर भी मिल रहा है.

70 हजार लोगों के ठहरने की तैयारी
दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास की समस्या न हो, इसके लिए प्रशासन करीब 70 हजार लोगों की आवासन क्षमता तैयार कर रहा है. गांधी मैदान में करीब 2,500 बेड वाली विशाल टेंट सिटी तैयार की जा रही है. यहां श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था होगी.

इसके साथ ही कम कीमत पर भोजन उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई गई है. ‘जीविका दीदी’ की रसोई के माध्यम से श्रद्धालुओं को महज 25 रुपये में भरपेट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है. इसका उद्देश्य धार्मिक अनुष्ठान के लिए आने वाले सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को सस्ता भोजन उपलब्ध कराना है.

परंपरा और तकनीक का संगम
इस बार गयाजी का पितृपक्ष मेला केवल विशाल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक मेला प्रबंधन के उदाहरण के रूप में भी सामने लाने की तैयारी है. एक ओर पिंडदान, तर्पण और पितरों के मोक्ष की सदियों पुरानी परंपरा निभाई जाएगी, तो दूसरी ओर क्यूआर कोड बैंड, नियंत्रण कक्ष, आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, निशुल्क परिवहन और डिजिटल निगरानी जैसी तकनीकी सुविधाएं श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जाएंगी.

जिला प्रशासन का मुख्य लक्ष्य भीड़ के बीच श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण देना, धार्मिक अनुष्ठानों को सुगम बनाना और पूरे मेला क्षेत्र में स्वच्छता तथा यातायात व्यवस्था बनाए रखना है. 25 सितंबर से शुरू होने वाले पितृपक्ष मेले के लिए जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे गयाजी में तैयारियों की रफ्तार भी बढ़ती जा रही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-