वजन कम करने की कोशिश में केवल खानपान पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं माना जाता. नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और संतुलित भोजन के साथ योग को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है. योग शरीर को सक्रिय रखने, लचीलेपन और मांसपेशियों की ताकत पर काम करने तथा तनाव कम करने में मदद कर सकता है. हालांकि, केवल योग करने से वजन कम होने की गारंटी नहीं होती. वजन प्रबंधन के लिए कुल कैलोरी सेवन, शारीरिक गतिविधि, नींद और जीवनशैली का संतुलन महत्वपूर्ण होता है.
यदि कोई व्यक्ति घर से अपनी फिटनेस यात्रा शुरू करना चाहता है तो कुछ अपेक्षाकृत सरल योगासन शुरुआती दिनचर्या का हिस्सा बनाए जा सकते हैं. यहां बताए गए पांच आसनों को धीरे-धीरे और अपनी क्षमता के अनुसार किया जा सकता है. शुरुआत में कम समय और सहज गति रखना बेहतर है, जबकि अभ्यास बढ़ने के साथ अवधि और दोहराव बढ़ाए जा सकते हैं.
पहला कदम सूर्य नमस्कार से शरीर को करें सक्रिय
वजन प्रबंधन की दिनचर्या में सूर्य नमस्कार को शामिल किया जा सकता है. यह एक क्रम में किए जाने वाले कई योगासन और गतियों का संयोजन है. इससे शरीर के कई हिस्सों में एक साथ गतिविधि होती है और शरीर को वार्म-अप करने में भी मदद मिल सकती है.
स्टेप बाय स्टेप ऐसे करें
पैरों को साथ रखकर सीधे खड़े हों और दोनों हथेलियों को छाती के सामने नमस्कार की स्थिति में रखें.
सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर ले जाएं और शरीर को हल्का पीछे की ओर खींचें.
सांस छोड़ते हुए आगे झुकें और हाथों को पैरों के पास जमीन पर रखें.
एक पैर को पीछे ले जाएं और फिर दूसरा पैर भी पीछे ले जाकर शरीर को सीधी स्थिति में लाएं.
शरीर को नियंत्रित रखते हुए आगे की ओर बढ़ें और फिर भुजंगासन जैसी स्थिति में छाती को ऊपर उठाएं.
इसके बाद कूल्हों को ऊपर उठाकर अधोमुख श्वानासन की स्थिति में आएं.
फिर पैरों को आगे लाकर दोबारा आगे झुकने की स्थिति में आएं.
धीरे-धीरे ऊपर उठें और हाथों को ऊपर ले जाकर प्रारंभिक स्थिति में लौटें.
शुरुआत में कम चक्रों से अभ्यास किया जा सकता है. गति से ज्यादा सही मुद्रा और सांस पर ध्यान देना जरूरी है.
दूसरा कदम उत्कटासन से पैरों और शरीर को दें चुनौती
उत्कटासन को सामान्य भाषा में चेयर पोज भी कहा जाता है. इसमें शरीर ऐसी स्थिति में आता है जैसे व्यक्ति किसी काल्पनिक कुर्सी पर बैठ रहा हो. यह मुख्य रूप से पैरों और शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर काम करता है.
इसे ऐसे करें
सीधे खड़े होकर दोनों पैरों को आरामदायक दूरी पर रखें.
दोनों हाथों को सामने या सिर के ऊपर की ओर उठाएं.
घुटनों को मोड़ते हुए कूल्हों को पीछे की ओर ले जाएं.
शरीर को इस तरह नीचे लाएं जैसे कुर्सी पर बैठ रहे हों.
पीठ को यथासंभव सीधा रखें और वजन पैरों पर संतुलित रखें.
कुछ सेकंड सामान्य रूप से सांस लेते हुए इसी स्थिति में रहें.
फिर धीरे-धीरे घुटनों को सीधा करते हुए वापस खड़े हो जाएं.
शुरुआती व्यक्ति बहुत नीचे बैठने की कोशिश न करें. घुटनों या कमर में दर्द होने पर इस अभ्यास को रोक देना चाहिए.
तीसरा कदम वीरभद्रासन से बढ़ाएं ताकत और संतुलन
वीरभद्रासन-2 शरीर के निचले हिस्से को सक्रिय करने के साथ संतुलन और स्थिरता पर भी काम करता है. लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने के बजाय इसे नियंत्रित तरीके से करना महत्वपूर्ण है.
स्टेप बाय स्टेप
सीधे खड़े होकर दोनों पैरों को कुछ दूरी पर खोलें.
दायां पैर बाहर की ओर मोड़ें और बाएं पैर को थोड़ा अंदर की ओर रखें.
दोनों हाथों को कंधों की ऊंचाई पर फैलाएं.
दाएं घुटने को मोड़ें और उसे पैर की दिशा में रखें.
बायां पैर जमीन पर मजबूती से टिकाए रखें.
सामने की ओर देखते हुए कुछ सांसों तक मुद्रा में रहें.
धीरे-धीरे पैर सीधा करें और दूसरी तरफ यही प्रक्रिया दोहराएं.
इस आसन में घुटने को पैर के पंजे की दिशा में रखना जरूरी है. शरीर को अपनी क्षमता से अधिक नीचे ले जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.
चौथा कदम प्लैंक मुद्रा से मजबूत करें पूरा शरीर
योग में फलकासन या प्लैंक मुद्रा शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से को स्थिर रखने की क्षमता पर काम करती है. इसे करते समय पेट और शरीर के मध्य भाग की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं.
ऐसे करें अभ्यास
घुटनों के बल आकर दोनों हथेलियों को कंधों के नीचे जमीन पर रखें.
एक-एक करके दोनों पैरों को पीछे ले जाएं.
शरीर को सिर से एड़ी तक लगभग सीधी रेखा में रखें.
पेट को हल्का अंदर की ओर सक्रिय रखते हुए सामान्य सांस लें.
कंधों को हथेलियों के ऊपर स्थिर रखें.
शुरुआत में थोड़े समय के लिए मुद्रा बनाए रखें.
धीरे-धीरे घुटनों को जमीन पर लाकर आराम करें.
शुरुआती लोग घुटनों को जमीन पर रखकर इसका आसान संस्करण कर सकते हैं. कलाई, कंधे या कमर में परेशानी होने पर इसे विशेषज्ञ की देखरेख में करना बेहतर है.
पांचवां कदम नौकासन से पेट और शरीर के मध्य हिस्से पर काम
नौकासन योग की ऐसी मुद्रा है जिसमें शरीर नाव जैसी आकृति बनाता है. इसे करते समय पेट और शरीर के मध्य हिस्से की मांसपेशियों को सक्रिय रखना पड़ता है. इसे अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए.
स्टेप बाय स्टेप
पीठ के बल जमीन पर बैठने की स्थिति से शुरुआत करें और पैरों को सामने फैलाएं.
घुटनों को हल्का मोड़ें.
शरीर को थोड़ा पीछे की ओर झुकाएं.
धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाने की कोशिश करें.
हाथों को सामने की ओर फैलाएं और शरीर को संतुलित रखने का प्रयास करें.
पीठ को बहुत ज्यादा गोल न करें और सांस सामान्य रखें.
कुछ सेकंड रुकने के बाद धीरे-धीरे पैरों को नीचे लाएं और आराम करें.
शुरुआती लोग पैरों को पूरी तरह सीधा उठाने के बजाय घुटनों को मोड़कर अभ्यास कर सकते हैं. कमर में दर्द होने पर इस आसन को करने से बचना चाहिए.
पांचों आसनों को एक रूटीन में कैसे जोड़ें
इन अभ्यासों को एक साथ करते समय शुरुआत में शरीर को अचानक ज्यादा दबाव देने की जरूरत नहीं है. पहले कुछ मिनट हल्का वार्म-अप किया जा सकता है. इसके बाद सूर्य नमस्कार के कुछ चक्र, उत्कटासन, वीरभद्रासन-2, फलकासन और अंत में नौकासन किया जा सकता है.
शुरुआती व्यक्ति हर आसन को अपनी क्षमता के अनुसार कम समय तक करें. जैसे-जैसे शरीर अभ्यास का अभ्यस्त होता जाए, मुद्रा बनाए रखने का समय या सूर्य नमस्कार के चक्र धीरे-धीरे बढ़ाए जा सकते हैं.
योग के बाद कुछ मिनट आराम और सामान्य श्वास के लिए देना भी उपयोगी हो सकता है. पूरे अभ्यास के दौरान सांस रोकने के बजाय सहज सांस लेना बेहतर है.
सिर्फ योग नहीं भोजन और नींद पर भी दें ध्यान
वजन कम करने के लिए योग को किसी जादुई उपाय के रूप में देखना सही नहीं होगा. यदि भोजन में जरूरत से ज्यादा कैलोरी ली जा रही है और पूरे दिन शारीरिक गतिविधि बहुत कम है तो केवल कुछ मिनट योग करने से अपेक्षित वजन घटाना मुश्किल हो सकता है.
इसलिए योग के साथ संतुलित भोजन, पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर वाले खाद्य पदार्थ, नियमित चलना या अन्य शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद को दिनचर्या का हिस्सा बनाना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुरुआत बहुत कठिन लक्ष्य से न की जाए. नियमित रूप से किया गया मध्यम स्तर का अभ्यास अक्सर उस रूटीन से ज्यादा टिकाऊ हो सकता है जिसे कुछ दिनों तक बहुत ज्यादा मेहनत के बाद छोड़ दिया जाए.
सावधानी के साथ करें शुरुआत
हर योगासन हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होता. घुटने, कमर, कंधे या कलाई से जुड़ी समस्या वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. गर्भावस्था, हाल की सर्जरी, गंभीर स्वास्थ्य समस्या या लंबे समय से चल रही किसी बीमारी की स्थिति में योग शुरू करने से पहले चिकित्सक या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है.
दर्द को सामान्य खिंचाव समझकर अभ्यास जारी नहीं रखना चाहिए. चक्कर, तेज दर्द, सांस लेने में परेशानी या असहजता महसूस होने पर तुरंत अभ्यास रोकना चाहिए.
वजन घटाने की यात्रा में लक्ष्य केवल तराजू पर संख्या कम करना नहीं, बल्कि ऐसी स्वस्थ दिनचर्या बनाना होना चाहिए जिसे लंबे समय तक निभाया जा सके. योग इस यात्रा का एक हिस्सा बन सकता है, लेकिन संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और निरंतरता मिलकर ही स्वस्थ वजन प्रबंधन की मजबूत नींव तैयार करते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

