जबलपुर आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के विखंडन पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को नोटिस

जबलपुर आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के विखंडन पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को नोटिस

प्रेषित समय :17:49:11 PM / Tue, Sep 15th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के पुनर्गठन और उसके बड़े हिस्से को अलग कर उज्जैन में नई धन्वंतरि विश्वविद्यालय स्थापित करने के राज्य सरकार के निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है. मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिकाकर्ताओं ने 21 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित संशोधन अधिनियम और मध्य प्रदेश धन्वंतरि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए हैं.

जबलपुर के हिस्से में केवल 16 कॉलेज रह जाने का दावा
याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित पुनर्गठन के बाद उज्जैन स्थित नई धन्वंतरि विश्वविद्यालय के अधीन छह संभाग, 31 जिले और 80 में से 64 चिकित्सा महाविद्यालय चले जाएंगे. इसके विपरीत मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के हिस्से में चार संभाग, 24 जिले और केवल 16 कॉलेज रह जाएंगे.

याचिकाकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव ने इस व्यवस्था को असमान और भेदभावपूर्ण बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत बताया है. उनका तर्क है कि विश्वविद्यालय के पुनर्गठन का स्वरूप ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे मौजूदा विश्वविद्यालय के संसाधनों और संस्थागत क्षमता का बड़ा हिस्सा अलग हो जाए.

250 करोड़ रुपये के रिजर्व फंड पर भी आपत्ति
याचिका में मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध करीब 250 करोड़ रुपये के रिजर्व फंड को उज्जैन की प्रस्तावित नई विश्वविद्यालय में स्थानांतरित किए जाने पर भी सवाल उठाया गया है. याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि जब विश्वविद्यालय के पुनर्गठन और संपत्तियों के हस्तांतरण की वैधानिकता ही न्यायिक परीक्षण के अधीन है, तब रिजर्व फंड के हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए.

याचिका में इस राशि के हस्तांतरण पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की गई है. इसके अलावा विश्वविद्यालय की संपत्तियों, संसाधनों और अन्य वित्तीय मदों के विभाजन को लेकर भी न्यायालय के समक्ष आपत्तियां रखी गई हैं.

विशेषज्ञ अध्ययन के बिना निर्णय लेने का आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय के इतने बड़े स्तर पर पुनर्गठन का निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञों से पर्याप्त अध्ययन नहीं कराया गया. याचिका में व्यवहार्यता रिपोर्ट, विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के अभाव का भी उल्लेख किया गया है.

याचिकाकर्ताओं ने सरकार से निर्णय से संबंधित मंत्रिमंडल नोट, विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और अन्य अभिलेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराने की मांग की है. उनका कहना है कि विश्वविद्यालय के विखंडन का असर विद्यार्थियों, चिकित्सा महाविद्यालयों, कर्मचारियों और विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ेगा, इसलिए निर्णय के सभी पहलुओं की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है.

सरकार के जवाब से तय होगी मामले की अगली दिशा
याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. अब सरकार के जवाब और उसके द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर मामले की आगे की सुनवाई होगी.

मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के अधिकार क्षेत्र और संसाधनों में बड़ा बदलाव होगा. फिलहाल हाई कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद सरकार का पक्ष सामने आना बाकी है, जिसके बाद विश्वविद्यालय के पुनर्गठन, वित्तीय संसाधनों और नई धन्वंतरि विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़े मुद्दों पर न्यायालय आगे विचार करेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-