जबलपुर. शहर की हरित धरोहर और वन्यजीवों के महत्वपूर्ण आश्रय स्थल डुमना नेचर पार्क को प्रदूषण से बचाने के लिए नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है. आईआईआईटीडीएम परिसर से डुमना नेचर पार्क की ओर गंदा पानी बहने की शिकायत के बाद नगर निगम की संयुक्त टीम ने संस्थान का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान जल निकासी और सीवेज व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता सामने आने पर मौके पर ही सुधारात्मक कार्य शुरू कराया गया. साथ ही नगर निगम की स्वास्थ्य शाखा ने संस्थान पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है.
नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार के निर्देश पर जल विभाग, अमृत योजना, सीवेज शाखा, स्वास्थ्य विभाग और उद्यान विभाग की संयुक्त टीम ने आईआईआईटीडीएम परिसर का निरीक्षण किया. टीम ने संस्थान के दोनों परिसरों में पानी की निकासी, ड्रेनेज और सीवेज के बहाव की स्थिति को देखा.
निरीक्षण के दौरान संस्थान के डिप्टी रजिस्ट्रार, सुरक्षा अधिकारी, हॉस्टल वार्डन और सिविल इंजीनियर भी मौजूद रहे. अधिकारियों ने परिसर की भौगोलिक स्थिति और जल निकासी की दिशा को समझते हुए यह देखा कि कहीं सीवेज या गंदा पानी डुमना के संवेदनशील वन क्षेत्र की ओर तो नहीं पहुंच रहा है.
डुमना क्षेत्र में गंदे पानी के बहाव पर एक लाख का जुर्माना
नगर निगम ने संवेदनशील वन क्षेत्र में गंदे पानी के संभावित बहाव को गंभीरता से लेते हुए आईआईआईटीडीएम पर एक लाख रुपये का चालान अधिरोपित किया. कार्रवाई का उद्देश्य केवल अर्थदंड लगाना नहीं, बल्कि सीवेज के निस्तारण की व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त कराना भी बताया गया है.
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया कि डुमना नेचर पार्क जैसे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी संस्था का अपशिष्ट या सीवेज बिना उचित उपचार के पहुंचना स्वीकार नहीं किया जाएगा.
कार्रवाई के साथ मौके पर ही शुरू हुआ ड्रेनेज सुधार
नगर निगम की कार्रवाई के बाद संस्थान परिसर में ड्रेनेज और सीवेज व्यवस्था को सुधारने का काम तत्काल शुरू कराया गया. अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि परिसर से निकलने वाला पानी नियंत्रित व्यवस्था के माध्यम से ही आगे जाए और किसी भी स्थिति में अनुपचारित पानी वन क्षेत्र की ओर न पहुंचे.
इस पूरी प्रक्रिया को केवल तात्कालिक सुधार तक सीमित रखने के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है.
नगर निगम ने संस्थान को परिसर में सीवेज के वैज्ञानिक उपचार की स्थायी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए आधुनिक क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया जाएगा.
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य परिसर में उत्पन्न होने वाले सीवेज का शत-प्रतिशत उपचार करना है. उपचार के बाद पानी के उपयोग और निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि डुमना क्षेत्र में किसी भी तरह का अनुपचारित जल प्रवाह न हो.
नगर निगम ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जल प्रदूषण से संबंधित प्रावधानों के तहत संस्थान को समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं.
नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू जीरो लिक्विड डिस्चार्ज व्यवस्था विकसित करना है. इसका उद्देश्य यह है कि संस्थान से निकलने वाले अपशिष्ट जल को बिना उपचार के बाहर जाने की स्थिति ही न बने.
इसके लिए सीवेज संग्रहण, उपचार और पुन: उपयोग की व्यवस्था को व्यवस्थित किया जाना प्रस्तावित है. यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो परिसर के अपशिष्ट जल का पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव कम किया जा सकेगा.
भूजल और वन्यजीवों की सुरक्षा पर नजर
डुमना नेचर पार्क केवल शहर के लिए हरित क्षेत्र नहीं है, बल्कि यहां मौजूद वनस्पतियों, जलस्रोतों और वन्यजीवों के कारण इसका पर्यावरणीय महत्व भी है. ऐसे क्षेत्र में अनुपचारित सीवेज का प्रवेश भूजल, मिट्टी और प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रभावित कर सकता है.
नगर निगम की कार्रवाई का उद्देश्य इसी संभावित खतरे को रोकना है. प्रशासन ने संकेत दिया है कि डुमना सहित शहर के अन्य संवेदनशील हरित क्षेत्रों में अपशिष्ट और सीवेज प्रबंधन की व्यवस्था पर निगरानी जारी रहेगी.
आईआईआईटीडीएम पर की गई कार्रवाई को बड़े संस्थानों और बल्क वेस्ट जनरेटर के लिए भी एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है. नगर निगम का जोर इस बात पर है कि बड़े परिसरों में उत्पन्न होने वाले ठोस और तरल अपशिष्ट के निस्तारण के लिए संस्थान अपने स्तर पर वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था विकसित करें.
डुमना नेचर पार्क की सुरक्षा के मामले में नगर निगम ने साफ कर दिया है कि विकास और संस्थागत गतिविधियों के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी की अनदेखी नहीं की जा सकती. एक लाख रुपये के अर्थदंड के साथ तत्काल सुधार कार्य शुरू कराना इसी दिशा में उठाया गया कदम है.
कार्रवाई के दौरान अपर आयुक्त सौरभ मिश्रा, अधीक्षण यंत्री कमलेश श्रीवास्तव, स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा और उद्यान अधिकारी मनीष तड़से सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

