इंदौर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में इंदौर में तैयार की गई ‘संघ अनुभव शाला’ को केवल एक प्रदर्शनी के रूप में नहीं, बल्कि संगठन की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा, कार्यपद्धति और उससे जुड़े विचारों को एक ही स्थान पर प्रस्तुत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. सुदर्शन भवन स्थित डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति परिसर में शुक्रवार शाम सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने इसका लोकार्पण किया. उन्होंने अनुभवशाला को संघ को समझने का माध्यम बताते हुए कहा कि संगठन को जानने के लिए केवल जानकारी पर्याप्त नहीं, अनुभव भी जरूरी है.
तीन सवालों से शुरू होगी अनुभवशाला की यात्रा
अनुभवशाला की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहां आने वाले व्यक्ति के सामने संघ से जुड़े तीन मूल प्रश्न रखे गए हैं—संघ क्या है, इसकी स्थापना क्यों हुई और यह किस प्रकार कार्य करता है. आयोजकों के अनुसार इन सवालों के जवाब पारंपरिक भाषण या पुस्तकीय विवरण के बजाय चित्रों, आलेखों, वीडियो और आधुनिक तकनीक के माध्यम से देने का प्रयास किया गया है. इससे प्रदर्शनी को केवल देखने के बजाय विषय को क्रम से समझने की संरचना तैयार की गई है.
प्राचीन भारत से शुरू होकर शताब्दी यात्रा तक पहुंचता है क्रम
प्रदर्शनी की शुरुआत भारत की प्राचीन सभ्यता और ज्ञान परंपरा से की गई है. इसके बाद संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि, उसके क्रमिक विस्तार और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों को अलग-अलग माध्यमों से प्रस्तुत किया गया है. इस पूरी संरचना में संघ की सौ वर्ष की यात्रा को एक क्रम में जोड़ने का प्रयास किया गया है, ताकि आगंतुक घटनाओं और गतिविधियों को अलग-अलग हिस्सों में देखने के बजाय एक निरंतर यात्रा के रूप में समझ सकें.
तकनीक के जरिए इतिहास को देखने का प्रयास
अनुभवशाला में वीडियो गैलरी, चित्र और आलेखों के साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है. इसका उद्देश्य खासतौर पर उन लोगों तक सामग्री को सहज रूप में पहुंचाना है, जो लंबे दस्तावेज पढ़ने के बजाय दृश्य माध्यमों से किसी विषय को समझना पसंद करते हैं. आयोजकों ने इसे ऐसी व्यवस्था के रूप में तैयार किया है, जिसमें संगठन के इतिहास और गतिविधियों को एक सीमित स्थान में अलग-अलग दृश्य माध्यमों के जरिये प्रस्तुत किया जा सके.
पंच परिवर्तन को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ने की कोशिश
अनुभवशाला में संघ द्वारा बताए गए ‘पंच परिवर्तन’ के पांच आयामों को भी स्थान दिया गया है. इनमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं. आयोजकों के अनुसार इन विषयों को केवल संगठनात्मक विचार के रूप में रखने के बजाय दैनिक जीवन से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है. इसका उद्देश्य आगंतुकों को इन अवधारणाओं के सामाजिक और व्यक्तिगत संदर्भों से परिचित कराना है.
भागवत ने कहा अनुभव से समझा जा सकता है संघ
लोकार्पण के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने अनुभवशाला की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि संघ को समझने के लिए उसके कार्यालय और कार्यक्रमों के वातावरण को प्रत्यक्ष देखना भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के अनुसार बदलने की क्षमता के साथ संघ की कुछ बातें अपरिवर्तनीय हैं और इन्हें समझने के लिए अनुभव आवश्यक है. उन्होंने अनुभवशाला को सीमित स्थान में संघ की यात्रा को समेटने वाला प्रयोग बताया.
भागवत ने यह भी कहा कि संघ का अनुभव उसके किसी कार्यक्रम में तीन-चार दिन साथ रहकर प्राप्त किया जा सकता है. उनके अनुसार अनुभवशाला इसी प्रत्यक्ष अनुभव को एक स्थान पर उपलब्ध कराने का प्रयास है. उन्होंने इसे ‘गागर में सागर’ के समान बताया.
नई पीढ़ी तक पहुंच बनाने पर जोर
आयोजकों के अनुसार अनुभवशाला के पीछे एक उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की संस्कृति और ज्ञान परंपरा से परिचित कराना भी है. संघ की शताब्दी के दौरान देशभर में हुए संपर्क और संवाद कार्यक्रमों के बाद इस प्रदर्शनी को उसी यात्रा का एक स्थायी माध्यम बताया गया है. यहां संघ की कार्यपद्धति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी, सेवा और नागरिक कर्तव्य से जुड़े विषयों को भी प्रस्तुत किया गया है.
निर्माण में योगदान देने वालों का हुआ सम्मान
लोकार्पण कार्यक्रम में अनुभवशाला के निर्माण में योगदान देने वाले निर्माताओं और सहयोगियों का सम्मान किया गया. कार्यक्रम में मालवा प्रांत के संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री, इंदौर विभाग संघचालक मुकेश मोढ, डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के अध्यक्ष ईश्वर हिंदुजा सहित अन्य पदाधिकारी और स्वयंसेवक उपस्थित रहे. संचालन समिति के उमेश वर्मा ने किया तथा सचिव राकेश यादव ने आभार व्यक्त किया.
27 सितंबर से आम लोगों के लिए खुलेगी
लोकार्पण के बाद अब अनुभवशाला को आम लोगों के लिए खोलने की तैयारी है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार 27 सितंबर से इसका निःशुल्क अवलोकन किया जा सकेगा और यह प्रतिदिन सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक खुली रहेगी. प्रदर्शनी स्थल पर संघ साहित्य के साथ भारतीय संस्कृति से संबंधित सामग्री उपलब्ध कराने की भी जानकारी दी गई है.
इस तरह इंदौर में तैयार हुई यह अनुभवशाला संघ के लिए केवल शताब्दी वर्ष की एक गतिविधि नहीं, बल्कि उसकी सौ वर्ष की यात्रा को स्थायी प्रदर्शनी के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है. इसके माध्यम से संगठन स्वयं को किस तरह देखता है, उसकी कार्यपद्धति को किस क्रम में प्रस्तुत करता है और सामाजिक जीवन से जुड़े किन विषयों को प्रमुखता देता है—इन सभी पहलुओं को एक ही परिसर में देखने का अवसर आम आगंतुकों को मिलेगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

