मुंबई. एंजल वन के संस्थापक, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक दिनेश ठक्कर ने मुंबई के जुहू स्थित एम्बेसी टेराजा प्रोजेक्ट का पूरा रिहायशी टावर करीब 711 करोड़ रुपये में खरीदने का समझौता किया है. इसे भारत की सबसे बड़ी एकल आवासीय संपत्ति डील बताया जा रहा है.
दिनेश ठक्कर ने एम्बेसी डेवलपमेंट्स के जुहू स्थित अल्ट्रा-लक्जरी प्रोजेक्ट एम्बेसी टेराजा में पूरा जी प्लस सात मंजिला टावर खरीदा है. इसकी रेरा कारपेट एरिया करीब 63 हजार वर्गफुट है और सौदे का मूल्य लगभग 711 करोड़ रुपये बताया गया है. परियोजना जुहू तारा रोड पर स्थित है.
एम्बेसी डेवलपमेंट्स के अनुसार, यह भारत में किसी एक आवासीय इकाई से जुड़ा सबसे बड़ा घोषित लेन-देन है. परियोजना दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली है और इसमें करीब 50 आवासीय इकाइयां हैं. पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित सकल विकास कीमत 3,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है.
12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ी, कारोबार में उतरे
दिनेश ठक्कर का जन्म मुंबई के मुलुंड में कपड़ा कारोबार से जुड़े परिवार में हुआ. उन्होंने ठाणे के सेंट जॉन द बैपटिस्ट हाई स्कूल में पढ़ाई की और बाद में मुंबई के किशिनचंद चेलाराम कॉलेज में विज्ञान की पढ़ाई शुरू की. हालांकि उन्होंने औपचारिक उच्च शिक्षा पूरी नहीं की और 12वीं के बाद कारोबार की ओर रुख किया.
एंजल वन के पुराने आधिकारिक दस्तावेजों में भी दर्ज है कि ठक्कर ने महाराष्ट्र बोर्ड की हायर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण की थी. कंपनी के अनुसार उन्हें ब्रोकिंग उद्योग में 25 वर्ष से अधिक का अनुभव था.
परिवार के कपड़ा कारोबार से शेयर बाजार तक
ठक्कर ने शुरुआत में परिवार के कपड़ा कारोबार में काम किया, लेकिन बाद में शेयर बाजार की ओर आकर्षित हुए. शुरुआती दौर में उन्होंने दोस्तों से पैसा उधार लेकर बाजार में निवेश किया. शुरुआती अनुभव आसान नहीं रहा और उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने केवल निवेश करने के बजाय शेयर ब्रोकिंग कारोबार को समझने पर ध्यान दिया.
रिटेल निवेशकों को शेयर बाजार से जोड़ने के लिए उस समय ब्रोकिंग कारोबार में तकनीक का इस्तेमाल आज की तरह सामान्य नहीं था. ठक्कर ने इसी क्षेत्र में अवसर तलाशे और अपना कारोबार खड़ा करना शुरू किया.
1996 में रखी एंजल वन की नींव
एंजल वन की स्थापना 8 अगस्त 1996 को हुई थी. कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड में दिनेश डी. ठक्कर को संस्थापक, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के रूप में दर्ज किया गया है. कंपनी की शुरुआत पारंपरिक स्टॉक ब्रोकिंग कारोबार के रूप में हुई थी.
समय के साथ कंपनी ने अपने कारोबार को डिजिटल वित्तीय सेवाओं की दिशा में बदला. एंजल वन के मुताबिक ठक्कर का उद्देश्य ऐसी कंपनी तैयार करना था जिसमें पारदर्शिता, तकनीक और ग्राहक-केंद्रित सेवाओं पर जोर हो.
पारंपरिक ब्रोकर से डिजिटल वित्तीय कंपनी तक का सफर
एंजल वन ने बाद के वर्षों में तकनीक आधारित निवेश सेवाओं पर जोर बढ़ाया. कंपनी अक्टूबर 2020 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई. आज इसका कारोबार केवल पारंपरिक शेयर ब्रोकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल निवेश और वित्तीय सेवाओं तक फैला हुआ है.
दिनेश ठक्कर अब भी कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हैं. एंजल वन की वेबसाइट उन्हें कंपनी के प्रमुख निर्णयकर्ताओं में शामिल करती है.
711 करोड़ की डील से कंपनी के शेयर भी चर्चा में
ठक्कर के साथ 711 करोड़ रुपये के समझौते की घोषणा के बाद एम्बेसी डेवलपमेंट्स के शेयरों में भी तेजी देखी गई. मंगलवार के कारोबार में कंपनी के शेयर करीब 8 प्रतिशत तक चढ़े थे.
यह सौदा ऐसे समय हुआ है जब मुंबई के प्रीमियम और अल्ट्रा-लक्जरी आवासीय बाजार में बेहद महंगी संपत्तियों की मांग चर्चा में है. जुहू जैसे इलाकों में समुद्र के सामने स्थित बड़ी निजी संपत्तियों की कीमतें पहले से ही देश के सबसे महंगे आवासीय बाजारों में शामिल हैं.
63 हजार वर्गफुट में समुद्र और शहर का नजारा
एम्बेसी टेराजा को कम घनत्व वाला अल्ट्रा-लक्जरी आवासीय प्रोजेक्ट बताया गया है. इसमें प्रत्येक मंजिल पर एक आवासीय इकाई की योजना है. परियोजना में समुद्र और शहर के व्यापक दृश्य, आंतरिक हरियाली तथा लाइफस्टाइल और वेलनेस सुविधाएं शामिल हैं.
दिनेश ठक्कर के लिए खरीदा गया पूरा टावर इसी वजह से सामान्य लग्जरी अपार्टमेंट से अलग है. यह एक पूरी आवासीय इमारत है, जिसमें कई मंजिलों पर आवासीय स्थान शामिल हैं.
शेयर बाजार से रियल एस्टेट तक बढ़ता दायरा
दिनेश ठक्कर की पहचान मुख्य रूप से शेयर ब्रोकिंग उद्योग से रही है. 1990 के दशक में शुरू हुआ उनका कारोबार अब एक सूचीबद्ध डिजिटल वित्तीय सेवा कंपनी में बदल चुका है. 711 करोड़ रुपये की यह संपत्ति खरीद अब उनके नाम को देश के सबसे बड़े निजी आवासीय सौदों में भी जोड़ रही है.
इस सौदे में एक तरफ एंजल वन के संस्थापक के कारोबारी सफर की कहानी है, तो दूसरी तरफ मुंबई के अल्ट्रा-लक्जरी रियल एस्टेट बाजार में बढ़ते बड़े टिकट वाले लेन-देन की तस्वीर भी सामने आती है. वर्तमान रिपोर्टों के अनुसार करीब 711 करोड़ रुपये की यह डील भारत की सबसे बड़ी ज्ञात एकल आवासीय संपत्ति खरीद के रूप में सामने आई है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

