पितृ पक्ष 2026 आज से शुरू, पूर्वजों के तर्पण और श्राद्ध के लिए 16 दिनों तक रहेगा विशेष काल

पितृ पक्ष 2026 आज से शुरू, पूर्वजों के तर्पण और श्राद्ध के लिए 16 दिनों तक रहेगा विशेष काल

प्रेषित समय :19:48:10 PM / Sat, Sep 26th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

सनातन परंपरा में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और स्मरण का विशेष अवसर माना गया है. भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलने वाले इस पक्ष में परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं. मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्रद्धापूर्वक किए गए कर्मों के माध्यम से पूर्वजों का स्मरण और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है.

हिंदू पंचांग के अनुसार 26 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष का प्रारंभ हो रहा है. इसका समापन 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को अमावस्या श्राद्ध और पितृ विसर्जन के साथ होगा. इस अवधि में अलग-अलग तिथियों के अनुसार उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनका निधन संबंधित तिथि को हुआ हो.

देव आराधना के साथ पितृ स्मरण की परंपरा
भारतीय धार्मिक परंपरा में वर्षभर विभिन्न देवी-देवताओं की आराधना की जाती है, लेकिन सनातन संस्कृति में पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है. मान्यता है कि मनुष्य अपने जीवन, संस्कार और परिवार की परंपराओं का उत्तराधिकारी होता है और उसके पीछे अनेक पीढ़ियों का योगदान रहता है.

इसी भाव को पितृ पक्ष में विशेष रूप से अभिव्यक्त किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार शुभ कार्यों से पहले भी पितरों का स्मरण नांदी श्राद्ध के माध्यम से किया जाता है. वहीं पितृ पक्ष को दिवंगत पूर्वजों के निमित्त विशेष कर्म करने का समय माना गया है.

जिस तिथि को निधन उसी तिथि पर श्राद्ध
पितृ पक्ष की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है निधन की तिथि के अनुसार श्राद्ध करना. धार्मिक मान्यता के अनुसार वर्ष में जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उसके निमित्त श्राद्ध किया जाता है.

भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध विशेष रूप से उन पितरों के लिए माना जाता है, जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ हो. वहीं जिन पूर्वजों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए पितृ पक्ष की अमावस्या को श्राद्ध करने की परंपरा बताई गई है.

इस व्यवस्था के कारण पितृ पक्ष के प्रत्येक दिन का धार्मिक महत्व अलग-अलग माना जाता है.

तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध में क्या अंतर
पितृ पक्ष के दौरान तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे शब्द बार-बार सुनने को मिलते हैं. तीनों का धार्मिक भाव अलग-अलग माना गया है.

तर्पण में जल अर्पित कर पितरों का स्मरण किया जाता है. इसे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और जल अर्पण का कर्म माना जाता है.

पिंडदान में पितरों के निमित्त पिंड अर्पित किए जाते हैं. धार्मिक परंपरा में इसे पूर्वजों के प्रति अन्न और पोषण के भाव से जोड़ा गया है.

श्राद्ध का मूल भाव श्रद्धा से जुड़ा है. धार्मिक व्याख्या में श्रद्धा से अर्पित किए जाने वाले कर्म और सामग्री को श्राद्ध कहा गया है. इसलिए श्राद्ध केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा के रूप में देखा जाता है.

महर्षि निमि से जुड़ी है श्राद्ध की प्राचीन परंपरा
श्राद्ध कर्म की शुरुआत को लेकर धार्मिक ग्रंथों में विभिन्न प्रसंग मिलते हैं. महाभारत में भीष्म पितामह द्वारा युधिष्ठिर को श्राद्ध कर्म की परंपरा और उसके महत्व के बारे में बताए जाने का उल्लेख मिलता है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार महर्षि अत्रि ने महर्षि निमि को श्राद्ध कर्म का ज्ञान दिया था. इसके बाद महर्षि निमि ने अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध किया और धीरे-धीरे यह परंपरा अन्य ऋषियों तक पहुंची. कालांतर में पूर्वजों के सम्मान और स्मरण की यह परंपरा व्यापक रूप से प्रचलित हुई.

पितृ पक्ष 2026 की प्रमुख तिथियां
पितृ पक्ष के दौरान इस वर्ष श्राद्ध की तिथियां इस प्रकार बताई गई हैं-

26 सितंबर 2026, शनिवार — पूर्णिमा श्राद्ध

27 सितंबर 2026, रविवार — प्रतिपदा श्राद्ध

28 सितंबर 2026, सोमवार — द्वितीया श्राद्ध

29 सितंबर 2026, मंगलवार — तृतीया श्राद्ध

30 सितंबर 2026, बुधवार — चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध

1 अक्टूबर 2026, गुरुवार — षष्ठी श्राद्ध

2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार — सप्तमी श्राद्ध

3 अक्टूबर 2026, शनिवार — अष्टमी श्राद्ध

4 अक्टूबर 2026, रविवार — नवमी श्राद्ध, मातृ नवमी

5 अक्टूबर 2026, सोमवार — दशमी श्राद्ध

6 अक्टूबर 2026, मंगलवार — एकादशी श्राद्ध

7 अक्टूबर 2026, बुधवार — द्वादशी श्राद्ध, मघा श्राद्ध

8 अक्टूबर 2026, गुरुवार — त्रयोदशी श्राद्ध

9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार — चतुर्दशी श्राद्ध

10 अक्टूबर 2026, शनिवार — अमावस्या श्राद्ध, अज्ञात तिथि श्राद्ध और पितृ विसर्जन

मातृ नवमी का भी विशेष महत्व
पितृ पक्ष में नवमी तिथि को विशेष रूप से मातृ नवमी के रूप में जाना जाता है. इस दिन दिवंगत माताओं और मातृ पक्ष की महिलाओं के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है.

इसी तरह द्वादशी तिथि पर मघा श्राद्ध का भी विशेष उल्लेख मिलता है. अलग-अलग परिवारों में अपनी परंपरा, कुलाचार और मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध कर्म की विधि में अंतर हो सकता है.

अमावस्या पर होगा पितृ विसर्जन
पितृ पक्ष का अंतिम दिन अमावस्या को माना जाता है. इस दिन सर्वपितृ अमावस्या अथवा पितृ विसर्जन के रूप में पूर्वजों का सामूहिक स्मरण किया जाता है. ऐसे पितरों के निमित्त भी इस दिन श्राद्ध किया जाता है जिनकी निश्चित तिथि ज्ञात नहीं होती.

परिवार के जिन दिवंगत सदस्यों का श्राद्ध उनकी निर्धारित तिथि पर संभव नहीं हो पाया हो, उनके निमित्त भी इस दिन कर्म करने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है.

पितृ पक्ष में किन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक परंपराओं के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध किया जाता है. कई परिवारों में प्रतिदिन गाय को भोजन कराने, कौवे के लिए भोजन निकालने और जरूरतमंदों को अन्न दान करने की परंपरा भी निभाई जाती है.

दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है. इसलिए पितृ पक्ष के दौरान संध्या समय दक्षिण दिशा की ओर दीप प्रज्वलित करने की परंपरा भी बताई जाती है.

श्राद्ध कर्म के दौरान ब्राह्मण भोजन, अन्न, वस्त्र और सामर्थ्य के अनुसार दान करने की परंपरा है. परिवार अपनी कुल परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन कर्मों को पूरा करते हैं.

श्रद्धा ही श्राद्ध का मूल भाव
पितृ पक्ष को लेकर धार्मिक मान्यताएं चाहे जितनी विस्तृत हों, इस परंपरा का मूल भाव पूर्वजों का स्मरण और उनके प्रति कृतज्ञता है. बदलते समय में भी अनेक परिवार इन दिनों में अपने दिवंगत परिजनों को याद करते हैं, उनके जीवन और संस्कारों को स्मरण करते हैं तथा परिवार की अगली पीढ़ी को पूर्वजों के बारे में बताते हैं.

इस दृष्टि से पितृ पक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि परिवार, स्मृति और पीढ़ियों के बीच संबंध को मजबूत करने वाला अवसर भी माना जाता है. 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलने वाले पितृ पक्ष में अलग-अलग तिथियों पर होने वाले श्राद्ध कर्मों के साथ 10 अक्टूबर को पितृ विसर्जन के बाद इस विशेष अवधि का समापन होगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-