वर्कआउट के बाद पसीने से पूरी तरह भीगी टी-शर्ट देखकर अक्सर लगता है कि एक्सरसाइज खूब असरदार रही। जिम या रनिंग के बाद जितना ज्यादा पसीना आता है, उतना ही ज्यादा कैलोरी बर्न होने और शरीर पर मेहनत पड़ने की धारणा आम है। लेकिन क्या वास्तव में पसीना ही यह तय करता है कि आपका वर्कआउट कितना प्रभावी रहा?
कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक ऐसा जरूरी नहीं है। पसीना मुख्य रूप से शरीर को ठंडा रखने की प्राकृतिक प्रक्रिया है, जबकि दिल पर पड़ने वाला प्रभाव इस बात से अधिक जुड़ा होता है कि शरीर कितनी मेहनत कर रहा है, मांसपेशियों को कितनी ऑक्सीजन की जरूरत है और उस जरूरत को पूरा करने के लिए हृदय कितनी तेजी से काम कर रहा है।
ऐसे में अगली बार वर्कआउट के बाद अगर कपड़े पूरी तरह गीले न हों तो इसे खराब एक्सरसाइज का संकेत मानने की जरूरत नहीं है।
पसीना आखिर क्यों आता है
जब हम एक्सरसाइज करते हैं तो मांसपेशियों की गतिविधि बढ़ जाती है और शरीर में गर्मी पैदा होती है। शरीर अपने तापमान को नियंत्रित रखने के लिए पसीने की प्रक्रिया शुरू करता है।
त्वचा पर आया पसीना जब वाष्पित होता है तो शरीर को ठंडा करने में मदद करता है। यही कारण है कि गर्म और उमस भरे मौसम में व्यक्ति को सामान्य से कहीं ज्यादा पसीना आ सकता है।
इसके विपरीत ठंडे कमरे में एक्सरसाइज करने या तैराकी जैसी गतिविधि के दौरान पसीना अपेक्षाकृत कम दिखाई दे सकता है।
इसलिए केवल पसीने की मात्रा देखकर यह तय करना सही नहीं है कि किसी व्यक्ति ने कितनी कठिन एक्सरसाइज की।
पसीना नहीं दिल की प्रतिक्रिया है ज्यादा महत्वपूर्ण
जयपुर स्थित नारायण अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. देवेंद्र के. आर. श्रीमल के अनुसार, पसीने की मात्रा इस बात का अच्छा संकेतक नहीं है कि एक्सरसाइज के दौरान दिल कितनी मेहनत कर रहा है।
वर्कआउट के दौरान मांसपेशियों को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए हृदय तेजी से धड़कता है और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में अधिक रक्त पहुंचाता है।
यानी एक्सरसाइज की तीव्रता बढ़ने के साथ आम तौर पर हृदय गति और सांस लेने की गति भी बढ़ती है।
यही कारण है कि किसी व्यक्ति को कम पसीना आने के बावजूद अच्छा कार्डियो वर्कआउट मिल सकता है।
ठंडे कमरे में कम पसीना फिर भी हो सकती है अच्छी एक्सरसाइज
मान लीजिए दो लोग समान स्तर की मेहनत से एक्सरसाइज कर रहे हैं। एक व्यक्ति गर्म और उमस वाले कमरे में है जबकि दूसरा ठंडे वातावरण में।
गर्म वातावरण में रहने वाले व्यक्ति को ज्यादा पसीना आ सकता है, जबकि ठंडे कमरे में व्यायाम करने वाले व्यक्ति की टी-शर्ट अपेक्षाकृत सूखी रह सकती है।
इसका अर्थ यह नहीं कि दूसरे व्यक्ति का दिल कम मेहनत कर रहा है।
इसी तरह तैराकी के दौरान भी पसीना दिखाई नहीं देता, लेकिन शरीर और हृदय लगातार काम कर रहे होते हैं। इसलिए पसीने को वर्कआउट की सफलता का अकेला पैमाना मानना भ्रम पैदा कर सकता है।
टॉक टेस्ट बताएगा कितनी मेहनत हो रही है
अगर आपके पास स्मार्टवॉच या हार्ट रेट मॉनिटर नहीं है तो भी एक्सरसाइज की तीव्रता का एक आसान अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके लिए टॉक टेस्ट उपयोगी हो सकता है।
कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, अगर आप मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज के दौरान सामान्य बातचीत कर पा रहे हैं तो यह संकेत हो सकता है कि आप मध्यम स्तर की मेहनत कर रहे हैं।
लेकिन जब एक्सरसाइज की तीव्रता काफी बढ़ जाती है तो सांस तेज होने लगती है और लगातार बोलना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति कुछ शब्द बोलकर ही सांस लेने के लिए रुकने की जरूरत महसूस कर सकता है।
इस तरह बातचीत करने की क्षमता एक्सरसाइज की तीव्रता को समझने का सरल तरीका हो सकती है।
हार्ट रेट भी देता है महत्वपूर्ण संकेत
वर्कआउट की तीव्रता समझने के लिए हृदय गति भी एक उपयोगी संकेतक है। दी गई चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार, सामान्य तौर पर मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज अनुमानित अधिकतम हृदय गति के लगभग 50 से 70 प्रतिशत के आसपास हो सकती है।
वहीं जोरदार या उच्च तीव्रता वाली एक्सरसाइज में यह लगभग 70 से 85 प्रतिशत तक जा सकती है।
हालांकि ये सामान्य अनुमान हैं। हर व्यक्ति की उम्र, फिटनेस, स्वास्थ्य स्थिति और दवाओं के अनुसार स्थिति अलग हो सकती है।
विशेष रूप से ऐसी दवाएं लेने वाले लोगों में जो हृदय गति को प्रभावित करती हैं, केवल हार्ट रेट देखकर एक्सरसाइज की तीव्रता तय करना उचित नहीं हो सकता।
ज्यादा पसीना हमेशा ज्यादा फैट बर्न नहीं करता
वर्कआउट से जुड़ी एक आम धारणा यह भी है कि ज्यादा पसीना आने का मतलब ज्यादा फैट बर्न होना है। वास्तव में पसीना मुख्य रूप से शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की प्रक्रिया है।
इसलिए अगर गर्म वातावरण में आपको बहुत ज्यादा पसीना आता है तो इसका अर्थ यह नहीं कि आपने ठंडे कमरे में कम पसीना बहाने वाले व्यक्ति की तुलना में अधिक फैट बर्न किया है।
वजन कम करने और शरीर की संरचना में बदलाव के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ खान-पान, कुल ऊर्जा संतुलन, नींद और लंबे समय तक बनाए रखी जाने वाली जीवनशैली भी महत्वपूर्ण होती है।
पसीना ज्यादा आए तो पानी की कमी पर ध्यान दें
पसीने को लेकर चिंता कम करने का मतलब यह नहीं कि अत्यधिक पसीने को नजरअंदाज कर दिया जाए।
लंबे समय तक एक्सरसाइज करने या बहुत गर्म मौसम में शारीरिक गतिविधि करने के दौरान शरीर से काफी मात्रा में तरल पदार्थ बाहर निकल सकता है। ऐसी स्थिति में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
इसके संकेतों में चक्कर आना, कमजोरी, अत्यधिक थकान या असहज महसूस करना शामिल हो सकता है।
अगर वर्कआउट के दौरान चक्कर आने लगे या तबीयत खराब महसूस हो तो केवल लक्ष्य पूरा करने के लिए एक्सरसाइज जारी रखना उचित नहीं है। ब्रेक लेना, शरीर को ठंडा करना और जरूरत के अनुसार तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है।
वर्कआउट का असली लक्ष्य क्या होना चाहिए
हर वर्कआउट के बाद कपड़े निचोड़ने लायक पसीना आना जरूरी नहीं है। इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि एक्सरसाइज आपकी क्षमता और लक्ष्य के अनुरूप हो तथा आप उसे नियमित रूप से जारी रख सकें।
अगर कोई व्यक्ति हर दिन इतनी कठिन एक्सरसाइज करता है कि अगले दिन सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने लगें तो केवल पसीने की मात्रा को सफलता का पैमाना मानना उपयोगी नहीं होगा।
इसके बजाय धीरे-धीरे क्षमता बढ़ाना, नियमितता बनाए रखना और शरीर के संकेतों को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
कब सावधान होना चाहिए
वर्कआउट के दौरान असामान्य लक्षणों को केवल थकान या पसीने का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खास तौर पर अगर एक्सरसाइज के दौरान चक्कर, असामान्य कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या बेहोशी जैसा महसूस हो तो व्यायाम रोककर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
विशेषकर पहले से हृदय संबंधी समस्या, उच्च रक्तचाप या अन्य स्वास्थ्य स्थिति वाले लोगों को अपनी एक्सरसाइज की तीव्रता के बारे में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
पसीने की मात्रा नहीं आपकी क्षमता है असली पैमाना
वर्कआउट के बाद पसीने से भीगा शरीर देखकर संतुष्टि मिल सकती है, लेकिन वैज्ञानिक और चिकित्सकीय नजरिए से यह एक्सरसाइज की प्रभावशीलता का अकेला पैमाना नहीं है।
आपका शरीर किस तापमान में एक्सरसाइज कर रहा है, वातावरण कितना गर्म या नम है, व्यक्ति की व्यक्तिगत पसीने की प्रवृत्ति क्या है और किस प्रकार की एक्सरसाइज की जा रही है—इन सभी चीजों से पसीने की मात्रा बदल सकती है।
इसके मुकाबले एक्सरसाइज के दौरान सांस की गति, हृदय गति, महसूस होने वाली मेहनत और लंबे समय तक नियमित रूप से व्यायाम कर पाने की क्षमता ज्यादा उपयोगी संकेत दे सकते हैं।
इसलिए अगली बार वर्कआउट के बाद टी-शर्ट ज्यादा गीली न हो तो यह मानने की जरूरत नहीं कि मेहनत बेकार गई। अच्छी एक्सरसाइज का मतलब हर बार पसीने में भीग जाना नहीं, बल्कि शरीर को सुरक्षित और नियमित तरीके से सक्रिय रखना है।
नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। यह व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

