यौन हमले के प्रयास के आरोप में बालाघाट के प्रोफेसर गिरफ्तार, निलंबन के बाद जबलपुर अटैच, चार छात्राओं की शिकायत से बढ़ी जांच

यौन हमले के प्रयास के आरोप में बालाघाट के प्रोफेसर गिरफ्तार, निलंबन के बाद जबलपुर अटैच, चार छात्राओं की शिकायत से बढ़ी जांच

प्रेषित समय :19:18:30 PM / Sun, Sep 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी के बालाघाट के एक सरकारी कॉलेज में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) में प्रवेश को लेकर सामने आए कथित यौन उत्पीडऩ के मामले ने अब जबलपुर में भी प्रशासनिक स्तर पर असर पैदा कर दिया है. छात्रा की शिकायत पर गिरफ्तार किए गए सहायक प्राध्यापक डॉ. राजेंद्र सिंह कुशराम को उच्च शिक्षा विभाग ने निलंबित कर दिया है. निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा कार्यालय, जबलपुर निर्धारित किया गया है. इस कार्रवाई के बाद बालाघाट में सामने आया मामला अब विभागीय स्तर पर जबलपुर से भी जुड़ गया है.

पुलिस के अनुसार आरोपी पर आरोप है कि उसने एनसीसी में प्रवेश दिलाने के बदले छात्रा से अनुचित और यौन प्रकृति की मांग की. छात्रा ने कथित मोबाइल संदेश, आवाज की रिकॉर्डिंग और अन्य सामग्री पुलिस को सौंपी. शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया. न्यायालय में जमानत आवेदन खारिज होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है. जांच के दौरान तीन और छात्राओं की शिकायत सामने आने की बात कही गई है, जिससे पुलिस के सामने अब चार शिकायतों की पड़ताल का विषय है.

निलंबन के बाद जबलपुर में तय हुआ मुख्यालय-

मामले में जबलपुर की भूमिका सीधे तौर पर आरोपी के निलंबन आदेश से जुड़ी है. उच्च शिक्षा विभाग के उपसचिव एल.के. खरे की ओर से जारी आदेश के अनुसार डॉ. राजेंद्र सिंह कुशराम को निलंबित किया गया है. निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा कार्यालय, जबलपुर निर्धारित किया गया है. इसका अर्थ है कि निलंबन अवधि में उनकी प्रशासनिक उपस्थिति जबलपुर स्थित उच्च शिक्षा कार्यालय से जुड़ी रहेगी. विभागीय स्तर पर उनके विरुद्ध आगे की प्रक्रिया भी सेवा नियमों के तहत संचालित की जा सकती है. हालांकि आपराधिक प्रकरण की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और उसका न्यायिक परिणाम अलग प्रक्रिया के माध्यम से तय होगा.

एनसीसी प्रभारी की भूमिका के दौरान लगे आरोप-

पुलिस के अनुसार डॉ. राजेंद्र सिंह कुशराम कॉलेज में सहायक प्राध्यापक होने के साथ एनसीसी प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे. इसी जिम्मेदारी के दौरान छात्राओं के नाम एनसीसी में जोडऩे और प्रवेश दिलाने को लेकर बातचीत होने का आरोप है. शिकायतकर्ता छात्रा का आरोप है कि एनसीसी में सीट उपलब्ध नहीं होने के बावजूद उसे प्रवेश दिलाने का भरोसा दिया गया और इसके बदले अनुचित मांग की गई. छात्रा ने मामले की शिकायत बैहर थाने में दर्ज कराई. शिकायत के साथ कथित मोबाइल संदेश, आवाज की रिकॉर्डिंग और अन्य सामग्री भी पुलिस को उपलब्ध कराई गई. पुलिस ने उपलब्ध सामग्री की जांच के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की.

एक शिकायत के बाद तीन और छात्राएं सामने आईं-

मामले की जांच आगे बढऩे के बाद तीन अन्य छात्राओं की शिकायत सामने आने की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई है. शुरुआत में मामला एक छात्रा की शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ था, लेकिन जांच के दौरान अन्य छात्राओं ने भी आरोपी के खिलाफ इसी तरह के आरोप लगाए. अब पुलिस के सामने चार अलग-अलग शिकायतों से जुड़े तथ्यों की जांच करने की चुनौती है. जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों के बीच कोई समानता है या नहीं और प्रत्येक शिकायत से संबंधित डिजिटल अथवा अन्य साक्ष्य क्या हैं. हालांकि किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी. फिलहाल सामने आई शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अपनी जांच आगे बढ़ा रही है.

मोबाइल संदेश और आवाज की रिकॉर्डिंग बनी अहम कड़ी-

इस प्रकरण में डिजिटल सामग्री जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है. शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस को कथित मोबाइल संदेश और आवाज की रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है. पुलिस इन सामग्रियों की प्रामाणिकता और घटनाक्रम से उनके संबंध की जांच कर रही है. जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित संदेश किस नंबर से भेजे गए, आवाज की रिकॉर्डिंग किस परिस्थिति में हुई और उपलब्ध सामग्री में कही गई बातों का मामले से क्या संबंध है. इन सभी पहलुओं का परीक्षण जांच एजेंसी द्वारा किया जा सकता है. डिजिटल साक्ष्य के साथ पुलिस शिकायतकर्ता और अन्य संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज कर सकती है. चार छात्राओं की शिकायत सामने आने के बाद प्रत्येक मामले को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर जांचना महत्वपूर्ण हो गया है.

कथित बातचीत में एनसीसी में नाम जोडऩे का उल्लेख-

पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच में ऐसी बातचीत सामने आने की बात कही गई है, जिसमें आरोपी द्वारा छात्राओं के नाम एनसीसी में जोडऩे से संबंधित बात की जाती थी. शिकायत में यह भी आरोप है कि आरोपी ने छात्रा से अनुचित सवाल किए और पार्टी के लिए रुकने की बात कही. इन बातचीत की वास्तविक परिस्थितियों और उनके संदर्भ की जांच पुलिस कर रही है. यह भी देखा जा रहा है कि एनसीसी में प्रवेश की प्रक्रिया क्या थी, उस समय सीटों की स्थिति क्या थी और आरोपी के पास छात्राओं के नाम जोडऩे से संबंधित कितनी प्रशासनिक भूमिका थी. यही बिंदु मामले की जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि आरोप सीधे उस पद और जिम्मेदारी से जुड़े हैं, जिसे आरोपी कॉलेज में संभाल रहा था.

न्यायालय ने जमानत आवेदन किया खारिज-

गिरफ्तारी के बाद आरोपी सहायक प्राध्यापक को न्यायालय में पेश किया गया. अभियोजन की ओर से सहायक जिला अभियोजन अधिकारी नारायण धुर्वे ने मामले की पैरवी की. आरोपी की ओर से न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शिवानी असाटी की अदालत में जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया था. अदालत ने जमानत आवेदन खारिज कर आरोपी को जेल भेजने के आदेश दिए. इसके बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ गया है. पुलिस जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और शिकायतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

जबलपुर से जुड़ा विभागीय कार्रवाई का अगला चरण-

निलंबन के बाद जबलपुर इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र बन गया है. आरोपी का मुख्यालय क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा कार्यालय में निर्धारित किए जाने के कारण अब विभागीय प्रक्रिया जबलपुर से भी जुड़ गई है. विभागीय कार्रवाई में निलंबन की परिस्थितियों, सेवा आचरण और जांच की स्थिति जैसे पहलुओं पर नियमानुसार प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. वहीं आपराधिक मामले में पुलिस की जांच और अदालत की कार्यवाही स्वतंत्र रूप से जारी रहेगी.

चार शिकायतों से जांच का दायरा बढ़ा-

एक छात्रा की शिकायत से शुरू हुआ मामला अब चार छात्राओं की शिकायतों तक पहुंचने की जानकारी के बाद व्यापक हो गया है. इससे पुलिस के सामने प्रत्येक शिकायत के तथ्यों और साक्ष्यों की अलग-अलग जांच की जिम्मेदारी बढ़ गई है. फिलहाल डॉ. राजेंद्र सिंह कुशराम जेल में हैं और उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें निलंबित कर जबलपुर अटैच किया है. पुलिस मोबाइल संदेश, आवाज की रिकॉर्डिंग, शिकायतकर्ताओं के बयान और अन्य उपलब्ध सामग्री की जांच कर रही है. मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-