480 करोड़ का विस्तार फिर भी पांच उड़ानें, डुमना एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी पर हाईकोर्ट में उठे गंभीर सवाल

480 करोड़ का विस्तार फिर भी पांच उड़ानें, डुमना एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी पर हाईकोर्ट में उठे गंभीर सवाल

प्रेषित समय :14:58:08 PM / Tue, Sep 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. डुमना एयरपोर्ट के विस्तार और उन्नयन के बाद शहर की हवाई कनेक्टिविटी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने का मुद्दा अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गया है. करीब 480 करोड़ रुपये की लागत से एयरपोर्ट के विस्तार के बावजूद वर्तमान में उड़ानों की संख्या सीमित रहने को लेकर सवाल उठाए गए हैं. हाईकोर्ट में दायर याचिका ने केवल उड़ानों की संख्या ही नहीं, बल्कि एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे और उसके वास्तविक उपयोग के बीच के अंतर को भी बहस के केंद्र में ला दिया है.

विस्तार के बाद भी यात्रियों को सीमित विकल्प
डुमना एयरपोर्ट के विस्तार से उम्मीद थी कि जबलपुर को देश के प्रमुख शहरों से बेहतर हवाई संपर्क मिलेगा. हालांकि, याचिका में दावा किया गया है कि मौजूदा स्थिति में यहां से संचालित सेवाएं अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ीं. रिपोर्टों के अनुसार एक समय उड़ानों की संख्या इससे कहीं अधिक थी, जबकि अब यह घटकर करीब पांच रह गई है.

इस स्थिति का सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ता है जिन्हें दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता या अन्य बड़े शहरों तक पहुंचने के लिए सीमित विकल्पों और समय-सारिणी पर निर्भर रहना पड़ता है.

मुद्दा सिर्फ रनवे का नहीं बल्कि एयरलाइन संचालन का
एयरपोर्ट का विस्तार अपने आप में पर्याप्त नहीं है. विमानन सेवाओं के संचालन में यात्रियों की संख्या, परिचालन लागत, ईंधन, पार्किंग और एयरलाइन कंपनियों की व्यावसायिक व्यवहार्यता जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं. सुनवाई के दौरान एयरलाइन पक्ष से भी इसी तरह के व्यावसायिक पहलुओं का उल्लेख किया गया. एक रिपोर्ट के अनुसार इंडिगो की ओर से कहा गया कि सरकारी स्तर पर आवश्यक रियायतें मिलने पर अन्य विमानन कंपनियां भी जबलपुर से सेवाएं शुरू करने पर विचार कर सकती हैं.

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा समाधान का रास्ता
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह बताने को कहा है कि जबलपुर से अधिक संख्या में उड़ानें संचालित कराने के लिए राज्य स्तर पर क्या कदम उठाए जा सकते हैं. सरकार से सुझाव मांगे गए हैं, जिससे मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहकर व्यावहारिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ सके.

नवंबर की सुनवाई पर टिकी नजर
अब इस मामले में आगे की सुनवाई नवंबर में होगी. इससे पहले सरकार और संबंधित पक्षों के सुझाव सामने आने की संभावना है. ऐसे में अगली सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि एयरपोर्ट पर उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने और एयरलाइनों के लिए संचालन को व्यावहारिक बनाने के लिए क्या ठोस उपाय सुझाए जाते हैं. डुमना एयरपोर्ट से जुड़ा विवाद अब सिर्फ उड़ानों की संख्या का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह जबलपुर की व्यापक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और हवाई परिवहन की उपयोगिता से जुड़ा प्रश्न बन गया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-