जबलपुर. साइबर ठगों ने ठगी का नया तरीका अपनाते हुए जबलपुर में एक इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारी को उसके वरिष्ठ अधिकारी के नाम से फोन किया. ठग ने कर्मचारी को पॉलिसी लैप्स होने की बात कहकर तत्काल प्रीमियम जमा करने के लिए कहा. इसके बाद वाट्सऐप पर QR कोड भेजकर उससे भुगतान कराया गया. कर्मचारी ने जैसे ही 95 हजार 213 रुपये ट्रांसफर किए, खाते में प्राप्तकर्ता का नाम अलग दिखाई दिया. तब उसे ठगी का अहसास हुआ, लेकिन तब तक रकम दूसरे खाते में पहुंच चुकी थी. शिकायत पर पनागर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
पॉलिसी बंद होने का दिखाया डर
पनागर पुलिस के अनुसार डुगरिया गांव निवासी अजीत कुमार पटेल एक लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में वर्ष 2023 से कार्यरत हैं. 17 सितंबर को उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया. उसने खुद को कंपनी का मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ प्रबंधक बताया और कहा कि पॉलिसी का प्रीमियम जमा नहीं होने के कारण वह लैप्स होने की स्थिति में है.
फोन करने वाले ने अजीत को बताया कि सामान्य पॉलिसी नंबर के जरिए भुगतान नहीं हो पाएगा. उसने वाट्सऐप पर एक QR कोड भेजकर उसी के माध्यम से प्रीमियम जमा करने को कहा.
एक ही भुगतान में चली गई बड़ी रकम
फोन करने वाले पर भरोसा करते हुए अजीत ने अपने एसबीआई खाते से QR कोड स्कैन किया. इसके बाद दोपहर करीब 2:10 बजे उसने 95 हजार 213 रुपये का भुगतान कर दिया.
लेनदेन पूरा होने के बाद जब अजीत की नजर भुगतान पाने वाले व्यक्ति के नाम पर गई तो वह चौंक गया. जिस व्यक्ति ने खुद को कंपनी का अधिकारी बताया था, भुगतान किसी दूसरे नाम के खाते में पहुंचा था.
नाम देखकर हुआ साइबर ठगी का शक
अजीत को तत्काल समझ आया कि पॉलिसी के प्रीमियम के नाम पर उसके साथ धोखाधड़ी की गई है. उसने संबंधित व्यक्ति से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन तब तक रकम खाते से निकल चुकी थी.
इसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की. पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है.
असली अधिकारी के नाम का लिया सहारा
इस मामले में ठग ने कर्मचारी के भरोसे का फायदा उठाने के लिए उसके वरिष्ठ अधिकारी के नाम और पद का इस्तेमाल किया. पॉलिसी लैप्स होने की बात कहकर पीड़ित पर तत्काल भुगतान का दबाव बनाया गया. इसके बाद बैंक खाते में सीधे रकम भेजने के बजाय QR कोड के जरिए भुगतान कराया गया.
पुलिस अब फोन नंबर, वाट्सऐप अकाउंट, QR कोड और जिस खाते में रकम पहुंची है, उसकी जानकारी जुटा रही है. लेनदेन से जुड़े बैंक रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है.
जांच में जुटी पुलिस
पनागर पुलिस ने मामले में साइबर ठगी से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी ने कंपनी के अधिकारी की पहचान और पीड़ित की पॉलिसी से संबंधित जानकारी कहां से हासिल की.
मामले में आगे की कार्रवाई बैंक लेनदेन और तकनीकी जांच से मिलने वाले सुरागों के आधार पर की जाएगी. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी पॉलिसी, बैंकिंग या भुगतान संबंधी कॉल पर तत्काल QR कोड स्कैन कर रकम ट्रांसफर न करें और पहले संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करें.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

