आयुष्मान योजना में अस्पतालों के लिए नई शर्त, जबलपुर सहित चार शहरों में जरुरी है एनएबीएच, 739 अस्पतालों में सिर्फ 310 के पास सर्टिफिकेट

आयुष्मान योजना में अस्पतालों के लिए नई शर्त, जबलपुर सहित चार शहरों में जरुरी है एनएबीएच, 739 अस्पतालों में सिर्फ 310 के पास सर्टिफिकेट

प्रेषित समय :17:19:43 PM / Thu, Oct 1st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत निरामय योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से नई शर्त लागू हो रही है. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में आयुष्मान योजना से संबद्ध अस्पतालों के लिए एनएबीएच (नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल एंड हेल्थ केयर प्रोवाइडर) सर्टिफिकेट जरूरी होगा.

यह नियम पहले 1 अप्रैल से लागू होना था, लेकिन अस्पतालों को तैयारी का समय देने के लिए इसकी तारीख छह महीने बढ़ाकर 1 अक्टूबर की गई थी. नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इन चार शहरों में आयुष्मान योजना से 739 अस्पताल संबद्ध हैं. इनमें से 310 अस्पतालों के पास एनएबीएच सर्टिफिकेट है. सरकारी अस्पतालों को अलग करने पर करीब 300 निजी अस्पताल ऐसे हैं, जिनकी आयुष्मान संबद्धता नए नियम के तहत प्रभावित हो सकती है. एनएबीएच की निर्धारित शर्त पूरी नहीं करने वाले अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता समाप्त होने पर वहां योजना के तहत कैशलेस इलाज नहीं मिल सकेगा. मरीजों को दूसरे संबद्ध अस्पतालों में जाना पड़ सकता है. इससे हृ्रक्च॥ मान्यता वाले अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ सकता है और इलाज के लिए इंतजार भी बढ़ सकता है. हालांकि, इससे मरीज का आयुष्मान कार्ड या सालाना 5 लाख रुपए तक का मूल कवरेज खत्म नहीं होगा. बदलाव अस्पताल की योजना में संबद्धता और संबंधित पैकेज की पात्रता से जुड़ा है.

मेडिसिन पैकेज में फुल एनएबीएच जरूरी-

नई व्यवस्था में मेडिसिन पैकेज को लेकर शर्त ज्यादा सख्त है. इन चार शहरों में मेडिसिन पैकेज के तहत इलाज जारी रखने के लिए अस्पताल के पास फाइनल यानी फुल हृ्रक्च॥ प्रमाणपत्र होना जरूरी होगा. जिन अस्पतालों के पास फिलहाल एनएबीएच का एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट है, उन्हें मौजूदा प्रमाणपत्र की वैधता तक मेडिसिन पैकेज के तहत इलाज की अनुमति रहेगी. सर्टिफिकेट की अवधि खत्म होने के बाद मेडिसिन पैकेज के लिए फुल एनएबीएच जरूरी होगा. अन्य आयुष्मान पैकेज के लिए कम से कम एंट्री-लेवल एनएबीएच की शर्त लागू होगी यानी अब केवल आयुष्मान योजना से संबद्ध होना पर्याप्त नहीं होगा.

निजी अस्पतालों ने नियम का विरोध जताया-

यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन ने एनएबीएच की अनिवार्यता और आयुष्मान भुगतान में देरी को लेकर विरोध जताया है. एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. धनंजय मिश्रा के मुताबिक, निजी अस्पतालों का आयुष्मान योजना का बकाया भुगतान तत्काल किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि 5-6 महीने से भुगतान नहीं मिलने के कारण दवा विक्रेताओं और स्टाफ का पेमेंट करने में परेशानी हो रही है. एसोसिएशन के विशाल सिंह ने एनएबीएच की बाध्यता खत्म करने की मांग की है. उनका कहना है कि छोटे और मध्यम अस्पतालों के लिए एनएबीएच प्रमाणन का खर्च वहन करना मुश्किल है. संगठन ने मांगें नहीं माने जाने पर 8 अक्टूबर 2026 से पूरे मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना के बहिष्कार की चेतावनी दी है.

जबलपुर में 12 अस्पताल की आयुष्मान संबद्धता खत्म करने की रिपोर्ट आई थी-

एनएबीएच से जुड़ी शर्तों को लेकर अप्रैल 2026 में भी कार्रवाई की गई थी. उस समय भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के 126 निजी अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता खत्म किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी. इनमें भोपाल के 51, इंदौर के 30, ग्वालियर के 33 और जबलपुर के 12 अस्पताल बताए गए थे. इससे साफ है कि एनएबीएच प्रमाणन अब आयुष्मान योजना में  निजी अस्पतालों की संबद्धता से सीधे जुड़ गया है.

फुल एनएबीएच अस्पतालों को सीधे इंपैनलमेंट-

जिन अस्पतालों के पास पहले से फुल एनएबीएच प्रमाणपत्र है, उन्हें आवेदन करने पर 'डीम्ड इंपैनलमेंटÓ का लाभ मिलेगा. ऐसे अस्पतालों को अलग से निरीक्षण की जरूरत नहीं होगी और वे सीधे योजना से जुड़ सकेंगे. अन्य अस्पतालों को पहले एंट्री-लेवल हृ्रक्च॥ लेना होगा और निर्धारित अवधि में फुल एनएबीएच हासिल करना होगा. आयुष्मान योजना में अस्पतालों को गुणवत्ता के आधार पर अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान भी किया गया है. मरीजों से मिलने वाले फीडबैक के जरिए भी अस्पतालों की सेवाओं की निगरानी की जाएगी. मोबाइल ऐप के माध्यम से मरीज इलाज के बाद अपना फीडबैक दे सकेंगे.

जबलपुर सहित सिर्फ चार शहरों में लागू होगा बदलाव-

यह बदलाव पूरे देश में आयुष्मान योजना के मूल नियम में बदलाव नहीं है. मध्य प्रदेश में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के अस्पतालों की संबद्धता की शर्तों में यह बदलाव किया गया है. स्टेट एग्जीक्यूटिव कमेटी के निर्णय के आधार पर ये बदलाव किया गया है. देशभर में 30 जून 2026 तक 37,413 सरकारी और निजी अस्पताल आयुष्मान योजना नेटवर्क में शामिल थे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-