जबलपुर. एमपी में राशन दुकान ऑपरेटरों के अनिश्चितकालीन और विरोध प्रदर्शन के चलते आज से प्रदेश की 26 हजार से अधिक और अकेले जबलपुर शहर की 440 राशन दुकानों पर ताले लटक गए हैं. ऑपरेटरों के हड़ताल पर चले जाने से जन वितरण प्रणाली पूरी तरह प्रभावित हो गई है, जिससे आम जनता और खासकर गरीब वर्ग के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
दुकान संचालकों और ऑपरेटरों का मुख्य आरोप है कि उन्हें वर्ष 2014-15 तक का बकाया कमीशन अब तक नहीं मिल पाया है. हालिया कमीशन भी महीनों की देरी से आ रहा है, जिससे वे भारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. संचालकों का कहना है कि सरकार द्वारा जो खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता बेहद खराब है, जिसे लेकर उपभोक्ताओं का गुस्सा भी उन्हें ही झेलना पड़ता है. अपनी इन तमाम गंभीर समस्याओं को कई बार विभाग के सामने रखने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
जिसके बाद ऑपरेटरों को यह कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा. कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने वाले राशन दुकान संचालकों ने दो-टूक कहा कि सरकार यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं करती है, तो वे और भी उग्र कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे. हड़ताल के कारण गरीबों को हो रही परेशानियों पर अफसोस जताते हुए संचालकों ने कहा, "यह हमारी मजबूरी बन गई थी.
हम अच्छी तरह समझते हैं कि दुकानें बंद होने से गरीब परिवारों की स्थिति खराब होगी, लेकिन लगातार हो रहे आर्थिक शोषण और भेदभाव के कारण हमारे पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था. फिलहाल इस एक हफ्ते की प्रदेशव्यापी हड़ताल से सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर बड़ा असर पड़ा है, और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है.
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