यूके से लौटकर महिला ने ठुकराईं कई नौकरियां, 7 लाख से कम वेतन पर समझौता नहीं किया

यूके से लौटकर महिला ने ठुकराईं कई नौकरियां, 7 लाख से कम वेतन पर समझौता नहीं किया

प्रेषित समय :22:09:53 PM / Sat, Oct 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली। यूके में काम और अनुभव हासिल करने के बाद भारत लौटी एक महिला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। महिला ने भारत लौटने के बाद नौकरी की तलाश के दौरान कई अवसरों को इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि वे उसकी अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं थे। उसने अपनी पहली पूर्णकालिक नौकरी के लिए तीन स्पष्ट शर्तें तय की थीं—ऐसा काम जिसमें सीखने और आगे बढ़ने का मौका मिले, किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने का अवसर और कम से कम 7 लाख रुपये सालाना वेतन।

महिला ने इंस्टाग्राम पर साझा किए वीडियो में बताया कि नौकरी की तलाश के दौरान उसे कई प्रस्ताव मिले, लेकिन उसने तुरंत कोई नौकरी स्वीकार करने के बजाय अपने लिए सही अवसर का इंतजार किया। उसका कहना था कि यूके में हासिल किए गए वैश्विक अनुभव और अलग-अलग बाजारों की समझ के आधार पर वह अपने करियर को लेकर समझौता नहीं करना चाहती थी।

पहली शर्त चुनौतीपूर्ण काम की
महिला के मुताबिक, उसकी पहली प्राथमिकता ऐसी नौकरी थी जिसमें उसे लगातार सीखने और नई परिस्थितियों में काम करने का अवसर मिले। वह ऐसा पद नहीं चाहती थी जिसमें शुरुआत से ही काम बहुत आसान या आरामदायक हो जाए।

उसने कहा कि वह ऐसा काम चाहती थी जिसमें उसे नई चीजें सीखने, समस्याओं को समझने और खुद को चुनौती देने का मौका मिले। उसके अनुसार, करियर में विकास के लिए कई बार अपनी सहज स्थिति से बाहर निकलना जरूरी होता है।

दूसरी शर्त बहुराष्ट्रीय कंपनी
महिला ने बताया कि नौकरी की तलाश के दौरान उसने कई स्टार्टअप में भी साक्षात्कार दिए थे। कुछ कंपनियों में काम उसे काफी दिलचस्प लगा, लेकिन वे उसकी अपेक्षित वेतन सीमा पूरी नहीं कर पा रही थीं।

उसका कहना था कि यूके में काम करने के दौरान उसने अलग-अलग बाजारों और काम करने के तरीकों को समझा था। इसलिए वह ऐसी कंपनी में काम करना चाहती थी जहां उसके वैश्विक अनुभव का इस्तेमाल हो सके।

इसी वजह से उसने बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करना अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। उसका मानना था कि सही संगठन में उसके पिछले अनुभव और नई भूमिका के बीच बेहतर तालमेल बन सकता है।

7 लाख रुपये सालाना न्यूनतम वेतन तय किया
महिला की तीसरी और सबसे स्पष्ट शर्त वेतन को लेकर थी। उसने अपनी नौकरी की तलाश के लिए न्यूनतम 7 लाख रुपये सालाना का वेतन तय किया था। इससे कम वेतन वाले अवसरों को उसने स्वीकार नहीं किया।

उसने स्पष्ट किया कि वह खुद को सिर्फ इसलिए 7 लाख रुपये की हकदार नहीं मान रही थी क्योंकि वह विदेश से लौटी है या नई नौकरी तलाश रही है। उसके अनुसार, उसकी शिक्षा, अब तक का अनुभव और जिस तरह की भूमिका वह तलाश रही थी, उन सभी को ध्यान में रखते हुए उसने यह न्यूनतम सीमा तय की थी।

उसका कहना था कि वेतन की यह सीमा उसके लिए सिर्फ रकम नहीं थी, बल्कि उसके कौशल और अनुभव के मूल्यांकन का हिस्सा थी।

नौकरी के इंतजार में खुद पर भी उठे सवाल
महिला ने माना कि अपनी शर्तों पर कायम रहना आसान नहीं था। कई बार नौकरी के अवसर सामने आने के बावजूद उन्हें ठुकराने के बाद उसे खुद भी लगा कि कहीं वह जरूरत से ज्यादा चयन तो नहीं कर रही।

नौकरी का बाजार प्रतिस्पर्धी होने के कारण लंबे समय तक अवसर का इंतजार करना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद उसने जल्दबाजी में कोई ऐसा पद स्वीकार करने के बजाय इंतजार करना बेहतर समझा जो उसके करियर लक्ष्यों से मेल खाता हो।

उसका कहना था कि उपलब्ध नौकरी को तुरंत स्वीकार करने से बेहतर है कि ऐसा अवसर तलाशा जाए जो व्यक्ति की योग्यता, अनुभव और भविष्य की दिशा के अनुरूप हो।

सोशल मीडिया पर लोगों ने दी अलग-अलग राय
महिला की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने उसके फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि करियर में स्पष्ट लक्ष्य होना जरूरी है और सही अवसर के लिए इंतजार करना गलत नहीं है।

एक यूजर ने लिखा कि कई बार सही नौकरी का इंतजार करना बाद में बेहतर साबित होता है। एक अन्य यूजर ने कहा कि महिला को यह पता था कि वह अपने करियर में क्या चाहती है और इसी वजह से उसने जल्दबाजी नहीं की।

कुछ लोगों ने यह भी कहा कि नौकरी ठुकराने के लिए आत्मविश्वास की जरूरत होती है, खासकर तब जब व्यक्ति के सामने तत्काल रोजगार के अवसर मौजूद हों।

हर नौकरी तलाशने वाले के लिए एक जैसा फार्मूला नहीं
हालांकि, महिला की कहानी को हर नौकरी तलाशने वाले के लिए एक समान फार्मूले के रूप में नहीं देखा जा सकता। किसी व्यक्ति की वेतन अपेक्षा उसके अनुभव, शिक्षा, क्षेत्र, कौशल, शहर और कंपनी की भूमिका के आधार पर अलग हो सकती है।

इस मामले में महिला ने अपने लिए स्पष्ट मानदंड तय किए और उन्हीं के आधार पर नौकरी के विकल्पों का चुनाव किया। सोशल मीडिया पर चर्चा का मुख्य विषय भी यही है कि करियर में व्यक्ति को अपनी प्राथमिकताओं और बाजार में उपलब्ध अवसरों के बीच किस तरह संतुलन बनाना चाहिए।

महिला के अनुसार, इंतजार करना हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन अगर किसी व्यक्ति को यह स्पष्ट हो कि वह किस तरह का काम करना चाहता है और उसके लिए उसकी प्राथमिकताएं क्या हैं, तो नौकरी की तलाश की दिशा तय करना आसान हो जाता है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-