162वें वर्ष की रामलीला का शंखनाद, स्वर्णजड़ित मुकुटों की प्राणप्रतिष्ठा के बाद निकली भव्य शोभायात्रा

162वें वर्ष की रामलीला का शंखनाद, स्वर्णजड़ित मुकुटों की प्राणप्रतिष्ठा के बाद निकली भव्य शोभायात्रा

प्रेषित समय :21:06:51 PM / Sun, Oct 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. गोविंदगंज रामलीला भवन में 162वें वर्ष की रामलीला के आयोजन का विधिवत शंखनाद हो गया. रविवार को परंपरागत मुकुट पूजन और स्वर्णजड़ित शीश आभूषणों की प्राणप्रतिष्ठा के बाद भव्य मुकुट शोभायात्रा निकाली गई. वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और जयकारों के बीच निकली शोभायात्रा ने शहर के प्रमुख मार्गों को भक्तिमय कर दिया. जगह-जगह श्रद्धालुओं और नागरिकों ने मुकुटों के दर्शन कर आरती उतारी तथा पुष्पवर्षा कर चल समारोह का स्वागत किया.

गोविंदगंज रामलीला भवन में आयोजित मुकुट पूजन समारोह व्यास पं. वासुदेव शास्त्री के निर्देशन में वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ. अनुष्ठान के दौरान भगवान श्रीगणेश, श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, अंजनी किशोर हनुमान और माता गौरी के स्वर्णजड़ित शीश आभूषणों की प्राणप्रतिष्ठा की गई. धार्मिक परंपरा के अनुसार इन मुकुटों को रामलीला के पात्रों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व का माना जाता है. प्राणप्रतिष्ठा के बाद इन्हें शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण कराया गया.

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ मुकुट पूजन
मुकुट पूजन के दौरान रामलीला भवन परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आयोजन समिति से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे. वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूजन की प्रक्रिया पूरी की गई. इसके बाद शाम को पूर्व महापौर प्रभात साहू ने भगवान के मुकुटों की आरती उतारी और भगवा ध्वज दिखाकर शोभायात्रा को रवाना किया.

इस अवसर पर रामलीला समिति के अध्यक्ष अनिल तिवारी, संरक्षक राकेश पाठक, अरुण दुबे, राजकुमार गुप्ता, मांगू गोयल और मनीष पाठक सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे. आयोजन से जुड़े लोगों ने बताया कि रामलीला की वर्षों पुरानी परंपराओं को उसी धार्मिक स्वरूप में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मुकुट पूजन और नगर भ्रमण का आयोजन किया जाता है.

शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी शोभायात्रा
मुकुट शोभायात्रा रामलीला भवन परिसर से प्रारंभ होकर गुड़हाई, कोतवाली, कमानिया गेट, फुहारा चौराहा, बड़े महावीर, निवाड़गंज, पांडे चौक, बल्देवबाग, चेरीताल और दमोहनाका होते हुए पुनः रामलीला भवन के मुख्य प्रांगण में पहुंचकर संपन्न हुई. शोभायात्रा के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी.

जैसे ही मुकुटों से सुसज्जित चल समारोह विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरा, वातावरण भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा. नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने अलग-अलग स्थानों पर मंच लगाकर शोभायात्रा का स्वागत किया. श्रद्धालुओं ने आरती उतारी और पुष्पवर्षा कर मुकुटों का वंदन किया. कई स्थानों पर शीतल पेय और प्रसाद का वितरण भी किया गया.

कीर्तन और पारंपरिक वाद्ययंत्रों ने बांधा समां
शोभायात्रा में साधु-संतों की टोली, कीर्तन मंडलियां और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के दल शामिल रहे. धार्मिक गीतों और भजनों के बीच आगे बढ़ रहे चल समारोह ने पूरे मार्ग को उत्सव के माहौल में बदल दिया. रामलीला में अभिनय करने वाले कलाकार भी अपनी पारंपरिक वेशभूषा में शोभायात्रा का हिस्सा बने. कलाकारों के पारंपरिक रूप ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया.

आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में मुकुटों के दर्शन को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बड़ी संख्या में लोग शोभायात्रा के मार्ग पर पहुंचे. कई परिवारों ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों के सामने शोभायात्रा का स्वागत किया.

मुकुटों के दर्शन को बताया आध्यात्मिक अनुभव
पूर्व महापौर प्रभात साहू ने मुकुटों के धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दिव्य आभूषणों में प्रभु का वास माना जाता है. उनका कहना था कि भगवान के इन स्वरूपों के दर्शन से श्रद्धालुओं के अंतःकरण में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. उन्होंने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों और जीवन मूल्यों को समाज तक पहुंचाने वाली धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा भी है.

समिति के पदाधिकारियों ने भी कहा कि 162 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है. हर वर्ष मुकुट पूजन और शोभायात्रा के साथ रामलीला मंचन की औपचारिक शुरुआत का वातावरण तैयार होता है.

5 अक्टूबर से नारद मोह प्रसंग के साथ शुरू होगी रामलीला
मुकुट पूजन और शोभायात्रा के बाद अब सोमवार 5 अक्टूबर से रामलीला के मंचन का सिलसिला शुरू होगा. रामलीला भवन के रंगमंच पर रात 9 बजे से पहले दिन के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा. उद्घाटन दिवस पर नारद मोह, कामदेव चरित्र और मोहिनी स्वयंवर जैसे प्रसंगों का सजीव मंचन प्रस्तावित है.

इन प्रसंगों के बाद दशरथ नंदन भगवान श्रीराम के प्राकट्य का दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा. राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के अवतरण की बेला को जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाएगा. इस दौरान सोहर और बधाई गीतों की प्रस्तुति के साथ श्रद्धालुओं के बीच मिष्ठान का वितरण भी किया जाएगा.

मंच सज्जा और ध्वनि प्रकाश व्यवस्था तैयार
रामलीला समिति के अनुसार मंचन को प्रभावी और आकर्षक बनाने के लिए मंच सज्जा, ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया गया है. आयोजकों का प्रयास है कि रामकथा के प्रत्येक प्रसंग को पारंपरिक धार्मिक भावनाओं के अनुरूप प्रस्तुत किया जाए और दर्शकों को कथा के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ने का वातावरण तैयार हो.

समिति ने नगरवासियों से सपरिवार रामलीला भवन पहुंचकर मंचन देखने और भगवान श्रीराम के चरित्र से प्रेरणा लेने की अपील की है. मुकुट पूजन और भव्य शोभायात्रा के साथ शुरू हुई धार्मिक गतिविधियों ने शहर में रामलीला के प्रति उत्साह बढ़ा दिया है. अब 5 अक्टूबर से मंच पर रामकथा के प्रसंगों का सिलसिला शुरू होगा, जो आने वाले दिनों में शहर के धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण को लगातार भक्तिमय बनाए रखेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-