4 महानगरों में एनएबीएच अनिवार्य करने का विरोध, एमपी में 8 अक्टूबर से निजी अस्पताल नहीं करेंगे आयुष्मान मरीजों का इलाज

4 महानगरों में एनएबीएच अनिवार्य करने का विरोध, एमपी में 8 अक्टूबर से निजी अस्पताल नहीं करेंगे आयुष्मान मरीजों का इलाज

प्रेषित समय :17:31:01 PM / Sun, Oct 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी में आयुष्मान योजना के करोड़ों हितग्राहियों के लिए चिंता की खबर है. प्रदेश के चार महानगरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों के लिए एनएबीएच सर्टिफिकेशन अनिवार्य किए जाने का विरोध शुरू हो गया है. एमपी नर्सिंग होम्स एसोसिएशन ने ऐलान किया है कि 8 अक्टूबर से निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं करेंगे. जरूरत पडऩे पर अस्पताल बंद करने की भी चेतावनी दी गई है.

राज्य सरकार ने 1 अक्टूबर से इन चारों शहरों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज के लिए अस्पतालों का एनएबीएच सर्टिफाइड होना अनिवार्य किया है. एसोसिएशन ने सिर्फ चार महानगरों में एनएबीएच सर्टिफिकेशन अनिवार्य किए जाने और बाकी जिलों में छूट देने पर सवाल उठाए हैं. उसका कहना है कि छोटे अस्पतालों के लिए एनएबीएच सर्टिफिकेशन पर लाखों रुपए खर्च करना मुश्किल होगा. साथ ही अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज के बाद पिछले पांच-छह महीने से लंबित भुगतान जारी करने की मांग की है. आईएमए के प्रदेशाध्यक्ष अमरेंद्र पांडे ने कहा कि एनएबीएच सर्टिफिकेशन अपने आप में एक स्वैच्छिक व्यवस्था है, जिसे निजी अस्पतालों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है.

उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना के तहत इलाज का बहिष्कार किया जाएगा और सांकेतिक हड़ताल पर जाने पर भी विचार किया जा रहा है. पांडे के मुताबिक, कई अस्पतालों को पिछले पांच-छह महीने से आयुष्मान योजना का भुगतान नहीं मिला है. उनका दावा है कि जबलपुर में करीब 70 से 80 करोड़ और पूरे प्रदेश में करीब 1100 करोड़ रुपए की राशि लंबित है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुमानित आंकड़ा है, जबकि सटीक राशि सरकार ही बता सकती है.

अस्पताल संचालकों ने सरकार को 8 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम देते हुए एनएबीएच की अनिवार्यता हटाने की मांग की है. साथ ही गुणवत्ता जांच के लिए राज्य स्तर पर अलग व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है. पांडे ने कहा कि विरोध के बावजूद इमरजेंसी सेवाएं बंद नहीं की जाएंगी. अस्पताल संचालक मरीजों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते, लेकिन सरकार के फैसले के खिलाफ वैधानिक तरीके से विरोध जारी रखेंगे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-