पांच साल के बच्चे के चेहरे पर डॉग बाइट से 20 टांके, आवारा कुत्ते के हमले से मचा हड़कंप

पांच साल के बच्चे के चेहरे पर डॉग बाइट से 20 टांके, आवारा कुत्ते के हमले से मचा हड़कंप

प्रेषित समय :21:37:17 PM / Tue, Oct 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. ग्वालियर में आवारा कुत्तों की समस्या अब केवल सड़कों और गलियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए भी चिंता का कारण बनती जा रही है. बहोड़ापुर के इस्लामपुरा क्षेत्र में पांच साल के बच्चे पर आवारा कुत्ते के हमले ने इस समस्या की गंभीरता को फिर सामने ला दिया है. किराने की दुकान से सामान लेने निकले अली पर कुत्ते ने हमला कर उसके गाल को बुरी तरह नोंच दिया. चेहरे पर गहरा घाव होने के बाद उसे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब एक घंटे चली सर्जरी में 20 टांके लगाए गए.
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब शहर के अस्पतालों में डॉग बाइट के मामले लगातार पहुंच रहे हैं. मंगलवार को हजार बिस्तर अस्पताल की पीएसएम विभाग की ओपीडी में ही 80 लोग कुत्ते के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंचे. इनमें 23 नए और 57 पुराने मरीज शामिल थे. आंकड़ा यह संकेत देता है कि आवारा कुत्तों का हमला शहर के लिए लगातार बनी रहने वाली चुनौती है.

घर के पास निकला था बच्चा, कुत्ते ने किया हमला
अली के स्वजन के मुताबिक बच्चा घर के पास स्थित किराने की दुकान पर सामान लेने गया था. इसी दौरान आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया. अचानक हुए हमले से बच्चा संभल नहीं पाया और कुत्ते ने उसके चेहरे को निशाना बना लिया. आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उसके गाल पर गहरा घाव हो चुका था.

घटना के बाद स्वजन बच्चे को उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे. चेहरे पर चोट अधिक गंभीर होने के कारण सामान्य उपचार के बजाय सर्जिकल हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी. बच्चे को संक्रमण से बचाने के लिए उपचार शुरू किया गया और स्थिति नियंत्रित होने के बाद सर्जरी की गई.

संक्रमण नियंत्रित करने के बाद हुई सर्जरी
पीडियाट्रिक्स सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप गर्ग के अनुसार, बच्चे को अस्पताल लाए जाने के बाद से ही एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही थीं. चेहरे पर कुत्ते के हमले से हुआ घाव गहरा था. संक्रमण को नियंत्रित करने के बाद करीब एक घंटे की सर्जरी की गई. इस दौरान चेहरे के घाव को उपचारित कर 20 टांके लगाए गए.

सर्जरी के बाद बच्चे की स्थिति स्थिर बताई गई है. चिकित्सकों के मुताबिक उसकी निगरानी की जा रही है और स्थिति सामान्य रहने पर एक-दो दिन में अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है.

एक बच्चे की चोट ने शहर की बड़ी समस्या सामने ला दी
अली के मामले की गंभीरता केवल इस वजह से नहीं है कि बच्चे को चेहरे पर चोट लगी, बल्कि इसलिए भी है कि हमला घर के आसपास ही हुआ. बच्चों का घर से थोड़ी दूरी पर दुकान, स्कूल या खेल के लिए निकलना सामान्य बात है. ऐसे में गलियों और मोहल्लों में घूमने वाले आवारा कुत्तों के झुंड अभिभावकों की चिंता बढ़ा रहे हैं.

शहर के कई इलाकों में स्थानीय लोग लंबे समय से आवारा कुत्तों की संख्या और उनके व्यवहार को लेकर शिकायत करते रहे हैं. खासकर सुबह और शाम के समय सड़कों, कॉलोनियों तथा बाजार क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड दिखाई देते हैं. बच्चों के अलावा दोपहिया वाहन चालकों के पीछे दौड़ने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं.

एक दिन में 80 मामले चिंता बढ़ाने वाले
हजार बिस्तर अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को डॉग बाइट के 80 मरीज पहुंचना इस समस्या का दूसरा पहलू सामने लाता है. इनमें 23 मरीज ऐसे थे जो पहली बार उपचार के लिए पहुंचे, जबकि 57 पुराने मरीज थे और फालोअप के लिए आए थे.

अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या को केवल एक दिन का आंकड़ा मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. लगातार बड़ी संख्या में लोग कुत्ते के काटने के बाद उपचार करा रहे हैं तो इससे शहर में आवारा कुत्तों की समस्या की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

शिकायत के बाद भी कुत्ता नहीं पकड़े जाने का आरोप
अली के स्वजन का आरोप है कि घटना की जानकारी देने के बावजूद संबंधित कुत्ते को अब तक नहीं पकड़ा गया है. इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है. स्वजन चाहते हैं कि जिस क्षेत्र में बच्चे पर हमला हुआ है, वहां आवारा कुत्तों को लेकर तत्काल कार्रवाई की जाए ताकि दोबारा ऐसी घटना न हो.

यह सवाल भी उठ रहा है कि किसी बच्चे पर हमला होने के बाद यदि उसी क्षेत्र में कुत्ते मौजूद रहते हैं तो उनकी पहचान और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार विभाग क्या कदम उठा रहा है. स्थानीय स्तर पर कार्रवाई में देरी होने पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति का खतरा बना रहता है.

चेहरे पर हमला बच्चों के लिए ज्यादा गंभीर
चिकित्सकों के अनुसार कुत्ते के काटने से शरीर के किसी भी हिस्से में चोट होने पर तत्काल चिकित्सा सलाह जरूरी है. बच्चों के चेहरे पर काटने की स्थिति विशेष रूप से गंभीर हो सकती है, क्योंकि घाव गहरा होने के साथ संक्रमण का खतरा रहता है और चेहरे पर निशान पड़ने की आशंका भी रहती है.

अली के मामले में भी घाव की स्थिति को देखते हुए पहले संक्रमण को नियंत्रित किया गया और इसके बाद सर्जरी की गई. चिकित्सकों ने बच्चे की हालत स्थिर बताई है, लेकिन ऐसे मामलों में उपचार के साथ नियमित निगरानी भी जरूरी होती है.

अब रोकथाम पर फोकस की जरूरत
शहर में डॉग बाइट के बढ़ते मामलों के बीच केवल अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है. आवारा कुत्तों की संख्या, उनके झुंड और संवेदनशील इलाकों की पहचान कर प्रभावी रोकथाम की व्यवस्था करना भी जरूरी है. विशेष रूप से स्कूलों, बाजारों, अस्पतालों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है.

अली की सर्जरी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि बच्चों को आवारा कुत्तों के हमलों से सुरक्षित रखने के लिए शहर में जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी व्यवस्था है. फिलहाल बच्चा उपचार के बाद स्थिर है, लेकिन डॉग बाइट के लगातार सामने आ रहे मामले बताते हैं कि समस्या का स्थायी समाधान अब भी चुनौती बना हुआ है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-