मझौली के किसानों का चार साल से मूंग का भुगतान अटका, ट्रैक्टर लेकर जबलपुर पहुंचे 250 किसान

मझौली के किसानों का चार साल से मूंग का भुगतान अटका, ट्रैक्टर लेकर जबलपुर पहुंचे 250 किसान

प्रेषित समय :19:15:47 PM / Wed, Oct 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मझौली क्षेत्र के किसानों का लंबे समय से लंबित उपज भुगतान अब बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. अपनी मेहनत की कमाई के लिए इंतजार कर रहे करीब 200 से 250 किसान बुधवार को ट्रैक्टरों के काफिले के साथ जबलपुर पहुंचे. किसानों की योजना कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखने की थी, लेकिन शहर में प्रवेश के बाद पुलिस ने दीनदयाल चौक पर ही काफिले को रोक दिया. किसानों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलने से मौके पर काफी देर तक असंतोष की स्थिति बनी रही.

किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी उपज सरकारी खरीद व्यवस्था के तहत दी थी, लेकिन भुगतान समय पर नहीं मिला. उनका तर्क है कि खेती का पूरा चक्र नकदी पर निर्भर करता है. एक फसल की राशि अटकने का असर अगली फसल की तैयारी से लेकर परिवार के रोजमर्रा के खर्च तक पड़ता है. यही वजह है कि लंबित भुगतान अब उनके लिए केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि लगातार बढ़ता घरेलू दबाव बन चुका है.

भुगतान के इंतजार में अगली खेती की तैयारी प्रभावित
मझौली से जबलपुर पहुंचे किसानों ने धान, गेहूं और मूंग की राशि लंबित होने की शिकायत उठाई. किसानों के अनुसार मूंग का भुगतान करीब चार साल से अटका हुआ है, जबकि धान और गेहूं की राशि को लेकर भी कई किसानों को लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है.

किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अगली फसल की तैयारी है. खेत तैयार करने, बीज और खाद खरीदने तथा ट्रैक्टर सहित अन्य कृषि कार्यों के लिए नकदी की जरूरत होती है. पिछली उपज का पैसा नहीं मिलने के कारण किसानों को नए खर्च के लिए उधार या कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है.

दीनदयाल चौक पर रुका किसानों का काफिला
बुधवार को बड़ी संख्या में ट्रैक्टर जबलपुर पहुंचे तो पुलिस और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को देखते हुए दीनदयाल चौक पर बैरिकेडिंग कर काफिले को रोक दिया. किसानों की संख्या अधिक होने के कारण पूरे समूह को कलेक्ट्रेट तक ले जाने की अनुमति नहीं दी गई.

प्रशासन की ओर से सीमित संख्या में ट्रैक्टरों को आगे जाने की अनुमति दी गई. बताया गया कि केवल पांच ट्रैक्टरों को कलेक्ट्रेट परिसर तक जाने की मंजूरी मिली. इसके बाद किसानों के प्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई.

शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की मांग
किसानों का कहना था कि वे किसी तरह का विवाद खड़ा करने नहीं, बल्कि अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखने आए हैं. उनका कहना था कि यदि उपज का भुगतान समय पर हो जाए तो खेती का अगला चक्र सुचारू रूप से चलाया जा सकता है.

किसानों ने प्रशासन से लंबित राशि का रिकॉर्ड स्पष्ट कराने और भुगतान की समयसीमा बताने की मांग की. उनका कहना था कि केवल आश्वासन से समस्या हल नहीं होगी. उन्हें यह जानकारी चाहिए कि किस किसान की कितनी राशि लंबित है और उसका भुगतान कब तक किया जाएगा.

घरेलू जरूरतों पर भी पड़ा असर
उपज का भुगतान अटकने का असर किसानों के घरेलू बजट पर भी दिखाई दे रहा है. किसानों के अनुसार बच्चों की फीस, घर के जरूरी खर्च, कृषि सामग्री की खरीद और बैंक से लिए गए कर्ज की किस्तें चुकाना मुश्किल हो रहा है. कई परिवारों के लिए खेती की आमदनी ही सबसे बड़ा आर्थिक सहारा है.

ऐसे में जब उपज बेचने के बाद भी पैसा खाते में नहीं आता तो किसान को अगली जरूरत पूरी करने के लिए फिर से उधार लेना पड़ता है. किसानों का कहना है कि इससे एक फसल का बकाया दूसरी फसल की लागत को प्रभावित करने लगता है और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जाता है.

प्रशासन के सामने भुगतान का रिकॉर्ड स्पष्ट करने की चुनौती
मझौली के किसानों के प्रदर्शन ने सरकारी खरीद के बाद भुगतान की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. किसानों की मांग है कि प्रशासन संबंधित विभागों से जानकारी लेकर लंबित मामलों की समीक्षा करे और पात्र किसानों का भुगतान जल्द कराया जाए.

बुधवार को ट्रैक्टरों के साथ किसानों का जबलपुर पहुंचना इस बात का संकेत है कि लंबित भुगतान को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में नाराजगी बढ़ रही है. अब किसानों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है. यदि भुगतान को लेकर ठोस समयसीमा सामने आती है तो किसानों को राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल उनकी सबसे बड़ी मांग यही है कि खेत में की गई मेहनत की कमाई उन्हें जल्द मिले.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-