ग्वालियर के कारोबारी पर 46.70 लाख की धोखाधड़ी का आरोप, यूनिवर्सिटी खोलने के नाम पर लिया पैसा, बागपत में FIR दर्ज

ग्वालियर के कारोबारी पर 46.70 लाख की धोखाधड़ी का आरोप, यूनिवर्सिटी खोलने के नाम पर लिया पैसा, बागपत में FIR दर्ज

प्रेषित समय :20:38:38 PM / Sat, Oct 10th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. ग्वालियर के सिटी सेंटर क्षेत्र निवासी प्रदीप असवाल पर विश्वविद्यालय खोलने के नाम पर 46.70 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। उत्तराखंड में प्रस्तावित गंगोत्री विश्वविद्यालय में साझेदारी दिलाने का भरोसा देकर रकम लेने के इस मामले में उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की बड़ौत कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में देहरादून निवासी विरेंद्र सिंह बिष्ट को भी आरोपित बनाया गया है। शिकायत चौधरी धर्मार्थ समिति के अध्यक्ष एवं चौधरी चरण सिंह इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. संजीव आर्य ने की है। आरोप है कि दोनों ने करीब दो साल तक अलग-अलग किश्तों में ऑनलाइन रकम ली और बाद में वापस मांगने पर इनकार करते हुए झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। पुलिस ने अदालत के आदेश पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ग्वालियर के प्रदीप असवाल पर साझेदारी का भरोसा देने का आरोप

शिकायत के मुताबिक, डॉ. संजीव आर्य की मुलाकात 20 जुलाई 2023 को देहरादून में विरेंद्र सिंह बिष्ट से हुई थी। आरोप है कि विरेंद्र सिंह ने खुद को उत्तराखंड सरकार के एक कैबिनेट मंत्री का करीबी बताते हुए राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार की जरूरत का हवाला दिया। उसने उत्तराखंड में विश्वविद्यालय खोलने की योजना बताई और इस परियोजना में साझेदारी का प्रस्ताव रखा।

इसके बाद विरेंद्र सिंह ने डॉ. आर्य की मुलाकात ग्वालियर निवासी प्रदीप असवाल से कराई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोनों ने बताया कि गंगोत्री विश्वविद्यालय का प्रस्ताव शासन में लंबित है और विश्वविद्यालय का भवन भी तैयार है। इसी जानकारी के आधार पर उन्हें परियोजना में साझेदार बनने के लिए राजी किया गया।

दो साल में किश्तों में लिए 46.70 लाख रुपये

डॉ. आर्य की शिकायत के अनुसार, विश्वविद्यालय परियोजना में साझेदारी के नाम पर दोनों आरोपितों ने करीब दो साल के दौरान अलग-अलग किश्तों में ऑनलाइन माध्यम से कुल 46.70 लाख रुपये लिए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्हें एक एजुकेशन सोसाइटी का पदाधिकारी बनाया गया।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने विश्वविद्यालय परियोजना से जुड़े आश्वासनों पर भरोसा करके रकम दी थी। बाद में जब परियोजना और पैसे के संबंध में सवाल उठे, तो उन्होंने अपनी राशि वापस मांगनी शुरू की। इसी के बाद विवाद बढ़ गया।

ग्वालियर के इंस्टीट्यूट तक पहुंचा विवाद

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदीप असवाल डॉ. संजीव आर्य के इंस्टीट्यूट पहुंचा था। इस दौरान रकम लौटाने की मांग पर उसने कथित तौर पर इनकार कर दिया। डॉ. आर्य का आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी कार्रवाई की मांग की। अदालत के आदेश पर बागपत की बड़ौत कोतवाली में दोनों आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस अब शिकायत में बताए गए घटनाक्रम और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।

बागपत में FIR, ग्वालियर के पते का भी उल्लेख

मामले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, प्रदीप असवाल ग्वालियर के सचिन तेंदुलकर मार्ग, सिटी सेंटर क्षेत्र का निवासी बताया गया है। दूसरे आरोपित विरेंद्र सिंह बिष्ट का पता देहरादून के बांजरवाला, सहारनपुर रोड क्षेत्र का दर्ज है।

बड़ौत कोतवाली प्रभारी दीक्षित कुमार त्यागी के अनुसार, अदालत के आदेश पर दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। अभी जांच के निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं।

विश्वविद्यालय के प्रस्ताव और लेनदेन की होगी पड़ताल

इस मामले में जांच के दौरान प्रस्तावित गंगोत्री विश्वविद्यालय की वास्तविक स्थिति, शासन में लंबित बताए गए प्रस्ताव और साझेदारी से संबंधित दस्तावेजों की अहम भूमिका हो सकती है। पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि 46.70 लाख रुपये किन खातों में भेजे गए, रकम लेने का उद्देश्य क्या बताया गया था और कथित एजुकेशन सोसाइटी से जुड़े दस्तावेज क्या कहते हैं।

फिलहाल मामला प्राथमिकी दर्ज होने और जांच के स्तर पर है। आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्राथमिकी में नाम दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-