जबलपुर को बड़ा झटका! 25 अक्टूबर से इंदौर की सीधी फ्लाइट बंद, 400 करोड़ खर्च के बाद भी हवाई कनेक्टिविटी पर संकट

जबलपुर को बड़ा झटका! 25 अक्टूबर से इंदौर की सीधी फ्लाइट बंद, 400 करोड़ खर्च के बाद भी हवाई कनेक्टिविटी पर संकट

प्रेषित समय :20:45:23 PM / Sat, Oct 10th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

 नगर प्रतिनिधि, जबलपुर. संस्कारधानी  से इंदौर जाने वाले यात्रियों के लिए 24 अक्टूबर आखिरी दिन साबित हो सकता है. 25 अक्टूबर से लागू होने वाले विंटर शेड्यूल में जबलपुर-इंदौर की सीधी विमान सेवा को जगह नहीं मिली है. ऐसे में शहर का इंदौर से सीधा हवाई संपर्क टूटने की आशंका है. इसका असर केवल यात्रियों की आवाजाही पर ही नहीं, बल्कि व्यापार, उद्योग और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है. जबलपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए सवाल उठाया है कि जब एयरपोर्ट के विकास पर 400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं, तो शहर की हवाई कनेक्टिविटी लगातार प्रभावित क्यों हो रही है? कारोबारियों ने उड़ान बंद करने के बजाय जबलपुर-इंदौर-अहमदाबाद और जबलपुर-इंदौर-पुणे जैसे वैकल्पिक रूट तलाशने की मांग की है.

24 अक्टूबर के बाद इंदौर के लिए सीधी उड़ान पर संकट
विमान कंपनियों के आगामी विंटर शेड्यूल में जबलपुर-इंदौर उड़ान को शामिल नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है. मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार, यह सेवा 24 अक्टूबर तक संचालित होगी. इसके बाद जबलपुर और इंदौर के बीच सीधी हवाई यात्रा का विकल्प उपलब्ध नहीं रहने की आशंका है.

इस बदलाव से उन यात्रियों को परेशानी हो सकती है, जो व्यावसायिक बैठकों, कारोबार, नौकरी या अन्य जरूरी कामों के लिए दोनों शहरों के बीच आते-जाते हैं. सीधी उड़ान बंद होने की स्थिति में यात्रियों को सड़क या रेल मार्ग का सहारा लेना पड़ेगा. वहीं, दूसरे शहर से होकर हवाई यात्रा करने पर समय और खर्च बढ़ सकता है.

400 करोड़ खर्च के बाद भी कनेक्टिविटी पर सवाल
जबलपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रेम दुबे ने उड़ान सेवा बंद होने को शहर के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उनका कहना है कि हवाई कनेक्टिविटी का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है. इसका सीधा संबंध व्यापार, उद्योग और कारोबारी गतिविधियों से भी है.

प्रेम दुबे के मुताबिक, व्यापारी कम समय में दूसरे शहरों तक पहुंचने के लिए विमान सेवा का उपयोग करते हैं. जबलपुर और इंदौर के बीच सीधी उड़ान बंद होने से उन्हें लंबी सड़क यात्रा या दूसरे माध्यमों पर निर्भर रहना पड़ेगा. इससे व्यापारिक कामकाज के लिए उपलब्ध समय प्रभावित हो सकता है.

उन्होंने एयरपोर्ट के विकास पर 400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि शहर से उड़ानें ही कम होती जाएंगी, तो इस बुनियादी ढांचे का अपेक्षित लाभ कैसे मिलेगा. उनका कहना है कि एयरपोर्ट का विकास तभी सार्थक होगा, जब यात्रियों को पर्याप्त और भरोसेमंद हवाई सेवाएं भी उपलब्ध हों.

बार-बार उड़ानें शुरू और बंद होने से यात्रियों में असमंजस
प्रेम दुबे ने कहा कि पिछले चार वर्षों में जबलपुर से कई बार विमान सेवाएं शुरू हुईं और फिर बंद हो गईं. इस स्थिति के कारण दूसरे शहरों से जबलपुर आने वाले व्यापारियों के सामने अनिश्चितता बनी रहती है. उन्हें पहले से यह भरोसा नहीं होता कि यात्रा के समय संबंधित शहर के लिए सीधी उड़ान उपलब्ध होगी या नहीं.

उनके अनुसार, हवाई सेवाओं में निरंतरता जरूरी है. बार-बार रूट बदलने या उड़ान बंद होने से यात्रियों को अपनी योजनाएं बदलनी पड़ती हैं. इसका असर जबलपुर में होने वाली व्यावसायिक बैठकों, कारोबारी संपर्कों और अन्य गतिविधियों पर भी पड़ सकता है.

उड़ान बंद करने के बजाय दूसरे रूट तलाशने की मांग
जबलपुर की महिला कारोबारी प्रीति चौधरी ने कहा कि हाल ही में इंडिगो के अधिकारियों के साथ हुई बातचीत में उड़ान को पूरी तरह बंद करने के बजाय वैकल्पिक रूट तलाशने का सुझाव दिया गया था.

उन्होंने जबलपुर-इंदौर-अहमदाबाद और जबलपुर-इंदौर-पुणे जैसे संभावित रूट का विकल्प सामने रखा. कारोबारियों का कहना है कि यदि इन शहरों के लिए जोड़कर विमान सेवा संचालित करने की व्यावहारिक संभावना बनती है, तो जबलपुर के यात्रियों को दूसरे बड़े व्यावसायिक केंद्रों तक पहुंचने की सुविधा मिल सकती है.

ऐसी व्यवस्था से जबलपुर का हवाई संपर्क बनाए रखने के साथ विमान सेवा का बेहतर उपयोग करने की संभावना भी तलाशी जा सकती है. हालांकि, इन वैकल्पिक रूट पर उड़ान संचालन को लेकर अभी किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है.

जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की अपेक्षा
कारोबारियों ने जबलपुर के सांसद, विधायकों और मंत्रियों से शहर की हवाई कनेक्टिविटी का मुद्दा उठाने की मांग की है. उनका कहना है कि क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को बनाए रखने के लिए जनप्रतिनिधियों को विमान कंपनियों और संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा करनी चाहिए.

व्यापारियों के मुताबिक, जबलपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर के लिए हवाई सेवाओं में स्थिरता जरूरी है. यदि किसी उड़ान का मौजूदा रूट व्यावसायिक रूप से उपयोगी नहीं माना जा रहा है, तो उसे पूरी तरह बंद करने से पहले दूसरे रूट, उड़ान के समय और यात्रियों की जरूरतों के विकल्पों का आकलन किया जाना चाहिए.

दिल्ली-मुंबई समेत कई शहरों के लिए उपलब्ध हैं उड़ानें
फिलहाल जबलपुर एयरपोर्ट से दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, पुणे, इंदौर और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों के लिए उड़ानें संचालित होने की जानकारी है. इनमें कुछ सेवाएं नियमित हैं, जबकि कुछ सीमित दिनों में उपलब्ध रहती हैं. विंटर शेड्यूल में होने वाले बदलावों के कारण उड़ानों की वास्तविक उपलब्धता और समय में अंतर आ सकता है.

कारोबारियों की मांग है कि 25 अक्टूबर से पहले जबलपुर-इंदौर की सीधी उड़ान को जारी रखने या किसी व्यावहारिक वैकल्पिक रूट के साथ संचालित करने पर निर्णय लिया जाए.

यात्रियों के हित में समय रहते फैसला जरूरी
जबलपुर-इंदौर उड़ान बंद होने की आशंका ने शहर की हवाई कनेक्टिविटी को लेकर चिंता बढ़ा दी है. यदि सेवा बंद होती है, तो यात्रियों को वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था बनानी पड़ेगी. इसका असर उन लोगों पर अधिक पड़ सकता है, जिनके लिए कम समय में दूसरे शहर पहुंचना जरूरी है.

अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विमान कंपनी और विमानन अधिकारी इस मार्ग की उपयोगिता, यात्रियों की मांग और संभावित वैकल्पिक रूट का आकलन करें. जबलपुर के कारोबारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर को केवल एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे की नहीं, बल्कि नियमित और भरोसेमंद हवाई सेवाओं की भी जरूरत है. 25 अक्टूबर से पहले इस दिशा में निर्णय होता है या नहीं, इस पर यात्रियों और कारोबारी जगत की नजर रहेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-